मोसाद, KGB, CIA, MI-5 की तरह RAW कर रहा आतंकियों का शिकार? क्या अब बर्दाश्त करने वाला देश नहीं रहा भारत?
India eliminate terrorists in Pakistan: ब्रिटिश अखबार द गार्जियन की रिपोर्ट में दावा किया गया है, कि पाकिस्तान में पिछले कुछ महीनों में कम से कम 20 एंटी इंडिया तत्वों की निशाना बनाकर हत्या की गई है और इन हत्याओं में भारत की खुफिया एजेंसी रॉ शामिल है।
हालांकि, इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा है, कि यह खबर "झूठा और दुर्भावनापूर्ण भारत विरोधी प्रोपेगेंडा" है, कि भारत ने आतंकवादियों को खत्म करने के लिए पाकिस्तान में टारगेट किलिंग्स की हैं। विदेश मंत्रालय ने आगे भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बयान को दोहराया, कि "किसी अन्य देश में टारगेट किलिंग्स भारत सरकार की नीति नहीं है।"

पहले कनाडा, फिर अमेरिका और अब पाकिस्तान, पिछले कुछ महीनों से भारत पर एंटी-इंडिया तत्वों को मारने के कई आरोप लगाए गये हैं, जैसे कनाडा ने खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के तार भारत सरकार से जोड़े, तो अमेरिका ने खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नून की हत्या की कोशिश में एक भारतीय अधिकारी के शामिल होने का दावा किया है। वहीं, पाकिस्तान कहता रहा है, कि उसके देश में हो रही हत्याओं के पीछे भारत शामिल है।
हालांकि, भारत सरकार ने एक भी आरोप को स्वीकार नहीं किया है, लेकिन भारत पर लगने वाले ये आरोप कुछ इसी तरह के हैं, जैसे आरोप इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद पर, अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA पर, रूस की खुफिया एजेंसी KGB पर और ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी MI-5 पर लगते रहे हैं। ऐसे में सवाल ये उठ रहे हैं, कि क्या भारत ने अपनी सॉफ्ट पॉवर इमेज को पीछे छोड़ दिया है और क्या अब भारत, एक ऐसे देश के तौर पर उभर रहा है, जिसकी पॉलिसी में आतंकवादियों को किसी भी हाल में छोड़ना नहीं है?
बर्दाश्त करने वाला देश नहीं रहा भारत?
मोदी सरकार के कार्यकाल में पठानकोट में जब आतंकवादी हमला हुआ था, तो मोदी सरकार ने ISI को जांच के लिए भारत बुलाया था, लेकिन जब बार बार भारत में हमले होने शुरू हुए, तो मोदी सरकार समझ गई, कि जब तक इन आतंकवादियों के खिलाफ डायरेक्ट एक्शन नहीं लिया जाएगा, ये सुधरने वाले नहीं हैं।
ब्रिटिश अखबार द गार्जियन ने अपनी रिपोर्ट में कुछ भारतीय खुफिया अधिकारियों के हवाले से यही दावा किया है, कि "भारत ने इजराइल की मोसाद और रूस की केजीबी जैसी खुफिया एजेंसियों से प्रेरणा ली है, जो विदेशी धरती पर हत्याओं से जुड़ी हुई हैं। भारतीय अधिकारी ने यह भी कहा, कि सऊदी पत्रकार और असंतुष्ट जमाल खशोगी की हत्या, जिनकी 2018 में सऊदी दूतावास में हत्या कर दी गई थी, रॉ के अधिकारियों ने सीधे तौर पर उसका उदाहरण दिया है।"
गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय अधिकारी ने कहा, कि "2018 में हुए जमाल खशोगी की हत्या के कुछ महीने बाद भारतीय प्रधानमंत्री कार्यालय में खुफिया विभाग के शीर्ष अधिकारियों के बीच इस बात पर बहस हुई थी, कि इस मामले से कैसे कुछ सीखा जा सकता है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने एक बैठक में कहा, कि अगर सऊदी ऐसा कर सकते है, तो हम क्यों नहीं?"
