डोनाल्‍ड ट्रंप वैज्ञानिकों से बोले-पता लगाइए कि शरीर में रोशनी और गर्मी क्‍या इंजेक्‍शन से पहुंचाई जा सकती है?

वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने गुरुवार को व्‍हाइट हाउस में प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में एक अजीबो-गरीब सुझाव वैज्ञानिकों को दिया है। ट्रंप ने वैज्ञानिकों से कहा है कि वो इस बात की जांच करें कि क्‍या किसी तरह से इंसानों के शरीर में रोशनी, गर्मी या फिर कीटाणुनाशक को इंजेक्‍शन के जरिए पहुंचाया जा सकता है। ट्रंप की इस बात पर उनका जबरदस्‍त विरोध हो रहा है।

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कैसा हो अगर ताकतवर हो जाए बॉडी

ट्रंप ने यह बात उस समय कही जब वह एक रिसर्च का हवाला देते हुए कह रहे थे कि गर्मी, उमस और सूरज की तेज रोशनी में कोरोना वायरस बेसअर रहता है। हालांकि उनकी इस थ्‍योरी को किसी का समर्थन नहीं मिला है। ट्रंप ने व्‍हाइट हाउस में मीडिया के सामने कहा, 'सोचिए कि अगर हम शरीर को एक असाधारण तत्‍व से लैस कर लें, चाहे वह अल्‍ट्रावॉयलेट किरणें हों या फिर तेज रोशनी हो।' इसके बाद उन्‍होंने वैज्ञानिकों की तरफ इशारा करते हुए कहा कि जरा सोचिए अगर आप शरीर के अंदर रोशनी त्‍वचा या फिर किसी और रास्‍ते से पहुंचा सकें। ट्रंप ने वैज्ञानिक विलियम ब्रायन से कहा कि वह न संभावनाओं को तलाशें। ब्रायन होमलैंड सिक्‍योरिटी डिपार्टमेंट के साथ वैज्ञानिक और टेक्‍नोलॉजी एडवाइजर हैं। विलियम ब्रायन की तरफ से व्‍हाइट हाउस में उस रिसर्च का जिक्र भी किया गया है जिसमें यह बात साबित हुई है कि यह बात कही गई है। ब्रायन ने कहा ज्‍यादा तापमान और उमस के माहौल में आता है, कमजोर पड़ जाता है। व्‍हाइट हाउस में न्‍यूज ब्रीफिंग के दौरान ब्रायन ने कहा, 'वायरस सूरज की तेज रोशनी में शीघ्रता से खत्‍म हो जाता है।'

पहले ही एक आइडिया हो चुका है फेल

अमेरिका के राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने मलेरिया की जिस दवा हाइड्रोक्‍सीक्‍लोरोक्‍वीन (एचसीक्‍यू) को कोरोना वायरस महामारी के बीच 'गेम चेंजर' करार दिया था, उसे अमेरिकी एजेंसी ने कुछ दिनों पहले खारिज कर दिया है। मंगलवार को अमेरिका की टॉप एजेंसी ने मलेरिया की इस दवा का प्रयोग करने से मना कर दिया है। एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि कोविड-19 का महामारी में ट्रायल नहीं हुआ है। ऐसे में बिना ट्रायल के इसका प्रयोग ठीक नहीं है। एचसीक्‍यू के अलावा एक और एंटी-बायोटिक एजिथ्रोमिसिन के प्रयोग से भी मना कर दिया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि एचसीक्‍यू और एजिथ्रोमिसिन में टाक्सिसिटी यानी विषाक्तता की आशंका है। ऐसे में अभी इसका प्रयोग ठीक नहीं है। हालांकि विशेषज्ञों ने भी कहा है कि एचसीक्‍यू का दूसरा वर्जन जो क्‍लोरोक्‍वीन है उसे प्रयोग किया जा सकता है।

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