Greenland Protests: ट्रंप के खिलाफ ग्रीनलैंड की सड़कों पर जनसैलाब, 9 साल की बच्ची ने व्हाइट हाउस को ललकारा
Greenland Protests: डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को खरीदने की जिद ने एक अंतरराष्ट्रीय संकट का रूप ले लिया है। शनिवार को ग्रीनलैंड की राजधानी नूक (Nuuk) की सड़कों पर जोरदार विरोध प्रदर्शन हुआ, जहां 'ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है' के नारों के साथ हजारों लोगों ने मार्च किया।
बता दें कि, ट्रंप ने न केवल इस द्वीप पर अमेरिकी नियंत्रण की मांग तेज कर दी है, बल्कि विरोध करने वाले 8 यूरोपीय देशों पर 10% टैरिफ लगाने का भी एलान किया है। इस कूटनीतिक दबाव ने स्थानीय नागरिकों और यूरोपीय देशों को एकजुट कर दिया है।

सड़कों पर उतरा जनसैलाब: 'बिकाऊ नहीं हमारा देश'
ग्रीनलैंड की राजधानी नूक में शनिवार को अब तक का सबसे बड़ा प्रदर्शन देखा गया। शहर की लगभग एक-चौथाई आबादी ने कड़ाके की ठंड के बीच अमेरिकी वाणिज्य दूतावास तक मार्च किया। प्रदर्शनकारियों ने अपने राष्ट्रीय झंडे लहराए और साफ संदेश दिया कि वे किसी भी कीमत पर अमेरिका का हिस्सा नहीं बनेंगे। इस मार्च में न केवल युवा और बुजुर्ग, बल्कि बच्चे भी शामिल हुए। वहीं इस रैली के दौरान 9 साल की बच्ची अलास्का ने 'ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है' का पोस्टर लहराकर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा।
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Trump tariffs Europe: ट्रंप का यूरोपीय देशों को धमकी
राष्ट्रपति ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर कब्जा हासिल करने के लिए आर्थिक दबाव का रास्ता चुना है। उन्होंने घोषणा की है कि जो 8 यूरोपीय देश अमेरिका के इस अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं, उन पर 10% का इम्पोर्ट टैक्स (टैरिफ) लगाया जाएगा। यह टैक्स फरवरी 2026 से लागू होने की उम्मीद है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ट्रंप अब खुली धमकियों पर उतर आए हैं। यह आर्थिक हमला न केवल ग्रीनलैंड, बल्कि पूरे यूरोप की अर्थव्यवस्था और कूटनीतिक रिश्तों को प्रभावित कर सकता है।
Donald Trump Greenland: ग्रीनलैंड के 85% जनता कर रही है विरोध
ट्रंप का मानना है कि खनिजों से भरपूर और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ग्रीनलैंड अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। वेनेजुएला में सैन्य अभियान के बाद ट्रंप ने इस मांग को और आक्रामक बना दिया है। हालांकि, हालिया सर्वे के आंकड़े ट्रंप के दावों के उलट हैं। ग्रीनलैंड के 85% नागरिक अमेरिका में शामिल होने के सख्त खिलाफ हैं, जबकि मात्र 6% लोग ही इसके पक्ष में हैं। स्थानीय नेताओं ने इसे 'आजादी की लड़ाई' और पश्चिमी लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा बताया है।
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World News Hindi: प्रधानमंत्री की अगुवाई और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता
इस विरोध प्रदर्शन की खास बात यह रही कि इसमें ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नीलसन खुद शामिल हुए। विरोध की यह आग सिर्फ नूक तक सीमित नहीं रही, बल्कि डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन और कनाडा के नुनावुत में भी रैलियां निकाली गईं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अमेरिका पहले खुद को दोस्त बताकर बेहतर भविष्य का लालच दे रहा था, लेकिन अब वह एक तानाशाह की तरह व्यवहार कर रहा है।












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