देवयानी खोबरागड़े कौन हैं? विवादों में रहने वाली IFS अधिकारी ने पहनी अप्सरा की पोशाक, तस्वीर हुई वायरल
विवादों में रहने वालीं भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी देवयानी खोबरागड़े एक बार फिर से सुर्खियों में आई हैं। इस बार वो अपने पहनावे के लिए चर्चा का केंद्र बनी हैं। कंबोडिया में वर्तमान भारतीय राजदूत खोबरागड़े ने अनोखे तरीके से देशवासियों को शुभकामनाएं दी है।
कंबोडिया में भारतीय दूतावास द्वारा सोशल मीडिया पर साझा की गई तस्वीरों में भारत के राजनयिक को पारंपरिक पोशाक पहने देखा जा सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स में इस पोशाक को खमेर अप्सरा की पोशाक बताया गया है।

एक्स पर कंबोडिया में भारतीय दूतावास की पोस्ट के अनुसार, राजनयिक को खमेर संस्कृति और परंपरा की गहरी समझ है, उन्होंने देश के नए साल को चिह्नित करने के लिए 'सुरुचिपूर्ण' तरीके से कपड़े पहने। कंबोडिया में भारतीय दूतावास ने कहा, हमारे सभी कंबोडियाई दोस्तों को खमेर नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।
देवयानी 1999 बैच की IFS अधिकारी हैं। वह महाराष्ट्र कैडर के रिटायर्ड आईएएस उत्तम खोब्रागेड की बेटी हैं। 12 दिसंबर, 2013 को वीजा धोखाधड़ी के आरोप में उन्हें अमेरिका में गिरफ्तार किया गया था। तब वह न्यू यॉर्क में भारत की डिप्टी काउंसिल जनरल थीं। उनकी गिरफ्तारी से भारत और अमेरिका में कूटनीतिक तनाव उत्पन्न हो गया था।
देवयानी पर आरोप था कि उन्होंने अपनी घरेलू सहायिका संगीता रिचर्ड के वीजा आवेदन में गलत तथ्य दिया था। इसके अलावा उन पर आरोप था कि वह अपनी नौकरानी को कम मेहनताना देती थीं। बाद में उन्हें ढाई लाख डॉलर के मुचलके पर जमानत मिली थी। हालांकि पूर्ण राजनयिक छूट मिलने के कारण वह भारत आ गई थीं।
एक भारतीय अधिकारी की गिरफ्तारी से भारत नाराज हो गया था और विदेश मंत्रालय ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। इसके बाद वो एक बार फिर से विवादों में आई थीं जब उन्होंने मीडिया में बयानबाजी की थी। इसके बाद उन्हें उनके काम से हटा दिया गया था।
उन्होंने मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में उस घटना के बारे में बातचीत की थी। विदेश मंत्रालय ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि खोबरागड़े ने इस तरह के बयान देने के लिए पहले से अनुमति नहीं ली थी। हालांकि कुछ सालों बाद देवयानी खोबरागड़े को अक्टूबर 2020 में कंबोडिया में भारत का राजदूत नियुक्त किया गया था।
विवादों से पुराना नाता
मुंबई के आदर्श सोसायटी घोटाले में भी देवयानी का नाम आया था। महाराष्ट्र सरकार की ओर से उन्हें दस फीसदी कोटा के तहत उन्हें आदर्श सोसायटी में फ्लैट दिया गया जबकि उनके पास मुंबई में पहले से घर था। हालांकि मामले की जांच करने वाली सीबीआई ने न तो देवियानी और न उनके पिता से कभी पूछताछ की। हालांकि उनके पिता ने आदर्श घोटाले की जांच कर रहे दो सदस्यीय जांच आयोग के सामने गवाही दी थी।












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