Donald Trump: डीप स्टेट की साजिश थी ट्रंप पर हमला? किस-किस पर गई शक की सुई? लिस्ट में कई नाम

Donald Trump: व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर (WHCD) में हुई गोलीबारी के बाद इंटरनेट पर कई तरह की अटकलें और साजिशी दावे तेजी से फैलने लगे। इनमें False Flag, विदेशी एंगल, और Deep State (अमेरिकी राष्ट्रपति के सबसे करीबी अधिकारी) जैसे अलग-अलग गुटों पर उंगलियां उठ रही हैं। लेकिन इनमें सबसे ज्यादा चर्चा में है। जहां फेेडेरल जांच एजेंसियों ने हमलावर कोल टॉमस एलन को एक अकेला भेड़िया यानी lone wolf चरमपंथी बताया है, वहीं घटना के तुरंत बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और ऑनलाइन फोरम्स पर तरह-तरह की कहानियां वायरल होने लगीं।

अधूरी जानकारी ने बढ़ाई अफवाहें

जब किसी बड़ी घटना के तुरंत बाद पूरी जानकारी सामने नहीं आती, तो अफवाहें तेजी से फैलती हैं। इस मामले में भी ऐसा ही हुआ। वेब पर सरकारी साजिशों से लेकर विदेशी एजेंसियों की भूमिका तक के दावे सामने आए। कुछ लोगों ने कहा कि यह हमला किसी बड़े एजेंडे का हिस्सा था, जबकि कुछ ने इसे सुरक्षा नीतियों से जोड़ दिया।

Donald Trump

क्या यह 'फेक फ्लैग' हमला था?

सबसे ज्यादा वायरल हुए दावों में से एक False Flag थ्योरी थी। इस थ्योरी में कहा गया कि हमला जानबूझकर रचा गया था। इस दावे के मुताबिक, घटना को या तो जियो पॉलिटिकल टेंशन से लोगों का ध्यान हटाने के लिए इस्तेमाल किया गया, या फिर नई सुरक्षा व्यवस्थाओं को सही ठहराने के लिए प्लान किया गया। हालांकि, इस दावे के समर्थन में कोई आधिकारिक सबूत सामने नहीं आया है

डाना व्हाइट और स्काविनो को लेकर भी उठे सवाल

कुछ साजिश सिद्धांतकारों ने UFC अध्यक्ष डाना व्हाइट के "नीचे बैठने" से इनकार करने और डैन स्काविनो द्वारा राष्ट्रपति को बाहर ले जाते समय "यू-एस-ए" के नारे लगाने की कोशिश पर सवाल उठाए। उनका दावा था कि यह दिखाता है कि कुछ अंदरूनी लोगों को पहले से पता था कि वे खतरे में नहीं हैं। लेकिन अधिकारियों ने इस थ्योरी को खारिज कर दिया है।

सीक्रेट सर्विस एजेंट को लगी थी गोली

False Flag वाले दावों को कमजोर करने वाला एक बड़ा तथ्य यह भी है कि घटना में एक सीक्रेट सर्विस एजेंट को गोली लगी थी। उसकी जान सिर्फ बैलिस्टिक वेस्ट यानी बुलेटप्रूफ जैकेट की वजह से बची। अगर हमला सिर्फ नाटक होता, तो ऐसी असली चोट की संभावना बहुत कम मानी जाती है।

'इज़राइल कनेक्शन' की थ्योरी भी हुई वायरल

एक और वायरल दावा "इज़राइल कनेक्शन" से जुड़ा था। कुछ लोगों ने कहा कि हमले से पहले इज़राइल में एलन के नाम की असामान्य सर्च गतिविधि देखी गई थी। इसके आधार पर कुछ यूजर्स ने विदेशी खुफिया एजेंसी की संलिप्तता तक के दावे कर दिए। कुछ बिना तथ्यों वाली तस्वीरें भी शेयर की गईं, जिनमें कहा गया कि एलन के इज़राइली संस्थानों से संबंध थे।

जांच में नहीं मिला विदेशी हाथ का सबूत

अब तक जांच एजेंसियों को किसी विदेशी फंडिंग, प्रायोजन या खुफिया एजेंसी की भूमिका का कोई सबूत नहीं मिला है। एलन के लिखित दस्तावेज़ों और डिजिटल रिकॉर्ड में सिर्फ उसकी व्यक्तिगत सोच और विचारधारा का जिक्र मिला है। उनमें इज़राइल का कोई उल्लेख नहीं पाया गया।

'डीप स्टेट' और कश पटेल को लेकर भी चर्चा

एक और लगातार चलने वाली थ्योरी "डीप स्टेट" से जुड़ी थी। यह चर्चा इस बात पर केंद्रित रही कि एलन ने अपनी कथित लक्ष्य सूची से FBI निदेशक कश पटेल को बाहर क्यों रखा। कुछ लोगों ने दावा किया कि इसका मतलब है कि वह सिस्टम के अंदर के लोगों से मिला हुआ था या उसे निर्देश मिले थे।

जांच एजेंसियों का क्या कहना है?

जांचकर्ताओं का मानना है कि कश पटेल को बाहर रखना किसी साजिश का हिस्सा नहीं, बल्कि एलन की निजी सोच का नतीजा था। यानी यह उसकी व्यक्तिगत राय थी, किसी संगठित नेटवर्क का संकेत नहीं।

हथियार लेकर अंदर कैसे पहुंचा आरोपी?

लोगों ने यह सवाल भी उठाया कि एलन कई हथियार लेकर होटल के अंदर कैसे पहुंच गया। कुछ लोगों ने कहा कि यह सुरक्षा में जानबूझकर दी गई ढील थी। लेकिन अधिकारियों के मुताबिक, यह एक सुरक्षा चूक थी, न कि किसी साजिश का हिस्सा।

कट्टरपंथी समूहों के नाम भी घसीटे गए

"द वाइड अवेक्स" और "नो किंग्स" जैसे विरोध समूहों का नाम भी सोशल मीडिया पर जोड़ा गया। कुछ यूजर्स ने कहा कि हमला किसी बड़े कॉर्डिनेटेड ऑपरेशन का हिस्सा था। हालांकि, इन दोनों समूहों ने किसी भी भूमिका से इनकार किया है।

क्या आरोपी पहले इन समूहों से जुड़ा था?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, एलन पहले कुछ विरोध प्रदर्शनों में शामिल हुआ था, जहां ये समूह भी मौजूद थे। लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि हमला संगठित साजिश था। अब तक ऐसा कोई पक्का सबूत सामने नहीं आया है।

एजेंसियों ने दी गलत सूचना से बचने की चेतावनी

एफबीआई और न्याय विभाग सहित कई एजेंसियों ने लोगों से अपील की है कि गलत जानकारी से बचें और बिना पुष्टि के दावे शेयर न करें। उनका कहना है कि मौजूदा सबूत यही दिखाते हैं कि यह एक अकेले कट्टरपंथी व्यक्ति की कार्रवाई थी, न कि किसी बड़े नेटवर्क या साजिश का हिस्सा।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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