US में 7.25 लाख अवैध भारतीय अप्रवासी संकट में! ट्रंप-मोदी की मुलाकात फरवरी में तय? जानें भारत की क्या योजना?
Donald Trump Narendra Modi: डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका में अवैध अप्रवासियों पर कड़ा रुख अपनाया जा रहा है। इस नीति के तहत अमेरिका ने कोलंबिया और ब्राजील जैसे देशों के हजारों अवैध अप्रवासियों को उनके देश वापस भेजना शुरू कर दिया है। अब ट्रंप प्रशासन की नजर भारतीय अप्रवासियों पर है, जिनकी संख्या लाखों में है। ऐसे में भारतीय समुदाय के बीच चिंता बढ़ती जा रही है।
2024 की प्यू रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में करीब 7.25 लाख भारतीय अवैध अप्रवासी हैं। यह संख्या मैक्सिकन और साल्वाडोर के बाद तीसरे स्थान पर है। अमेरिका ने 18,000 भारतीय अवैध अप्रवासियों की पहचान की है, जिनके निर्वासन की संभावना जताई जा रही है। ट्रंप प्रशासन के इस कड़े फैसले से अमेरिका में बसे भारतीयों के लिए संकट गहरा गया है।

भारत सरकार का रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बीच इस मुद्दे पर चर्चा हो चुकी है। भारत ने साफ किया है कि अगर कोई भारतीय नागरिक अवैध रूप से अमेरिका में रह रहा है और उसके दस्तावेज प्रमाणित हो जाते हैं, तो भारत उन्हें वापस लेने को तैयार है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि हमारी नीति स्पष्ट है। भारतीय नागरिकों को, चाहे वे अमेरिका में हों या किसी अन्य देश में, दस्तावेज सत्यापन के बाद वापस लिया जाएगा।
अप्रवासियों की अनिश्चित स्थिति
अमेरिका में रहने वाले अवैध भारतीय अप्रवासियों के लिए स्थिति बेहद अनिश्चित हो गई है। इनमें से कई लोग सालों से अमेरिका में रह रहे हैं और उन्होंने वहां अपना परिवार और व्यवसाय स्थापित कर लिया है। निर्वासन की संभावना उनके जीवन को अस्त-व्यस्त कर सकती है।
छात्रों पर असर
अमेरिका में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों पर भी इस नीति का असर दिख रहा है। कई छात्रों ने डर के चलते अपनी पार्ट-टाइम नौकरियां छोड़ दी हैं। हालांकि, एफ-1 वीजा धारकों को कैंपस में काम करने की अनुमति है, लेकिन वे अक्सर कैंपस के बाहर की नौकरियों पर निर्भर रहते हैं।
ट्रंप-मोदी की संभावित मुलाकात
डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में घोषणा की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फरवरी में अमेरिका का दौरा करेंगे। इस मुलाकात के दौरान इमिग्रेशन के मुद्दे पर चर्चा की संभावना है। ट्रंप ने कहा है कि भारत 'वह करेगा जो सही होगा।' यह बैठक अमेरिका-भारत संबंधों और अवैध अप्रवासन पर चर्चा के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है।
ट्रंप-मोदी बातचीत: व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया
व्हाइट हाउस के अनुसार, ट्रंप और मोदी के बीच बातचीत 'सकारात्मक और उत्पादक' रही। दोनों नेताओं ने अमेरिका-भारत संबंधों को और मजबूत करने और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
बयान में यह भी कहा गया कि मोदी की संभावित यात्रा दोनों देशों के बीच मित्रता और रणनीतिक साझेदारी को गहरा करने का अवसर होगी। इस साल भारत पहली बार क्वाड नेताओं की मेजबानी करने जा रहा है, जो इस संबंध को और मजबूती देगा।
भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी
व्हाइट हाउस ने भी दोनों देशों के बीच दोस्ती और सहयोग को मजबूत करने की बात कही है। बयान में कहा गया कि दोनों नेता इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और रणनीतिक साझेदारी को गहरा करने पर सहमत हुए हैं।
ट्रंप प्रशासन की अवैध अप्रवासन पर सख्ती ने अमेरिका में बसे लाखों भारतीयों को चिंता में डाल दिया है। हालांकि, भारत सरकार ने अपने नागरिकों की मदद के लिए कदम उठाने की बात कही है। फरवरी में ट्रंप और मोदी की संभावित मुलाकात इस मुद्दे पर ठोस समाधान की दिशा में अहम हो सकती है।












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