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दिनेश गुणेवर्दना श्रीलंका के नए 'संकटमोचक', भारत से है इनका खास नाता

आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहे श्रीलंका को नया प्रधानमंत्री मिल गया है। नव निर्वाचित राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने 73 वर्षीय दिनेश गुणेवर्दना को नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया है। दिनेश गुणेवर्दना इससे पहले

कोलंबो, 22 जुलाई : श्रीलंका में बदलते राजनीतिक हालात और भारी प्रदर्शनों के बीच दिनेश गुणेवर्धने को श्रीलंका का प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया है। उन्होंने आज कोलंबो के फ्लावर रोड स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय में नए प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली। बता दें कि, श्रीलंका में हालात बिगड़ते जा रहे हैं। इन सबके बीच 73 साल के दिनेश गुणेवर्दना की आगे की रणनीति क्या होगी, वह कैसे देश की बिगड़ते हालात को कंट्रोल कर पाएंगे यह तो वक्त ही तय करेगा। लेकिन आज हम देश के नए पीएम दिनेश गुणेवर्दना के बारे में जानते हैं, वो कौन हैं, उनकी क्या पृष्ठभूमि है।

भारत से है खास नाता

भारत से है खास नाता

श्रीलंका के नए पीएम दिनेश गुणेवर्दना श्रीलंका के विदेश, शिक्षा और गृह मंत्री रह चुके थे। गुणेवर्दना के परिवार का भारत के साथ खास कनेक्शन है और उनके पिता ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में भी हिस्सा लिया था। दिनेश गुणवर्धने एक ट्रेड यूनियन नेता और अपने महान पिता फिलिप गुनावर्धने की तरह एक कर्मठ और मजबूत नेता हैं। बता दें कि, फिलिप गुणावर्दना को श्रीलंका में समाजवाद के जनक के रूप में जाना जाता है।

राजनीति का लंबा अनुभव

राजनीति का लंबा अनुभव

श्रीलंका की राजनीति के दिग्गज खिलाड़ी के रूप में मशहूर रहे दिनेश गुणेवर्दना को स्पष्ट बोलने के लिए जाना जाता है। अपनी राजनीतिक जीवन में उन्होंने श्रीलंका के विकास में कई बड़े और अहम योगदान दिए हैं। कहा जाता है कि, उनके अपदस्थ प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे परिवार से काफी घनिष्ठता है। वे महिंदा राजपक्षे के करीबी और विश्वासपात्र बताए जाते हैं।

राजनीतिक जीवन

राजनीतिक जीवन


उनके राजनीतिक जीवन की बात करें तो साल 2015 और 2019 के बीच मैत्रीपाला सिरिसेना और विक्रमसिंघे के शासन के दौरान विपक्ष का झंडा सदैव ऊंचा रखा। वह उस वक्त भी किसी के समक्ष नहीं झुके और विपक्ष में रहने के दौरान उन्होंने सत्ताधारी पार्टी को देश की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया । आज समय ने फिर करवट ली है। देश घोर आर्थिक संकट से गुजर रहा है, प्रदर्शनकारी सड़क से संसद तक का रास्ता तय कर चुके हैं। सरकार के खिलाफ आवाजें उठ रही हैं। ऐसे समय में उन्हें फिर से एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है।

साफ-सुथरी छवि है नए पीएम की

साफ-सुथरी छवि है नए पीएम की

अपने माता-पिता की तरह साफ-सुथरी छवि रखने वाले दिनेश गुणावर्दना, भारत के साथ बेहतर संबंधों के लिए जाने जाते रहे हैं। इसी के चलते वे 22 साल से अधिक समय तक श्रीलंका में कैबिनेट मंत्री रहे हैं। सांस्कृतिक, सामाजिक, ऐतिहासिक और यहां तक ​​कि पौराणिक दृष्टि से भी भारत हजारों वर्षों से श्रीलंका का सबसे करीबी पड़ोसी रहा है और उत्कृष्ट संबंध बनाए रखना महत्वपूर्ण है। उनके कुछ करीबी सहयोगियों का कहना है कि आने वाले दिनों में और भी बहुत कुछ करने को है। वर्तमान में श्रीलंका में उत्पन्न घोर राजनीतिक संकट के बीच दिनेश गुणेवर्दना को प्रधानमंत्री बनाया गया है। रानिल विक्रमसिंघे को लगता है कि, वे अपने अनुभवों से देश को संकट से बाहर निकालने में मदद कर सकते हैं।

