रक़्क़ा का डर्टी सीक्रेट: कैसे भागे इस्लामिक स्टेट के लड़ाके?

Posted By: BBC Hindi
Subscribe to Oneindia Hindi
रक़्क़ा सिटी
BULENT KILIC/AFP/Getty Images
रक़्क़ा सिटी

इस्लामिक स्टेट के जाने और अमन लौटने की बातों के बावजूद रक़्क़ा अब भी एक ख़तरनाक जगह है.

लड़ाई एक महीने पहले ख़त्म हो चुकी है, फिर भी चारों तरफ़ इसके निशान बाक़ी है. शहर के ज़्यादातर इलाकों में जाना मना है. किसी को यहां आने की इजाज़त नहीं है.

लेकिन हम यहां अंदर तक आ गए. मलबों के ढेर के बीच ये पता लगाने कि आख़िर किस रास्ते से इस्लामिक स्टेट के लड़ाके भागे.

सिटी हॉस्पिटल उनका आख़िरी ठिकाना था. हमारी भी यात्रा यहीं से शुरू हुई. हारे हुए आईएस के लड़ाके आख़िरी बार लड़ाई के मैदान में नहीं बल्कि इस बस में दिखे.

सीरिया ने ढहाया आईएस का आख़िरी क़िला

आईएस से आज़ादी, पर रक्का ने क्या खोया

रक़्क़ा का सिटी हॉस्पिटल

आईएस का काफ़िला रक़्क़ा के सिटी हॉस्पिटल से रवाना हुआ जहां वो महीनों से रह रहे थे. उनके साथ थे उनके परिवार और बंधक.

लेकिन उन लड़ाकों के चेहरे पर हार के भाव कतई नहीं थे. वो अक्खड़ और धमकाने वाले अंदाज़ में थे. यहां पर क्या डील हुई कोई उसके बारे में बात नहीं करना चाहता.

ये रक़्क़ा का डर्टी सीक्रेट है. तो क्या कुर्दों, अरबों और पश्चिमी सेनाओं ने आईएस को यहां से भागने का मौक़ा दिया?

क्या आईएस के लड़ाकों को यहां से बहुत दूर दोबारा इकट्ठे होने का मौक़ा दिया गया?

तीन साल बाद आईएस की 'राजधानी' रक़्क़ा मुक्त

'सबके सामने आईएस लड़ाकों ने लड़कियों का गैंग रेप किया'

उत्तरी सीरिया...

इस्लामिक स्टेट के लड़ाके शहर से चुपचाप, दबे पांव मलबे के बीच से महफ़ूज़ जगह की ओर निकल लिए.

हमारी खोज रक़्क़ा से शुरू हुई जो हमें उत्तरी सीरिया और उसके भी आगे ले गई. डील शुरू हुई मीडिया के ब्लैक आउट से.

आईएस को यहां से भगाने के समझौते के बारे में कुछ भी दिखाने की मनाही थी.

लेकिन हमारे हाथ लगे कुछ वीडियो फ़ुटेज जिससे पता लगा कि आईएस को कैसे यहां से भगाया गया.

IS ने जारी किया 'बग़दादी का नया ऑडियो टेप'

आजकल कहां हैं इस्लामिक स्टेट के लड़ाके?

हथियाबंद लड़ाके

दुनिया को बताया गया कि कुछ मुट्ठी भर स्थानीय लड़ाकों को ही यहां से जाने दिया गया. हथियारबंद विदेशी लड़ाकों को नहीं.

लेकिन ये ट्रक आईएस लड़ाकों से भरे दिखे. कुछ ने तो आत्मघाती बेल्ट भी पहन रखे थे और सबके पास ख़तरनाक हथियार थे.

हम पहुंचे ताबक़ा जिसके बाहरी बाहरी हिस्से में आईएस लड़ाकों को ले जाने वाले ट्रक कुछ देर के लिए रुके थे.

यहां हम उन ड्राइवरों से मिले जिन्हें उन लोगों को सुरक्षित निकालने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी. उन्हें ये काम कुर्दों की अगुवाई वाली सीरियाई सेना ने दिया था.

किरकुक में घुसी इराक़ी सेना, कुर्दों का पलायन

इस्लामिक स्टेट के 'असर' में था न्यूयॉर्क का हमलावर

आईएस का काफ़िला

ये उनकी ज़िंदगी की सबसे बड़ी यात्रा थी. ट्रकों में आईएस ने बम लगा रखे थे, ताकि डील फ़ेल होने की सूरत में वो उन्हें उड़ा सकें.

इन बेचारों को तीन दिन और तीन रात लगातार ट्रक चलाना पड़ा.

हर कोई कह रहा था कि बस चंद लोगों को बाहर निकाला गया.

मैंने एक ड्राइवर से पूछा, आप लोगों को ये ज़िम्मेदारी दी गई. बताइए कि कुल कितने लोग थे?

एक ड्राइवर ने बताया, "हमारे काफ़िले में 47 ट्रक और 13 बसें थीं. आईएस वालों के अपने वाहन भी थे. हमारा काफ़िले 6-7 किलोमीटर लंबा था. हमने महिलाओं और बच्चों समेत चार हज़ार लोगों को निकाला."

