Dixit Solanki: ईरान जंग में मारे गए भारतीय की UAE में 33 दिन से फंसी लाश, पिता छलका दर्द, 'फोटो तक नसीब नहीं'

Dixit Solanki Case: "33 दिन हो चुके हैं। मुझे साफ-साफ जवाब चाहिए कि मेरे बेटे के साथ क्या हुआ। हम सिर्फ उसके अवशेष, सही दस्तावेज, पूरी जांच रिपोर्ट और फोटो-वीडियो सबूत चाहते हैं।" ये शब्द उस पिता के हैं जिसे उसके बेटे की लाश 34 दिन गुजरने के बाद भी देखना नसीब नहीं हुआ। दरअसल ईरान में चल रही जंग से सिर्फ अमेरिका, इजरायल, सऊदी अरब, यूएई, ओमान, कतर और कुवैत जैसे देश ही नहीं बल्कि भारत भी सीधा प्रभावित है। अगर एक भारतीय की भी जान इस जंग में गई है तो नुकसान छोटा नहीं कहा जा सकता। न हम इस युद्ध का हिस्सा हैं और न ही किसी की तरफदारी कर रहे।

लाश तक देखना नहीं हुआ नसीब

बावजूद इसके भारत में तकरीबन 12 परिवार अब तक उजड़ चुके हैं जिनमें से 8 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 3 लापता हैं। इन्हीं में एस एक है अमृतलाल सोलंकी का परिवार, जिन्हें युद्ध के 33 दिन बीत जाने के बाद भी बेटे और मर्चेंट नेवी में काम करने वाले दीक्षित अमृतलाल सोलंकी की लाश तक देखना नसीब नहीं हुआ।

Dixit Solanki Case

कैसे और कब हुई हुई दीक्षित सोलंकी की मौत?

ओमान तट से दूर एक कार्गो शिप पर हुए संदिग्ध मिसाइल हमले में 32 साल के मर्चेंट नेवी कर्मचारी दीक्षित अमृतलाल सोलंकी की मौत हो गई थी। मिडिल ईस्ट के इस युद्ध में भारत से जान गंवाने वाले दीक्षित पहले भारतीय थे। उनका परिवार अब भी उनके पार्थिव शरीर को घर लाने का इंतजार कर रहा है। जानकारी की कमी और लगातार देरी से परेशान परिवार ने गुरुवार को बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अंतिम संस्कार के लिए तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है।

जल्द वापस लाए जाएं अवशेष

दीक्षित के 64 साल के पिता अमृतलाल गोकल सोलंकी और 33 साल की बहन मिताली सोलंकी ने कोर्ट में याचिका दाखिल की है। इसमें उन्होंने मांग की है कि उनके बेटे के अवशेष जल्द भारत लाए जाएं और उनसे जुड़ी सभी जांच और फॉरेंसिक रिपोर्ट्स परिवार के साथ साझा की जाएं। इस याचिका में विदेश मंत्रालय, शिपिंग एंड पोर्ट मंत्रालय, शिपिंग महानिदेशालय और जहाज की मैनेजमेंट कंपनी वी शिप्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को पार्टी बनाया गया है।

कैसे हुआ हादसा? जहाज पर धमाका और मौत

दीक्षित सोलंकी MT MKD Vyom नाम के जहाज पर ऑइलर के रूप में काम कर रहे थे। 1 मार्च को ड्यूटी के दौरान जहाज एक संदिग्ध मिसाइल हमले की चपेट में आ गया। कंपनी के मुताबिक, इंजन रूम में धमाका हुआ और जहाज में दरार आ गई, जिसके बाद दीक्षित मृत पाए गए। हालांकि इस हादसे में बाकी 21 क्रू मेंबर सुरक्षित बच गए। यह जहाज ओमान तट से करीब 50 समुद्री मील दूर था, जिसके बाद एक टोइंग जहाज भेजकर इसे बंदरगाह तक लाया गया।

परिवार को सिर्फ ईमेल, लेकिन कोई ठोस जानकारी नहीं

Indian Express को दिए इंटरव्यू में दीक्षित की बहन मिताली सोलंकी ने कंपनी से कई बार अपडेट मांगा, लेकिन उन्हें 4 से 17 मार्च के बीच सिर्फ सामान्य ईमेल ही मिले। इन ईमेल में अवशेष लाने की कोशिश की बात तो कही गई, लेकिन कोई स्पष्ट जानकारी या समय-सीमा नहीं दी गई। एक ईमेल में लिखा था कि कंपनी की सबसे बड़ी प्राथमिकता दीक्षित के अवशेषों को वापस लाना है और इसके लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।

अवशेष मिले, लेकिन जानकारी फिर भी अधूरी

18 मार्च को कंपनी ने बताया कि अवशेष मिल गए हैं और उन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। लेकिन याचिका के मुताबिक, परिवार को अब भी कोई आधिकारिक दस्तावेज या स्पष्ट समय-सीमा नहीं दी गई। बाद में दुबई स्थित भारतीय दूतावास से पता चला कि केवल कंकाल के अवशेष मिले हैं, जिन्हें मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए शारजाह पुलिस को सौंपा गया है। जिस पर पिता ने कहा कि अनुच्छेद 21 सम्मानजनक मौत का अधिकार देता है।

लेकिन मेरे बेटे को वो तक नसीब नहीं हो रहा।

उन्होंने सभी जिम्मेदार मंत्रालयों और एजेंसियों पर टाला-मटोली का आरोप लगाया है। हद तो तब हो गई जब उन्होने अपने बच्चे के अवशेष के फोटो मांगे तो उसे तक देने से इनकार कर दिया गया। ऐसे में एक परिवार और एक पिता पर क्या गुजर रही होगी, आप समझ सकते हैं।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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