British PM Espionage: ब्रिटिश पीएम की कार में चीन ने लगाया खूफिया डिवाइस, 4 साल करता रहा जासूसी, कैसे चला पता?

British PM Espionage: चीन पर जासूसी के आरोप कोई नई बात नहीं है। कभी भारत की जासूसी, कभी रूस की जासूसी और कभी अमेरिका में ट्रंप की जासूसी। पकड़े जाने के बावजूद चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। वहीं अब ब्रिटेन में भी नेशनल सिक्योरिटी से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रिटिश खुफिया एजेंसियों को प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर (Keir Starmer) द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सरकारी वाहन के अंदर एक छिपा हुआ चीनी ट्रैकिंग डिवाइस मिला है। इस खुलासे ने ब्रिटेन की सुरक्षा एजेंसियों और सरकार दोनों की चिंता बढ़ा दी है।

बताया जा रहा है कि यह डिवाइस वाहन की लोकेशन से जुड़ा डिटेल में डेटा भेजने के लिए लगाया गया था। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह डिवाइस एक ऐसे सीलबंद कंपोनेंट के भीतर छिपाया गया था जिसे चीन के एक सप्लायर से आयात किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक यह डिवाइस करीब चार साल तक सक्रिय रहा और एक बेहद गहन सुरक्षा जांच के दौरान इसका पता चल सका।

British PM Espionage

कैसे हुआ खुलासा?

यह मामला तब सामने आया जब ब्रिटेन की सुरक्षा एजेंसियों ने विदेशी निगरानी और जासूसी के बढ़ते खतरों को देखते हुए सरकारी और राजनयिक वाहनों की गहराई से जांच शुरू की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, खुफिया अधिकारियों ने कई वाहनों को पूरी तरह खोलकर उनके अंदर लगे टेक्निकल इक्विपमेंट्स की जांच की। इसी दौरान यह संदिग्ध ट्रैकिंग डिवाइस मिला, जो सामान्य रूप से दिखाई नहीं देता था और वाहन के एक महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक हिस्से के भीतर छिपा हुआ था।

ECU के अंदर छिपाया गया था ट्रैकिंग सिस्टम

इंटेलिजेंस सूत्रों के हवाले से बताया गया कि यह ट्रैकिंग डिवाइस एक इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट (Electronic Control Unit - ECU) के भीतर लगाया गया था। आरोप है कि इसे चीन की एक सब-सप्लायर कंपनी ने कंपोनेंट तैयार करते समय ही उसमें फिट कर दिया था। क्योंकि यह हिस्सा पूरी तरह सीलबंद यूनिट के रूप में वाहन निर्माता कंपनी तक पहुंचा था, इसलिए ऑटोमोबाइल कंपनी को भी इसकी जानकारी नहीं थी। नतीजतन यह कंपोनेंट बिना किसी शक के प्रधानमंत्री के आधिकारिक वाहन में लगा दिया गया।

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ब्रिटेन के पूर्व कैबिनेट मंत्री डंकन स्मिथ (Duncan Smith) ने बाद में इस मामले की गंभीरता की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि सुरक्षा टीमों को प्रधानमंत्री के आधिकारिक वाहनों को पूरी तरह से पुर्जा-पुर्जा खोलना पड़ा था ताकि छिपे हुए सिम कार्ड और ट्रैकिंग सिस्टम का पता लगाया जा सके। रिपोर्ट्स के मुताबिक ब्रिटिश प्रधानमंत्री के लिए आमतौर पर बख्तरबंद Range Rover Sentinel वाहनों का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे हाई-सिक्योरिटी वाहनों में किसी भी प्रकार का ट्रैकिंग उपकरण मिलना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बेहद चिंताजनक माना जा रहा है।

क्या सिर्फ पीएम की कार को बनाया गया था निशाना?

खुफिया अधिकारियों का मानना है कि यह मामला केवल प्रधानमंत्री की कार तक सीमित नहीं हो सकता। जांच एजेंसियों को शक है कि यह किसी एक व्यक्ति को निशाना बनाने के बजाय सप्लाई चेन में घुसपैठ की एक व्यापक रणनीति का हिस्सा हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी विशेष सब-कंपोनेंट में इस तरह की तकनीक पहले से लगाई गई हो, तो वही हिस्सा इस्तेमाल करने वाला हर वाहन संभावित रूप से ट्रैक किया जा सकता है। इसका मतलब यह है कि आम नागरिकों की गाड़ियों से लेकर सरकार के शीर्ष अधिकारियों तक के वाहन प्रभावित हो सकते हैं।

पश्चिमी देशों की सप्लाई चेन पर उठे सवाल

इस खुलासे के बाद पश्चिमी देशों की टेक्निकल और औद्योगिक सप्लाई चेन की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीक और वैश्विक उत्पादन नेटवर्क के दौर में किसी भी देश के लिए यह सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण हो गया है कि उसके द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे सभी उपकरण पूरी तरह सुरक्षित हों। यही वजह है कि इस मामले को केवल एक वाहन से जुड़ा मामला नहीं बल्कि व्यापक राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

चीन के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की मांग

इस घटना के बाद ब्रिटिश सरकार पर चीन को लेकर अधिक सख्त रुख अपनाने का दबाव बढ़ गया है। कई सांसदों और नीति निर्माताओं ने मांग की है कि चीन को केवल Systemic Challenge मानने के बजाय Systemic Threat की कैटेगरी में रखा जाए। उनका कहना है कि अगर ऐसे आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल जासूसी का मामला नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा माना जाएगा।

चीन ने आरोपों को बताया अफवाह

दूसरी ओर चीन ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। लंदन स्थित चीनी दूतावास के एक प्रवक्ता ने रिपोर्ट्स को "सिर्फ अफवाह" और "भ्रामक जानकारी" करार दिया। चीन का कहना है कि कुछ पश्चिमी राजनेता राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं का इस्तेमाल करके सामान्य व्यापारिक संबंधों को नुकसान पहुंचाने और चीनी टेक्निकल कंपनियों की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।

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चार साल तक सक्रिय रहा डिवाइस

हालांकि चीन ने आरोपों से इनकार किया है, लेकिन यह फैक्ट है कि चीन का ट्रैकिंग डिवाइस लगभग चार सालों तक एक्टिव रहा, ब्रिटिश सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब ब्रिटेन की सरकार महत्वपूर्ण राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे, सरकारी वाहनों और अन्य संवेदनशील संस्थानों में इस्तेमाल होने वाले सभी टेक्निकल इक्विपमेंट्स और कंपोनेंट्स की व्यापक समीक्षा कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला आने वाले समय में वैश्विक सप्लाई चेन सुरक्षा, साइबर जासूसी और राष्ट्रीय सुरक्षा पर बहस को और तेज कर सकता है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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