दिग्गज कांग्रेसी की बेटी BJP में होंगी शामिल! कौन हैं सुष्मिता देव, जिन्होंने TMC को दिया तगड़ा झटका?
Sushmita Dev: तृणमूल कांग्रेस (TMC) इन दिनों लगातार राजनीतिक झटकों का सामना कर रही है। विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद पार्टी के भीतर चल रही खींचतान और असंतोष जगजाहिर है। इन सब के बीच अब राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव के इस्तीफे ने नई हलचल पैदा कर दी है। इस सप्ताह पार्टी छोड़ने वाली वह दूसरी राज्यसभा सांसद बन गई हैं।
सुष्मिता के इस्तीफे ने इसलिए भी सबका ध्यान खींचा है क्योंकि इसके कुछ ही समय बाद उनकी तस्वीर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के साथ सामने आई। सुष्मिता देव लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रही हैं और कांग्रेस से लेकर तृणमूल कांग्रेस तक का उनका सफर काफी चर्चित रहा है। एक बड़े राजनीतिक परिवार से आने वाली सुष्मिता ने अपनी अलग पहचान भी बनाई, लेकिन अब उनके इस्तीफे ने उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर कई तरह की अटकलों को जन्म दे दिया है।

सुष्मिता देव ने राज्यसभा से दिया इस्तीफा
सुष्मिता देव ने राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन को पत्र लिखकर अपनी सदस्यता से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देने की बात कही। उन्होंने अपने पत्र में स्पष्ट लिखा कि उनका इस्तीफा तुरंत स्वीकार किया जाए। इस्तीफे के कुछ समय बाद उनकी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई, जिसमें वह असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के साथ दिल्ली स्थित उनके आवास पर नजर आईं। जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या उनके अगले कदम का संबंध असम की राजनीति से है, तो उन्होंने केवल इतना कहा, "सिर्फ असम कनेक्शन है।" इस एक बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया कि वो जल्द ही बीजेपी ज्वाइन करने वाली हैं।
कौन हैं सुष्मिता देव? (Sushmita Dev)
सुष्मिता देव का जन्म 25 सितंबर 1972 को असम के सिलचर में हुआ था। वह देश के जाने-माने कांग्रेस नेता संतोष मोहन देव की बेटी हैं। राजनीति उनके परिवार की पहचान रही है और बचपन से ही उन्होंने राजनीतिक माहौल को करीब से देखा। उन्होंने कानून की पढ़ाई की और कुछ समय तक वकालत से भी जुड़ी रहीं। हालांकि बाद में उन्होंने सक्रिय राजनीति को अपना करियर बनाया। अपनी पढ़ाई, राजनीतिक समझ और संगठनात्मक क्षमता के दम पर उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई।
पिता संतोष मोहन देव का राजनीति में बड़ा नाम
सुष्मिता देव के पिता संतोष मोहन देव कांग्रेस के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते थे। वह सात बार लोकसभा सांसद चुने गए थे और केंद्र सरकार में मंत्री भी रह चुके थे। असम की बराक घाटी और खासकर सिलचर क्षेत्र में उनका काफी प्रभाव था। सिर्फ पिता ही नहीं, उनकी मां बिथिका देव भी राजनीति से जुड़ी रही हैं और असम विधानसभा की सदस्य रह चुकी हैं। यही वजह है कि सुष्मिता देव को राजनीति विरासत में मिली, लेकिन उन्होंने अपनी पहचान खुद बनाई।
कांग्रेस में तेजी से बढ़ा कद
सुष्मिता देव कई वर्षों तक कांग्रेस की सक्रिय नेता रहीं। पार्टी ने उन्हें ऑल इंडिया महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष जैसी बड़ी जिम्मेदारी भी सौंपी थी। महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर वह लगातार मुखर रहीं और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस का प्रमुख चेहरा बनकर उभरीं। उन्होंने असम की सिलचर लोकसभा सीट से चुनाव जीता और सांसद के रूप में संसद में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। सिलचर वही क्षेत्र है जिसे लंबे समय तक उनके परिवार का राजनीतिक गढ़ माना जाता रहा।
2021 में कांग्रेस छोड़कर TMC में हुईं शामिल
अगस्त 2021 में सुष्मिता देव ने कांग्रेस छोड़कर सभी को चौंका दिया था। उस समय कांग्रेस में उन्हें एक महत्वपूर्ण नेता माना जाता था, इसलिए उनका पार्टी छोड़ना राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी खबर बना था। कांग्रेस से अलग होने के कुछ दिनों बाद ही वह ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गईं। टीएमसी में शामिल होते समय उन्होंने इसे अपने सार्वजनिक जीवन का नया अध्याय बताया था। बाद में पार्टी ने उन्हें राज्यसभा भेजा।
क्या कभी विवादों में भी रहीं सुष्मिता देव?
सुष्मिता देव का राजनीतिक करियर अपेक्षाकृत साफ-सुथरा माना जाता है। उनके नाम से कोई बड़ा व्यक्तिगत विवाद नहीं जुड़ा रहा है। हालांकि कांग्रेस छोड़कर TMC में जाने का उनका फैसला उस समय काफी चर्चा में रहा था। कई राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे कांग्रेस के लिए बड़ा झटका बताया था। इसके अलावा नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और महिलाओं से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर उनके बयानों ने कई बार राजनीतिक बहस जरूर छेड़ी, लेकिन वह किसी बड़े व्यक्तिगत विवाद का हिस्सा नहीं रहीं हैं।
TMC को इस सप्ताह दूसरा बड़ा झटका
सुष्मिता देव से पहले तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय भी पार्टी और संसद से इस्तीफा दे चुके हैं। उन्होंने अपने बयान में पार्टी नेतृत्व और संगठन की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। लगातार दो राज्यसभा सांसदों के इस्तीफे ने पार्टी नेतृत्व की चिंताएं बढ़ा दी हैं और विपक्ष को भी सरकार पर निशाना साधने का मौका मिल गया है।
बंगाल में बगावत के बाद बढ़ी परेशानी
इन इस्तीफों से पहले पश्चिम बंगाल विधानसभा में भी पार्टी को बड़े असंतोष का सामना करना पड़ा था। तृणमूल कांग्रेस के 58 विधायकों ने पार्टी नेतृत्व की आधिकारिक पसंद को दरकिनार करते हुए ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष पद के लिए समर्थन दे दिया था। पार्टी ने इस पद के लिए शोभनदेब चट्टोपाध्याय का नाम आगे बढ़ाया था, लेकिन विधायकों के एक बड़े समूह ने अलग रास्ता चुन लिया।
विधानसभा अध्यक्ष द्वारा ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता मिलने के बाद पार्टी के अंदर मतभेद खुलकर सामने आ गए। अब सुष्मिता देव के इस्तीफे ने यह सवाल और बड़ा कर दिया है कि क्या तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही नाराजगी आने वाले दिनों में और नेताओं को भी प्रभावित कर सकती है।












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