अग्निपथ योजना को लेकर नेपाल में विवाद, माओवादी ने गोरखा सैनिकों की भर्ती बंद की मांग की, दुविधा में सरकार

भारतीय सेना की अग्निपथ भर्ती योजना में नेपाली युवाओं को भर्ती करने की अनुमति देने को लेकर नेपाल सरकार असमंजस में है।

काठमांडू, 23 अगस्तः भारतीय सेना की अग्निपथ भर्ती योजना में नेपाली युवाओं को भर्ती करने की अनुमति देने को लेकर नेपाल सरकार असमंजस में है। भारत चाहता है कि नेपाल के युवा अग्निपथ स्कीम के तहत गोरखा रेजीमेंट में भर्ती हों। इसके लिए सरकार ने शेर बहादुर देउबा सरकार से उनके विचार पूछे हैं। इस बीच नेपाल में अग्निपथ स्कीम के तहत नेपाली युवकों भर्ती को लेकर विवाद शुरू हो गया है।

भारत ने नेपाल सरकार से मांगी राय

भारत ने नेपाल सरकार से मांगी राय

द काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने नेपाल सरकार से भारतीय सेना के गोरखा रेजिमेंट में अग्निपथ स्‍कीम के तहत नेपाली युवकों की भर्ती की योजना को लेकर राय पूछी है। इस भर्ती के तहत 25 अगस्‍त को नेपाल के बुटवल और 1 सितंबर को धरान में टेस्‍ट होना है। इस बीच नेपाल सरकार के अधिकारियों ने कहा कि वे अभी इस पूरे मामले पर विचार कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्‍होंने यह भी कहा कि भारत सरकार ने इस अग्निपथ योजना को शुरू करने से पहले नेपाल सरकार से न तो राय ली थी और न ही सूचि‍त किया था।

नेपाल ने अब नहीं भारत को नहीं दिया जवाब

नेपाल ने अब नहीं भारत को नहीं दिया जवाब

भारतीय सेना ने कोविड महामारी की वजह से गोरखा भर्ती स्थगित कर रखी थी। 14 जून को अग्निपथ स्‍कीम को लागू किया गया था। इसके बाद भारतीय सेना ने दूतावास के जरिए नेपाल के विदेश मंत्रालय को एक पत्र लिखा था और भुटवल और धरान में चयन और भर्ती के लिए की मंजूरी मांगी थी। इसके साथ ही भारतीय सेना ने स्‍थानीय प्रशासन का सुरक्षा सहयोग भी मांगा था। सूत्रों के मुताबिक, नेपाल सरकार द्वारा भारतीय पक्ष को इसका कोई जवाब नहीं द‍िया गया, जिसके बाद भारतीय सेना ने भर्ती की तिथि को सार्वजनिक करने से रोक दिया।

46 हजार अग्निवीरों की होनी है भर्ती

46 हजार अग्निवीरों की होनी है भर्ती

अग्निपथ स्‍कीम के तहत भारतीय सेना 46 हजार अग्निवीर की भर्ती करेगी। अग्निपथ योजना के सभी प्रावधान गोरखा रेजिमेंट पर भी लागू होंगे। भारतीय सेना की गोरखा रेजिमेंट में केवल नेपाली नागरिकों और नेपाली बोलने वाले युवकों को भर्ती किया जाता है। इस योजना के तहत भर्ती किए गए 75 फीसदी युवक 4 साल में रिटायर हो जाएंगे और 25 फीसदी को भारतीय सेना में पूरी सेवा अवधि के लिए नौकरी मिलेगी। जो लोग चार साल बाद सेवानिवृत होंगे उन्हें सेवा निधि पैकेज के रूप में 1.71 मिलियन भारतीय रूपये मिलेंगे।

नेपाल में अग्निपथ योजना पर उठ रहे सवाल

नेपाल में अग्निपथ योजना पर उठ रहे सवाल

हालांकि नेपाल में कुछ वर्गों ने अग्निपथ योजना के बारे में सवाल उठाया है। नेपाल में अग्निपथ योजना का विरोध करने वाले धड़े का कहना है कि अग्निपथ योजना ब्रिटेन, भारत और नेपाल के बीच साल 1947 में हुई संधि का उल्‍लंघन है। इस संधि के तहत नेपाली युवकों की भारतीय सेना में भर्ती की जाती है और उन्‍हें भारतीय सैनिकों की तरह से समान वेतन, पेंशन और अन्‍य सुविधाएं दी जाएंगी। सुरक्षा विशेषज्ञ और सीपीएन-यूएमएल के सांसद दीपक प्रकाश भट्ट ने द काठमांडू पोस्ट को बताया कि इस मुद्दे पर नेपाल सरकार को भारत सरकार के साथ बात करनी चाहिए और मुद्दे को सुलझाना चाहिए।

नेपाली युवाओं की भर्ती बंद करने की मांग

नेपाली युवाओं की भर्ती बंद करने की मांग

आपको बता दें कि यह माओवादी पार्टी थी जिसने भारतीय, ब्रिटिश और अन्य सेनाओं में नेपाली युवाओं की भर्ती को समाप्त करने की मांग की थी। माओवादी जो सरकार में भागीदार हैं, लंबे समय से भारतीय सेना में नेपाली युवकों की भर्ती को समाप्त करने की मांग कर रहे हैं। साल 1996 में माओवादियों ने 40 सूत्री मांग के साथ राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ा तो उसमें एक मांग भारतीय सेना में नेपाली युवकों की भर्ती को रोकना भी था।

नेपाली युवाओं को होगा नुकसान

नेपाली युवाओं को होगा नुकसान

सीपीएन के विदेश विभाग के उप प्रमुख राम कार्की ने कहा कि यह हमारे लिए नुकसानदेह है। पहले नेपाली युवक 18-20 साल तक भारतीय सेना में नौकरी करते थे और सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन पाते थे। अब लोग चार साल बाद वापस आएंगे। वापस आने के बाद वे क्या करेंगे? इस मुद्दे पर हमें भारत सरकार को जवाब देने से पहले चर्चा करने की जरूरत है।

34 हजार नेपाली युवा भारतीय सेना में तैनात

34 हजार नेपाली युवा भारतीय सेना में तैनात

माओवादी पार्टियों ने मांग की है कि इस पूरे मामले को भारत सरकार के साथ उठाया जाए और हल नहीं होने पर नेपाली युवकों की भर्ती को बंद कर दिया जाए। नेपाली सैनिक भारत की स्‍वतंत्रता से पहले से ही भारतीय सेना में तैनात हैं। नेपाली नागरिकों को हर साल अरबों रुपये पेंशन के रूप में भारतीय सेना से मिलता है। आंकड़ों के मुताबिक साल 2017 में ही 44 अरब 73 करोड़ रुपये पेंशन भारत ने दिया था। वर्तमान समय में 34 हजार नेपाली युवा भारतीय सेना के गोरखा रेजिमेंट में तैनात हैं। अग्निपथ योजना के तहत अभी 1300 युवाओं की भर्ती की जानी है और इसमें से भी 25 फीसदी को स्‍थायी नौकरी मिलेगी।

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