US Vs Greenland: ग्रीनलैंड पर कब्जा करना चाहता है अमेरिका? खनिज का लालच नहीं, इस बात से डरे हुए हैं ट्रंप!
US Vs Greenland: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ग्रीनलैंड को लेकर बड़ा बयान दिया। ट्रंप ने साफ कहा कि अमेरिका को ग्रीनलैंड का अधिग्रहण करना चाहिए। उनका तर्क है कि अगर अमेरिका ने ऐसा नहीं किया, तो भविष्य में रूस या चीन इस रणनीतिक क्षेत्र पर कब्जा कर सकते हैं। ट्रंप के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। ये बताता है कि ट्रंप को रूस और चीन का डर सता रहा है।
व्हाइट हाउस में ट्रंप का तीखा बयान
व्हाइट हाउस में तेल कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान ट्रंप ने मीडिया से बात की। उन्होंने कहा, "हम ग्रीनलैंड को लेकर कुछ करने वाले हैं, चाहे उन्हें यह पसंद आए या न आए। अगर हमने ऐसा नहीं किया, तो रूस या चीन वहां कब्जा कर लेंगे, और हम रूस या चीन को अपना पड़ोसी नहीं बनाना चाहते।" ट्रंप का यह बयान सीधे तौर पर ग्रीनलैंड की भौगोलिक और रणनीतिक अहमियत की ओर इशारा करता है।

"ग्रीनलैंड हासिल करना जरूरी है" - ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप ने जोर देते हुए कहा कि अमेरिका को हर हाल में ग्रीनलैंड हासिल करना चाहिए। उन्होंने बताया कि भले ही 1951 के एक समझौते के तहत ग्रीनलैंड में अमेरिका की सैन्य मौजूदगी पहले से है, लेकिन केवल समझौते इस द्वीप की सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकते। ट्रंप के मुताबिक, भविष्य के खतरों को देखते हुए अमेरिका को ज्यादा मजबूत कदम उठाने होंगे।
57,000 आबादी वाला रणनीतिक द्वीप
ग्रीनलैंड की आबादी करीब 57,000 है और यह डेनमार्क साम्राज्य का एक स्वायत्त क्षेत्र है। ट्रंप का मानना है कि इस द्वीप की लोकेशन इतनी अहम है कि अगर अमेरिका ने नियंत्रण नहीं लिया, तो चीन या रूस वहां अपनी मौजूदगी बढ़ा सकते हैं। उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड की सुरक्षा केवल सैन्य समझौतों से नहीं, बल्कि "मालिकाना हक" से सुनिश्चित की जा सकती है।
कितना रेयर अर्थ मिनरल है ग्रीनलैंड में?
ग्रीनलैंड में 1.5 मिलियन टन Rare Earth Minerals का भंडार हैं, जो इसे दुनिया भर में आठवें स्थान पर रखता है। यहां कवानेफेलड और टैनब्रीज़ नामक दो सबसे बड़े वैश्विक रेयर अर्थ मिनरल जमा भी मौजूद हैं। इसके बावजूद, द्वीप पर अभी तक कोई रेयर अर्थ माइनिंग शुरू नहीं हो पाया है।
"पट्टा नहीं, मालिकाना हक जरूरी"
अपनी बात को और साफ करते हुए ट्रंप ने कहा,
"आप मालकियत का बचाव करते हैं, पट्टों का नहीं। हमें ग्रीनलैंड की रक्षा करनी होगी। अगर हम नहीं करेंगे, तो चीन या रूस करेंगे।" इस बयान से साफ है कि ट्रंप ग्रीनलैंड को केवल सैन्य ठिकाने के तौर पर नहीं, बल्कि स्थायी नियंत्रण के नजरिए से देख रहे हैं।
ग्रीनलैंड को कंट्रोल में लेने की योजनाएं
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप और व्हाइट हाउस के अधिकारी ग्रीनलैंड को अमेरिकी कंट्रोल में लाने के लिए कई विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। इनमें अमेरिकी सैन्य बल के संभावित इस्तेमाल से लेकर ग्रीनलैंड के लोगों को एकमुश्त भुगतान का प्रस्ताव भी शामिल है। इसका मकसद ग्रीनलैंड वासियों को डेनमार्क से अलग होने और संभवतः अमेरिका में शामिल होने के लिए मनाना बताया जा रहा है।
यूरोप में नाराजगी, डेनमार्क भी असहज
ट्रंप और व्हाइट हाउस के इन बयानों से कोपेनहेगन और पूरे यूरोप में नाराजगी देखने को मिली है। यूरोपीय नेताओं ने ग्रीनलैंड पर अमेरिकी दावों को लेकर चिंता जताई है। गौर करने वाली बात यह है कि अमेरिका और डेनमार्क दोनों नाटो (NATO) के सहयोगी देश हैं और आपसी रक्षा समझौते से जुड़े हुए हैं।
यूरोपीय देशों का संयुक्त बयान
इसी मुद्दे पर मंगलवार को फ्रांस, जर्मनी, इटली, पोलैंड, स्पेन, ब्रिटेन और डेनमार्क ने एक संयुक्त बयान जारी किया। इस बयान में साफ कहा गया कि ग्रीनलैंड और डेनमार्क से जुड़े फैसले लेने का अधिकार केवल डेनमार्क और ग्रीनलैंड के पास है। इस बयान को ट्रंप के दावों के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है।
वैश्विक राजनीति में बढ़ता तनाव
ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप का आक्रामक रुख दिखाता है कि आने वाले समय में अमेरिका, यूरोप, रूस और चीन के बीच रणनीतिक टकराव और तेज हो सकता है। यह मुद्दा सिर्फ एक द्वीप का नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन और भविष्य की सुरक्षा रणनीति से जुड़ा हुआ है।
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