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वैज्ञानिकों ने खोजा यूरोप का सबसे हिंसक शिकारी, ‘डायनासोर द्वीप’ से मिले दैत्याकार जीव ने उड़ाए होश

वैज्ञानिकों के मुताबिक, यूरोप में मिले इस डायनासोर के अवशेष की जांच के दौरान पता चला, कि इसका वजन 500 किलो से ज्यादा रहा होगा और ये 33 फीट लंबा रहा होगा।

लंदन, जून 10: वैज्ञानिकों को यूरोप में एक ऐसा डायनासोर मिला है, जिसे यूरोप का सबसे हिंसक शिकारी कहा गया है। वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि, 'आइल ऑफ वाइट' पर मिला डायनासोर यूरोप में विचरन करने वाला सबसे हिंसक जमीनी शिकारी था, जिसमें अपने समय में भीषण हिंसा मचाई होगी।

सबसे हिंसक शिकारी की खोज

सबसे हिंसक शिकारी की खोज

इस डायनासोर को खोजने के बाद वैज्ञानिकों ने कहा कि, शुक्र की बात है, कि ये अब यूरोप की सड़कों पर नहीं घूमता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, ये डानयासोर 33 फीट लंबा था और एक विशालकाय शार्क मछली की तरह ही इसके शरीर पर क्रॉस के निशान बने थे। वैज्ञानिकों ने कहा कि, ये डायनासोर एक भयानक प्राणी रहा होगा, जिसके बारे में कहा जाता है, कि उसका वजन पांच टन से ज्यादा था और उसके पास भयानक विशेषताओं की एक लंबी लिस्ट थी।

डायनासोर नहीं, एक दैत्य था...

डायनासोर नहीं, एक दैत्य था...

वैज्ञानिकों के मुताबिक, यूरोप में मिले इस डायनासोर के अवशेष की जांच के दौरान पता चला, कि इसका वजन 500 किलो से ज्यादा रहा होगा और ये 33 फीट लंबा रहा होगा। यानि, अगर इंसानों से तुलना करें, और एक आदमी की उम्र 6 फीट माने, तो ये डायनासोर एक 5 आदमियों की लंबाई से भी ज्यादा रहा होगा। वहीं, इस डायनासोर के दांत काफी ज्यादा नूकीले और रेजर की तरफ थे और इसका चेहरा मगरमच्छ की तरह था। वहीं, इसकी पूंछ, किसी विशालकाय चाबुक जैसी थी। हाल ही में खोजे गए कई टुकड़ों में से एक बड़े श्रोणि और पूंछ कशेरुक सहित भयानक जानवर की जीवाश्म हड्डियां थीं।

वैज्ञानिकों को रिसर्च में क्या मिला?

वैज्ञानिकों को रिसर्च में क्या मिला?

खोजों और विश्लेषण से संकेत मिलता है कि, इस जानवर के पास टी-रेक्स की तरह छोटे हथियार थे और वह स्पिनोसॉरिड्स श्रेणी का सदस्य था, जिसका अर्थ है कि यह तैरने में सक्षम डायनासोर के पहले समूह का हिस्सा था। साउथेम्प्टन विश्वविद्यालय के एक जीवाश्म विज्ञान के छात्र क्रिस बेकर ने कहा कि ये जानवर बहुत ही खतरनाक हत्यारा था। उन्होंने कहा कि, 'यह एक विशाल जानवर था, जिसकी लंबाई 10 मीटर (33 फीट) से अधिक थी, और कुछ आयामों को देखते हुए, शायद यूरोप में पाए जाने वाले सबसे बड़े शिकारी डायनासोर का प्रतिनिधित्व करता है।

'व्हाइट रॉक स्पिनोसॉरिड' दिया गया नाम

'व्हाइट रॉक स्पिनोसॉरिड' दिया गया नाम

भयानक खोज को अंजाम देने वाले वैज्ञानिकों ने इस डायनासोर के अवशेष को 'व्हाइट रॉक स्पिनोसॉरिड' नाम दिया है। पोर्ट्समाउथ विश्वविद्यालय में पीएचडी के छात्र जेरेमी लॉकवुड ने कहा कि, 'इनमें से अधिकांश अद्भुत जीवाश्म ब्रिटेन के सबसे कुशल डायनासोर शिकारी में से एक था, जिसे मशहूर जीवाश्म वैज्ञानिक निक चेज़ ने खोजा था, जो कोविड महामारी से ठीक पहले मर गये थे। जेरेमी लॉकवुड ने कहा कि, 'मैं निक के साथ इस डायनासोर के अवशेषों की खोज कर रहा था और उसमें सुरंगों के साथ श्रोणि की एक गांठ मिली, जो मेरे हाथों के आकार के बराबर थी'।

आइल ऑफ वाइट बना 'डायनासोर द्वीप'

आइल ऑफ वाइट बना 'डायनासोर द्वीप'

जेरेमी लॉकवुड ने कहा कि, 'हमें लगता है कि जब इस डायनासोर की मौत हुई होगी, तो फिर इसे मैले में रहने वाले और हड्डी खाने वाले लार्वा ने खाया होगा और ये कीड़ों की झुंड का खाना बन गया होगा'। आपको बता दें कि, यूरोप में कहीं और की तुलना में अधिक डायनासोर हड्डियों को खोदने के बाद से आइल ऑफ वाइट को 'डायनासोर द्वीप' करार दिया गया है।

धरती से कैसे लुप्त हुए डायनासोर

धरती से कैसे लुप्त हुए डायनासोर

करीब 6.6 करोड़ साल पहले धरती के दैत्य डायनासोर का नामोनिशान मिटा देने वाला ऐस्टरॉइड के गिरने के बाद पूरी धरती पर दो सालों के लिए अंधेरा छा गया था। एक नए स्टडी से पता चला है कि, 6.6 करोड़ साल पहले डायनासोर और धरती पर मौजूद कई और प्रजातियों का पूरी तरह से सफाया करने वाले क्षुद्रग्रह जब पृथ्वी पर गिरा था, उस वक्त पृथ्वी की स्थिति ऐसी हो गई थी, मानो प्रलय आ गई हो और एक तरह से धरती के लिए ये प्रलय जैसा ही था।

प्रलय में मिल गये डायनासोर

प्रलय में मिल गये डायनासोर

कैलिफोर्निया एकेडमी ऑफ साइंसेज की एक टीम के अनुसार, ऐस्टरॉइड के पृथ्वी से टकराने के तुरंत बाद जंगल की आग की कालिख ने आकाश को भर दिया था और सूरज की रोशनी का धरती पर आना बंद हो गया था। वैज्ञानिकों के मुताबिक, ये ऐस्टरॉइड करीब 7.5 मील चौड़ा था और उसकी रफ्तार 27 हजार मील प्रति घंटा से भी ज्यादा थी और यह ऐस्टरॉइड चिक्सुलब क्रेटर से टकराने के बाद मैक्सिको की खाड़ी में जा गिरा था। ऐस्टरॉइड के पृथ्वी पर टकराने की वजह से उस वक्त पृथ्वी पर मौजूद करीब करीब 75 प्रतिशत जिंदगियां विलुप्त हो गईं थीं और पिछले कई सालों से इस ऐस्टरॉइड को लेकर वैज्ञानिक अध्ययन कर रहे हैं। (सभी तस्वीर- फाइल)

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