'मोदी और मैं हमेशा रहेंगे दोस्त, वो महान PM हैं', भारत को खो देने वाले बयान के बाद ट्रंप ने क्यों लिया यू-टर्न
Donald Trump VS PM Modi: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने बयान पर यू-टर्न ले लिया है। कुछ घंटे पहले ही उन्होंने कहा था कि अमेरिका "भारत और रूस को चीन के हाथों खो चुका है।" लेकिन इसके तुरंत बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने गहरे रिश्तों को याद करते हुए कहा कि वे मोदी के "हमेशा दोस्त" रहेंगे और भारत-अमेरिका का रिश्ता "खास" है। ये बयान ट्रंप ने 5-6 सितंबर के दरमियान कुछ घंटों के बीच ही दिया है।
डोनाल्ड ट्रंप ने जहां एक ओर भारत पर भारी-भरकम टैरिफ लगाकर कड़ा रुख अपनाया है, वहीं दूसरी ओर पीएम मोदी के साथ दोस्ती और भारत-अमेरिका के "स्पेशल रिलेशनशिप" की भी दुहाई दी है। यानी बयानबाजी सख्त है, लेकिन रिश्तों की डोर अब भी मजबूत बताई जा रही है।

पहले ट्रंप का विवादित पोस्ट और फिर नरमी
ट्रंप ने 'मोदी और मैं हमेशा रहेंगे दोस्त' रहेंगे वाले बयान देने से कुछ घंटे पहले ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर एक तस्वीर साझा की थी, जिसमें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और पीएम नरेंद्र मोदी दिखाई दे रहे थे। इसके साथ उन्होंने कैप्शन लिखा-"लगता है हमने भारत और रूस को चीन के सबसे अंधेरे गहराई वाले खेमे में खो दिया है। उम्मीद है उन्हें साथ मिलकर लंबा और समृद्ध भविष्य मिले!"
ट्रंप का बड़ा पलटी बयान- 'मुझे नहीं लगता हमने भारत को खोया है'
लेकिन जब उनसे इस पर सवाल किया गया कि भारत को चीन के पाले में धकेलने के लिए वे किसे दोषी मानते हैं, तो ट्रंप ने कहा,
"मुझे नहीं लगता कि हमने भारत को खोया है। हां, मैं इस बात से निराश हूं कि भारत रूस से इतना तेल खरीद रहा है। मैंने उन्हें यह बात साफ बता दी है। हमने भारत पर बहुत बड़ा टैरिफ लगाया है -50% का, जो काफी ज्यादा है। लेकिन जैसा कि आप जानते हैं, मेरा पीएम मोदी के साथ बहुत अच्छा रिश्ता है। वे कुछ महीने पहले ही यहां आए थे।''
रूस से तेल आयात पर अमेरिका की आपत्ति
ट्रंप ने यह भी दोहराया कि अमेरिका भारत की रूस से तेल खरीद से खुश नहीं है। इसी वजह से उन्होंने हाल ही में भारतीय आयात पर 50% का टैरिफ लगाया, जो 27 अगस्त 2025 से लागू हो चुका है। इस टैरिफ का आधा हिस्सा सीधे तौर पर भारत-रूस ऊर्जा व्यापार को लेकर पेनल्टी के तौर पर लगाया गया है।
'मोदी महान नेता हैं, भारत-अमेरिका का रिश्ता खास'
अपने कठोर फैसलों के बावजूद ट्रंप ने मोदी की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, "मैं हमेशा मोदी का दोस्त रहूंगा। वह एक महान प्रधानमंत्री हैं। बस मुझे इस वक्त उनका एक कदम पसंद नहीं आ रहा। लेकिन भारत और अमेरिका के बीच एक खास रिश्ता है। इसमें चिंता करने जैसी कोई बात नहीं है।"
भारत पर ट्रंप प्रशासन का दबाव
ट्रंप प्रशासन के कई बड़े अधिकारी, जैसे हॉवर्ड लुटनिक, पीटर नवारो और स्कॉट बेसेंट, बार-बार भारत को रूस से व्यापार के लिए निशाना बना चुके हैं। हाल ही में पीटर नवारो ने यहां तक कह दिया कि 'भारत के ब्राह्मण रूस से तेल खरीद कर मुनाफा कमा रहे हैं और इसकी कीमत आम भारतीय चुका रहा है।' भारत सरकार ने इस बयान को "भ्रामक और गलत" करार देते हुए सख्ती से खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय ने कहा-"हम ऐसे बयानों को पूरी तरह खारिज करते हैं।"
भारत-अमेरिका ट्रेड बातचीत जारी
भले ही टैरिफ और तीखे बयानों से रिश्ते में तल्खी दिख रही हो, लेकिन भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक बातचीत अब भी जारी है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में कहा कि "इसमें चिंता की कोई जरूरत नहीं है।" उन्होंने साफ किया कि ऐसे वार्तालाप धैर्य से आगे बढ़ाए जाते हैं और इनके लिए कोई तय समयसीमा नहीं होती।












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