Donald Trump Tariffs: ट्रंप के Auto टैरिफ से अमेरिकी EV इंडस्ट्री को कैसे तगड़ा झटका? इन 5 Points में समझें
Donald Trump Tariffs EV Impact: अमेरिका में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बिक्री ने 1 मिलियन का आंकड़ा पार कर लिया है, और इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। EV की कीमतें अब पेट्रोल कारों के करीब पहुंच रही हैं, जिससे यह भविष्य का परिवहन बनता जा रहा है। लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई नीतियों से इस सेक्टर को बड़ा झटका लग सकता है।
ट्रंप ने आयातित (Imported) वाहनों और उनके पुर्जों पर 25% टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। इससे ऑटोमोबाइल सेक्टर में हलचल मच गई है, क्योंकि इससे वाहनों की कीमतों में 10,000 डॉलर तक की बढ़ोतरी हो सकती है। जहां ट्रंप इसे अमेरिकी ऑटो उद्योग (Auto Industry) के लिए फायदेमंद बता रहे हैं, वहीं इसका ईवी (Electric Vehicle) सेक्टर पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

ट्रंप का 'अमेरिका फर्स्ट' एजेंडा, जिसमें आयात पर भारी टैरिफ शामिल हैं, EV उद्योग के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। उन्होंने सभी आयातित वस्तुओं पर 10-20% और चीन से आने वाले उत्पादों पर 60-100% तक का टैरिफ लगाने की योजना बनाई है। इससे बैटरी, स्टील और अन्य आवश्यक सामग्रियों की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे EVs की लागत भी बढ़ेगी।
क्यों बढ़ेगी EV की कीमत?
चीन बैटरी उत्पादन में अग्रणी है, जहां से अमेरिका 4 बिलियन डॉलर की लिथियम-आयन बैटरियां आयात करता है। ट्रंप के टैरिफ इनकी कीमतें दोगुनी से भी ज्यादा बढ़ा सकते हैं। EV बैटरी के अलावा, सौर और पवन ऊर्जा प्रोजेक्ट्स के लिए ज़रूरी स्टील की लागत में भी 1.1 से 4.2 बिलियन डॉलर तक की वृद्धि हो सकती है।
अमेरिका में EVs का सबसे बड़ा आयातक है, जो पिछले साल 44 बिलियन डॉलर की इलेक्ट्रिक गाड़ियां विदेशों से लाया। यदि टैरिफ लागू होते हैं, तो EV की कीमतें 4.4 से 8.8 बिलियन डॉलर तक बढ़ सकती हैं। इससे फोर्ड और जनरल मोटर्स जैसी कंपनियों को झटका लगेगा, जो अपनी कई गाड़ियां मेक्सिको से आयात करती हैं।
घरेलू उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा या बढ़ेगी महंगाई?
ट्रंप समर्थकों का कहना है कि इन टैरिफ से अमेरिकी विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा और नौकरियां बचेंगी। लेकिन विशेषज्ञों की मानें, तो इससे अमेरिकी कंपनियों और उपभोक्ताओं की लागत बढ़ेगी। अर्थशास्त्री चेतावनी दे रहे हैं कि टैरिफ मुद्रास्फीति को तेज कर सकते हैं, व्यापारिक तनाव बढ़ा सकते हैं और आर्थिक विकास को धीमा कर सकते हैं।
अब सवाल यह उठता है कि ट्रंप के टैरिफ से ईवी सेक्टर को कैसे नुकसान होगा और कौन-कौन सी कंपनियां इससे प्रभावित हो सकती हैं? आइए, इसे 5 अहम बिंदुओं में समझते हैं...
1️⃣ अमेरिका में नई ऑटो फैक्ट्रियां ईवी बना रही हैं, फिर भी नुकसान क्यों होगा?
हालांकि, अमेरिका में अधिकतर नई ऑटो फैक्ट्रियां ईवी और बैटरी मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस कर रही हैं, लेकिन समस्या यह है कि ईवी बैटरियों के लिए जरूरी कच्चा माल चीन से आता है। ट्रंप के टैरिफ की वजह से इन बैटरियों की लागत बढ़ेगी, जिससे ईवी महंगे हो जाएंगे।
इससे न सिर्फ ईवी की बिक्री प्रभावित होगी, बल्कि ईवी निर्माण से जुड़ी नौकरियों पर भी संकट आ सकता है। हालांकि, कुछ कंपनियां जैसे टेस्ला इस स्थिति का फायदा उठा सकती हैं।
2️⃣ टेस्ला को क्यों फायदा होगा? क्या एलन मस्क और ट्रंप के अच्छे संबंध इसकी वजह हैं?
टेस्ला को अन्य ईवी कंपनियों की तुलना में कम नुकसान होगा क्योंकि यह पहले से ही अपने अधिकतर पुर्जे अमेरिका में ही बनाती है। अमेरिका में बेची जाने वाली 600,000+ टेस्ला कारें कैलिफ़ोर्निया या टेक्सास में बनी होती हैं, जिससे टैरिफ का प्रभाव कम होगा।
जहां तक ट्रंप और एलन मस्क के संबंधों की बात है, तो ट्रंप हमेशा से उच्च टैरिफ के पक्षधर रहे हैं। टेस्ला का अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाना ट्रंप की नीतियों से पहले का फैसला था, इसलिए यह कहना गलत होगा कि टैरिफ मस्क के फायदे के लिए डिजाइन किए गए हैं।
3️⃣हुंडई को कैसे फायदा मिल सकता है?
हुंडई ने ट्रंप की नीतियों से समझदारी से निपटने की रणनीति बनाई है। हाल ही में, इसके चेयरमैन यूइसुन चुंग ने व्हाइट हाउस में 21 बिलियन डॉलर के अमेरिकी निवेश की घोषणा की। साथ ही, हुंडई ने जॉर्जिया में अपना नया ईवी प्लांट उसी दिन लॉन्च किया, जिस दिन ट्रंप ने टैरिफ का ऐलान किया।
लेकिन असल में, हुंडई की अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने की योजना बाइडेन के इंफ्लेशन रिडक्शन एक्ट (IRA) की वजह से थी, जो ईवी सेक्टर को टैक्स बेनिफिट देता है। अब सवाल यह है कि अगर ट्रंप दोबारा सत्ता में आए और उन्होंने ये टैक्स क्रेडिट खत्म कर दिए, तो इन कंपनियों का क्या होगा?
4️⃣ईवी टैक्स क्रेडिट से घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलता है, फिर ट्रंप इसे क्यों खत्म करना चाहते हैं?
ईवी टैक्स क्रेडिट को चीन पर निर्भरता घटाने और अमेरिका में बैटरी व ईवी उत्पादन बढ़ाने के लिए डिजाइन किया गया था। इस क्रेडिट का फायदा उठाने के लिए कंपनियों को अमेरिका या उसके सहयोगी देशों से अधिक पुर्जे खरीदने होते हैं।
लेकिन ट्रंप और रिपब्लिकन इसे सरकार की ओर से बाज़ार में हस्तक्षेप मानते हैं। वे इसे 168 बिलियन डॉलर का खर्च बताते हुए खत्म करना चाहते हैं। समस्या यह है कि अगर टैक्स क्रेडिट खत्म होता है, तो ईवी की कीमतें बढ़ेंगी और बिक्री घटेगी। इससे ईवी फैक्ट्रियों में नौकरियों का संकट खड़ा हो सकता है।