विदेशों से शिक्षा ग्रहण की

विदेशों से शिक्षा ग्रहण की

संयुक्त राज्य अमेरिका और नीदरलैंड में शिक्षित, दिनेश गुणेवर्दना एक ट्रेड यूनियन नेता और अपने महान पिता फिलिप गुनावर्धने की तरह एक कर्मठ और मजबूत नेता हैं। बता दें कि, फिलिप गुणावर्दना को श्रीलंका में समाजवाद के जनक के रूप में जाना जाता है। फिलिप को भारत से गहरा प्रेम था। बात 1920 की है जब दिनेश गुणेवर्दना के पिता फिलिप अमेरिका में रहते हुए भारत में अंग्रेजी साम्राज्यवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ी।

जयप्रकाश नारायण के सहपाठी थे पीएम के पिता

जयप्रकाश नारायण के सहपाठी थे पीएम के पिता

वह विस्कॉन्सिन विश्वविद्यालय में जयप्रकाश नारायण और वीके कृष्ण मेनन के सहपाठी थे, जहां उन्होंने अमेरिकी राजनीतिक हलकों में साम्राज्यवाद से स्वतंत्रता की वकालत की, और बाद में लंदन में भारत की साम्राज्यवाद विरोधी लीग का नेतृत्व किया। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि उनके परिवार का भारत से घनिष्ठ संबंध रहे हैं। उनके पूरे परिवार का भारत के प्रति एक अलग ही झुकाव रहा है।

भारत आकर आजादी की लड़ाई लड़ी

भारत आकर आजादी की लड़ाई लड़ी

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान श्रीलंका (तब एक ब्रिटिश उपनिवेश, सीलोन) से भागने के बाद प्रधानमंत्री दिनेश के पिता फिलिप और मां कुसुमा भारत में शरण लिए थे। यही से फिलिप गुणावर्दना भारत की आजादी के संग्राम में शामिल हो गए। वे उन भूमिगत कार्यकर्ताओं की लिस्ट में शामिल हो गए जो उन दिनों छिपकर भारत की आजादी के लिए लड़ रहे थे। लेकिन 1943 में, फिलिप और उनकी पत्नी कुसुमा को ब्रिटिश खुफिया विभाग ने पकड़ लिया और उन्हें बॉम्बे की आर्थर रोड जेल में डाल दिया। एक साल बाद फिलिप और कुसुमा को श्रीलंका भेज दिया गया और युद्ध खत्म होने के बाद रिहा कर दिया गया।

पंडित नेहरू आए थे मिलने

पंडित नेहरू आए थे मिलने

दिनेश गुणेवर्दना के लिए यह गर्व की बात है कि, उनके माता-पिता ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अपना अहम योगदान दिया था। इस दौरान वे जेल भी गए। भारत के साथ उनका जुड़ाव लगभग सौ साल पहले दक्षिण एशिया को ब्रिटिश राज से मुक्त करने के लिए शुरू हुआ था। भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन और उनके व्यक्तिगत बलिदान के लिए उनके निरंतर समर्थन के लिए व्यक्तिगत रूप से धन्यवाद देने के लिए श्रीलंका में उनके परिवार के घर का दौरा किया।

राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखते हैं दिनेश गुणेवर्दना

राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखते हैं दिनेश गुणेवर्दना

वहीं, सन 1948 में श्रीलंका को अंग्रेजों से आजादी मिलने के बाद, फिलिप और कुसुमा दोनों संसद के सदस्य बने थे। फिलिप 1956 में पीपुल्स रिवोल्यूशन सरकार के संस्थापक नेता और कैबिनेट मंत्री रहे। उनके सभी चार बच्चों ने कोलंबो के मेयर, कैबिनेट मंत्रियों, सांसदों सहित उच्च राजनीतिक पदों पर भी कार्य किया।

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