Trump Iran Peace Proposal: खतरे में मिडिल ईस्ट! ट्रंप ने क्यों ठुकराया ईरान का शांति प्रस्ताव? अब जंग तय है?
Donald Trump Iran peace proposal: डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को ठुकरा कर मिडिल ईस्ट की राजनीति में हलचल मचा दी है। ईरान ने 14 सूत्रीय योजना के जरिए युद्धविराम को स्थायी समझौते में बदलने की कोशिश की थी, लेकिन ट्रंप इसे नाकाफी मान रहे हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति का मानना है कि ईरान ने पिछले 4 दशकों में जो किया है, उसकी उसे और भारी कीमत चुकानी होगी। ट्रंप का यह कड़ा रुख साफ करता है कि वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय दखलअंदाजी पर किसी भी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं हैं।

ट्रंप ने क्यों ठुकराया ईरान का प्रस्ताव?
ट्रंप का कहना है कि उन्होंने ईरान के 14 बिंदुओं वाले प्रस्ताव का बारीकी से अध्ययन किया है, लेकिन यह उनकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता। उनके अनुसार, ईरान समझौता तो करना चाहता है, लेकिन वह अभी भी अपनी शर्तों को थोपने की कोशिश कर रहा है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ईरान ने मानवता के खिलाफ जो अपराध किए हैं, उनका हिसाब अभी पूरा नहीं हुआ है। अमेरिका चाहता है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर ऐसी पाबंदियां लगें जिन्हें पूरी तरह जांचा जा सके, जो इस प्रस्ताव में नहीं दिखीं।
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क्या था ईरान का 3 चरणों वाला प्लान?
ईरान ने 30 दिनों के भीतर युद्ध खत्म करने के लिए एक विस्तृत योजना पेश की थी। इसमें पहले चरण में मौजूदा युद्धविराम को पूरी तरह रोकने और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को व्यापार के लिए खोलने की बात थी। दूसरे चरण में यूरेनियम संवर्धन पर 15 साल की रोक का प्रस्ताव था, जिसके बाद ईरान मामूली सीमा तक संवर्धन शुरू कर पाता। तीसरे चरण में अरब देशों के साथ मिलकर एक क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचा बनाने का सुझाव दिया गया था ताकि भविष्य में शांति बनी रहे।
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परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम का विवाद
अमेरिका और ईरान के बीच सबसे बड़ा झगड़ा यूरेनियम के भंडार को लेकर है। ईरान के नए प्रस्ताव में परमाणु बातचीत को भविष्य के लिए टालने की कोशिश की गई है, जिससे वॉशिंगटन नाराज है। अमेरिका की मांग है कि ईरान अपने यूरेनियम भंडार पर सख्त और प्रमाणित सीमाएं लगाए। ईरान ने कहा है कि उसे पाकिस्तान के जरिए अमेरिका का जवाब मिल गया है, लेकिन फिलहाल वह परमाणु मुद्दों पर बातचीत नहीं कर रहा है। यह गतिरोध क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा सकता है।
इजरायल और क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर
इजरायली मीडिया के अनुसार, ट्रंप का यह फैसला इजरायल के हितों को ध्यान में रखकर लिया गया है। ईरान समर्थित गुटों के हमलों और इजरायल की सुरक्षा को लेकर अमेरिका कोई ढील नहीं देना चाहता। ईरान की योजना में अरब देशों को शामिल करने की बात तो थी, लेकिन ट्रंप को लगता है कि यह केवल समय काटने की रणनीति है। अमेरिका का सख्त रुख दिखाता है कि आने वाले समय में ईरान पर आर्थिक और राजनीतिक दबाव और ज्यादा बढ़ सकता है, जिससे मिडिल ईस्ट की स्थिति और जटिल होगी।












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