5️⃣जॉर्जिया में हुंडई जैसी कंपनियों के नए ईवी प्लांट्स का क्या होगा?
प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन के मुताबिक, अगर ईवी टैक्स क्रेडिट खत्म हो गया, तो 2026 तक बनने वाली अधिकतर ईवी और बैटरी फैक्ट्रियां बंद हो सकती हैं। इसकी वजह यह है कि ईवी की मांग ही इतनी नहीं होगी कि वे प्रॉफिट में रह सकें।
यही कारण है कि कई रिपब्लिकन नेता भी अब इसे तुरंत खत्म करने के बजाय धीरे-धीरे हटाने की बात कर रहे हैं। उनके जिलों में 118,000 नौकरियों वाली 228 बैटरी सप्लाई चेन प्रोजेक्ट्स पाइपलाइन में हैं, और वे नहीं चाहते कि ये नौकरियां खत्म हों।
विभिन्न देशों से आयातित वस्तुओं पर टैरिफ कितना?
स्टील और एल्युमिनियम पर टैरिफ (फरवरी 2025):
- स्टील: सभी देशों से आयातित स्टील पर 25% टैरिफ लगाया गया।
- एल्युमिनियम: सभी देशों से आयातित एल्युमिनियम पर 25% टैरिफ लगाया गया, जो पहले 10% था।
चीन से आयातित वस्तुओं पर टैरिफ (अप्रैल 2025):
- चीन: चीन से आयातित वस्तुओं पर 34% तक के टैरिफ लगाए गए।
यूरोपीय संघ से आयातित वस्तुओं पर टैरिफ (अप्रैल 2025):
- यूरोपीय संघ से आयातित वस्तुओं पर 20% टैरिफ लगाया गया।
ताइवान से आयातित वस्तुओं पर टैरिफ (अप्रैल 2025):
- ताइवान से आयातित वस्तुओं पर 32% टैरिफ लगाया गया।
वियतनाम से आयातित वस्तुओं पर टैरिफ (अप्रैल 2025):
- वियतनाम से आयातित वस्तुओं पर 46% टैरिफ लगाया गया।
थाईलैंड से आयातित वस्तुओं पर टैरिफ (अप्रैल 2025):
- थाईलैंड से आयातित वस्तुओं पर 36% टैरिफ लगाया गया।
भारत से आयातित वस्तुओं पर टैरिफ (अप्रैल 2025):
- भारत से आयातित वस्तुओं पर 26% टैरिफ लगाया है।
इन टैरिफों का उद्देश्य अमेरिकी उद्योगों की रक्षा करना था, लेकिन इससे वैश्विक व्यापार में तनाव और बाजार में अस्थिरता देखी गई।

क्या ट्रंप की नीति ईवी इंडस्ट्री के लिए घातक साबित होगी?
ट्रंप के 25% ऑटो टैरिफ का असर सिर्फ विदेशी कंपनियों पर नहीं, बल्कि अमेरिकी ईवी मैन्युफैक्चरिंग पर भी पड़ेगा। चीन से आने वाले बैटरी कंपोनेंट्स महंगे हो जाएंगे, जिससे ईवी की लागत बढ़ेगी और बिक्री घट सकती है। अगर ट्रंप ईवी टैक्स क्रेडिट भी खत्म कर देते हैं, तो नई ईवी फैक्ट्रियों और हजारों नौकरियों पर खतरा मंडरा सकता है। हालांकि, टेस्ला जैसी कंपनियां इससे बच सकती हैं, लेकिन कई अन्य ईवी मैन्युफैक्चरर्स को नुकसान होगा।
अब देखना यह होगा कि रिपब्लिकन इस नीति में बदलाव करते हैं या नहीं, क्योंकि इसका असर उनके अपने जिलों में बनने वाली नई फैक्ट्रियों पर भी पड़ सकता है।












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