इस्लामिक स्टेट के चंगुल से छूटे भारत के फ़ादर टॉम

बार्सिलोना: 'इस्लामिक स्टेट के सैनिकों ने किया हमला'

इस्लामिक स्टेट

ये पूछने पर कि ट्रक में जो लोग थे वो कहां के थे? उस शख़्स ने बताया, "फ्रांस, तुर्की, अज़रबैजान, पाकिस्तान, यमन, चीन, ट्यूनीशिया, मिस्र सहित कई देशों के लोग थे."

एसडीएफ़ ने इस्लामिक स्टेट से कहा था कि इन ट्रकों पर किसी किस्म के बैनर या झंडे ना लगाएं. आईएस के लड़ाके ट्रकों की छत पर बैठे थे.

एक ट्रक पर तो इतने हथियार लादे गए थे कि उसका एक्सेल ही टूट गया. रास्ते में जब वो इस गांव से गुज़रे तो खाना खाने के लिए अली अल असद की दुकान पर रुके.

अली अल असद ने बताया, "हम अपनी दुकान पर बैठे थे कि एक एसडीएफ़ की गाड़ी से कुछ लोग रुके और कहा कि आईएस के साथ एक डील हुई है. उन्होंने हमसे रास्ता साफ़ करने को कहा. हमने ऐसा ही किया. फिर वहां से आईएस का काफ़िला निकला. हज़ारों लोग थे. उन्हें निकलने में दो-तीन घंटे लग गए."

इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ पाक का बड़ा अभियान

कहां छुपा है इस्लामिक स्टेट का मुखिया बग़दादी

रेगिस्तान के रास्ते...

गठबंधन सेना का एक विमान उनके ठीक ऊपर से उड़ रहा था लेकिन उसने किया कुछ नहीं. काफिला बढ़ता रहा. हम उस रास्ते पर चलते रहे.

यहां से उनका काफ़िला ग़ायब हो गया. महमूद ने देखा कि थोड़ी देर बाद वो मुख्य सड़क को छोड़कर रेगिस्तान के रास्ते की ओर चल पड़े.

जाते-जाते उन्होंने धमकी दी कि धोखा देने वालों के ये सर कलम कर देते हैं.

महमूद ने बताया, "उनकी इतनी सारी गाड़ियां थीं कि हम गिन ही नहीं पाए. घंटों तक उनका काफ़िला यहां से निकलता रहा. हम चार-पांच सालों से डर के साये में जी रहे हैं. हमें आईएस के ख़ौफ़ से निकलने में लंबा वक़्त लगेगा. अब भी हमें लगता है कि वो लोग कभी ना कभी यहां फिर वापस आ सकते हैं."

यूट्यूब पर इस्लामिक स्टेट खोजेंगे तो...

कश्मीर में पैर पसारने की कोशिश में है इस्लामिक स्टेट

गठबंधन सेना

हमारे सवालों के जवाब में गठबंधन सेना ने माना कि हज़ारों लोगों को यहां से भाग निकलने की इजाज़त दी गई थी.

लेकिन विदेशी लड़ाकों के पलायन की बात से सेना इनकार करती है. भागे हुए कई लोग यहां तुर्की आ चुके हैं.

रक़्क़ा उनकी राजधानी थी लेकिन साथ ही वो उनके लिए पिंजड़े जैसी थी जिसमें वो फंसे हुए थे.

वहां अब भले ही शांति वापस आ गई हो लेकिन आईएस के ख़तरनाक लड़ाके वहां से भागकर यहां यूरोप के दरवाज़े तक पहुंच चुके हैं.

लंदन हमला: 12 अरेस्ट, आईएस ने ली जिम्मेदारी

'इस्लामिक स्टेट' ने कहाँ- कहाँ लगाई सेंध?

हमले का मक़सद

आईएस के हारने की ख़बर दुनिया भर में छा गई. लेकिन एक तस्कर और एक आईएस लड़ाके की चेतावनी पर ग़ौर करें तो आईएस कभी भी वापसी कर सकता है.

तस्करी के धंधे से जुड़े शख़्स का कहना था, "रक़्क़ा और डेर अल ज़ोर में आईएस की हार के बाद हम तस्करों ने महसूस किया कि सीमा पार कर तुर्की आने की कोशिश करने वालों की संख्या बहुत बढ़ गई है. उनमें कई लोग आईएस के लड़ाके और उनके परिवार के लोग हैं. उनमें सीरियाई भी हैं और विदेशी भी."

इस्लामिक स्टेट के उस लड़ाके ने कहा, "हमारे ग्रुप में कई लोग फ्रांस से भी हैं. वो हमले के मक़सद से फ्रांस रवाना हो चुके हैं."

रक़्क़ा से ख़िलाफ़त ख़त्म हो चुकी है लेकिन आईएस का ख़तरा बरक़रार है.

BBC Hindi
देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
Dirty Secret of Raqqah How to Run Islamic State Fighters
Please Wait while comments are loading...