तालिबान और ISI के बीच गहरा कनेक्शन, नजरअंदाज न करे भारत, अफगानिस्तान के निर्वासित राष्ट्रपति ने किया आगाह
अफगानिस्तान के कार्यवाहक निर्वासित राष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह ने भारत सरकार को पाकिस्तान-तालिबान नेक्सस को नजरअंदाज न करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि भारत को इन दो देशों के बीच के संबंध को कम नहीं आंकना चाहिए।
अमरुल्ला सालेह ने किसी अज्ञात स्थान से न्यूज18 के स्पेशल इंटरव्यू में ये बातें कहीं। अमरुल्ला सालेह ने कहा कि आप दोबारा सत्ता में आने के बाद से तालिबान और आईएसआई के बीच संबंध को कम नहीं आंक सकते।

उन्होंने कहा कि भारतीय विश्लेषक पाकिस्तान की मदरसा प्रणाली और अफगान तालिबान के बीच संबंध को कम आंकते हैं। सालेह ने कहा कि वो पाकिस्तान ही है जो तालिबान को समर्थन दे रहा है। जिस दिन पाकिस्तान ने तालिबान को समर्थन देना बंद कर दिया, वह बिखर जाएगा।
अमरुल्ला सालेहन ने कहा कि कुछ लोग हैं जो मुल्ला याकूब जैसे तालिबान नेताओं से प्रभावित हैं, लेकिन वह सब तब बदल जाएगा जब आप एक और आतंकवादी हमला देखेंगे।
आपको बता दें कि अगस्त 2021 में तालिबान के दोबारा सत्ता पर कब्जा कर लेने के दौरान तत्कालीन राष्ट्रपति अशरफ गनी देश छोड़कर भाग गए थे। इसके बाद अमरुल्ला सालेह ने खुद को देश का कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित कर दिया था।
वर्तमान में अमरुल्ला सालेह किसी अज्ञात पर रहकर तालिबान के खिलाफ लड़ाई का नेतृत्व कर रहे हैं। सालेह ने कि यह बिल्कुल गलत बात है कि गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के पास तालिबान को पालने के लिए संसाधनों की कमी है।
उन्होंने कहा, "पाकिस्तान आईएसआई के लगभग 300 अधिकारी अफगानिस्तान में मान्यता प्राप्त हैं और इससे दोगुनी संख्या में डॉक्टर, एनजीओ और व्यवसायियों की आड़ में देश में काम कर रहे हैं। ये अब किसी से छिपा नहीं रह गया है। पाकिस्तानी अधिकारी तालिबान की स्ट्राइक यूनिटों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। तालिबान के रणनीतिक संचार में पाकिस्तानी आका हैं।"












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