Iran Israel War: 3 दिन में ईरान खत्म! इजराइल की खौफनाक साजिश का पर्दाफाश, खामेनेई के प्रतिनिधि का बड़ा खुलासा
Iran Israel War: भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध को लेकर गहरी चिंता जताई है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से शांति की अपील करते हुए कहा कि इस संघर्ष ने इलाके के हर व्यक्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान कभी भी युद्ध नहीं चाहता था, लेकिन परिस्थितियों ने उसे इसमें शामिल होने पर मजबूर कर दिया। इलाही ने अमेरिका और इजरायल से युद्ध रोकने की अपील की है ताकि क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल हो सके और निर्दोष लोगों की जान बचाई जा सके।

शांति की अपील और न्याय की मांग
अब्दुल मजीद इलाही ने जोर देकर कहा कि आज दुनिया को निष्पक्षता और न्याय की जरूरत है। उनका मानना है कि ईरान पर सवाल उठाने के बजाय उन शक्तियों से सवाल पूछे जाने चाहिए जिन्होंने इस युद्ध की नींव रखी। उन्होंने दुनिया के देशों से अपील की कि वे अमेरिका और इजराइल पर युद्ध रोकने का दबाव बनाएं। इलाही के अनुसार, यदि बाहरी हस्तक्षेप और पाबंदियां खत्म हो जाएं, तो पश्चिम एशिया में जनजीवन फिर से पटरी पर लौट सकता है और आर्थिक गतिविधियां सामान्य हो सकती हैं।
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ईरान को युद्ध में धकेलने का दावा
इलाही ने खुलासा किया कि ईरान ने इस संघर्ष से बचने के लिए हर संभव कूटनीतिक कोशिश की थी। उन्होंने ओमान में हुई बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि जब समझौते की उम्मीद जगी थी, तभी अचानक हालात बदल दिए गए। उनके अनुसार, ईरान ने शांति के कई प्रस्ताव दिए थे, लेकिन विपक्षी ताकतों ने उन पर हमला कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान को अपनी रक्षा और अस्तित्व बचाने के लिए इस युद्ध का हिस्सा बनने के लिए मजबूर किया गया है।
सरकार गिराने की नाकाम साजिश
प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने बताया कि इजराइल और अमेरिका ने बेहद कम समय में ईरान की सत्ता पलटने की योजना बनाई थी। उनका दावा था कि वे मात्र तीन दिनों में ईरान की सरकार को खत्म कर देंगे और इसके लिए उन्होंने 500 विमानों और मिसाइलों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि दुश्मनों ने कई बड़े कमांडरों, जनरलों और नेताओं को निशाना बनाया, लेकिन ईरान की मजबूती के सामने उनकी तीन दिन वाली योजना पूरी तरह विफल साबित हुई और वे अपने मकसद में कामयाब नहीं हो सके।
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नागरिकों और बुनियादी ढांचे का भारी नुकसान
इलाही ने युद्ध की भयावहता बताते हुए कहा कि अब तक 4,000 से ज्यादा मासूम नागरिक अपनी जान गंवा चुके हैं और हजारों घायल हुए हैं। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि स्कूलों, अस्पतालों और विश्वविद्यालयों को जानबूझकर निशाना बनाया गया, जिसमें 175 स्कूली बच्चियों की मौत भी शामिल है। लाखों घर तबाह हो गए हैं और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाया गया है। उनके अनुसार, यह हमला केवल सेना पर नहीं बल्कि 7,000 साल पुरानी ईरानी सभ्यता को मिटाने की एक अमानवीय कोशिश है।












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