हालांकि, ब्रिटिश अखबार की इस रिपोर्ट को भारतीय विदेश मंत्रालय ने सिरे से खारिज कर दिया है और कोई भी देश ऐसी जिम्मेदारी कभी लेता भी नहीं है, और हमें पता भी नहीं है, कि इस रिपोर्ट में कितनी सच्चाई है, लेकिन इस रिपोर्ट से हटकर एक बात तो जरूर है, कि पाकिस्तान में भारत के मोस्ट वांटेड आतंकवादियों को एक के बाद एक ठिकाने लगाया गया है, जिसके बाद दर्जनों आतंकवादियों को ISI ने अपने सुरक्षित ठिकानों में छिपा दिया है।
पिछले कुछ महीनों में मुंबई में 2008 में हुए आतंकवादी हमले में प्रत्यक्ष या परोक्ष तौर पर शामिल कई मास्टरमाइंड आतंकवादियों की गोली मारकर या जहर देकर हत्याएं हुई हैं। इन हत्याओं में कई नाम ऐसे हैं, जो वांटेड आतंकवादी थे और पाकिस्तान सरकार ने कभी भी स्वीकार नहीं किया, कि वो आतंकी पाकिस्तान में रहते हैं। और यही वजह है, पाकिस्तान ज्यादातर मामलों में उन आतंकियों के नाम लेने से हिचकिचाता रहा है।
द गार्जियन की रिपोर्ट में दावा किया गया है, कि भारत सरकार ने विदेशों में रहने वाले आतंकवादियों को खत्म करने की व्यापक रणनीति के तहत पाकिस्तान में व्यक्तियों की हत्या की है। रिपोर्ट में यह दिखाने की कोशिश की गई है, कि जैसे भारत की मोदी सरकार ने एक नीति तैयार की है, जिसमें किसी भी हाल में आतंकवादयों को छोड़ना शामिल नहीं है।
आतंकवाद पर दुनिया का दोहरा रवैया
पिछले 3 दशकों से भारत लगातार आतंकवाद की समस्या को लेकर लगातार हर इंटरनेशन फोरम पर आवाज उठाता आया है और इतिहास गवाह है, कि जब तक अमेरिका में 9/11 का हमला नहीं हुआ, उस वक्त तक अमेरिका को भारत की आतंकवाद के खिलाफ आवाज सुनाई नहीं दी। अमेरिका लगातार पाकिस्तानी आतंकवादियों को शह देता रहा और अमेरिकी डॉलर पाकिस्तान उन आतंकियों को भारत के खिलाफ इस्तेमाल करता रहा।
पाकिस्तानी आतंकियों ने भारत में सैकड़ों आतंकी हमलों को अंजाम दिया, लेकिन हर बार इंटरनेशन फोरम कान मुंदे रहा। अभी भी यूनाइटेड नेशंस में यही होता है। भारत जिन दहशतगर्दों को यूएनएससी के सामने पेश करता है, चीन उसके खिलाफ वीटो पावर का इस्तेमाल करता है और पाकिस्तानी आतंकियों को मोस्ट वांटेड आतंकियो की लिस्ट में शामिल होने से रोक देता है। जाहिर तौर पर ये ना सिर्फ यूएनएससी मंच का गलत इस्तेमाल है, बल्कि ये साफ बताता है, कि आतंकवाद को लेकर दुनिया किस तरह से दोहरा रवैया अपनाता रहा है।
अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए हो, या इजराइली खुफिया एजेंसी मोसाद या फिर रूसी खुफिया एजेंसी मोसाद, इन्होंने विदेशों में सैकड़ों हत्याएं की हैं और जिन लोगों से इनके देशों को खतरा रहा है, उन्हें मारा है। सीआईए ने पाकिस्तान में घुसकर ओसामा बिन लादेन को मारा, मोसाद तो विदेशों में ऑपरेशंस को अंजाम देने के लिए ही कुख्यात/विख्यात रहा है और रूसी केजीबी अपने दुश्मनों को जहर देकर मारने के लिए जानी जाती है। यानि, दुनिया के दोगलेपन को देखते हुए भारत को भी आत्मरक्षा का अधिकार है और भारतीय खुफिया एजेंसियों को भी भारत के दुश्मनों को साफ करने का अधिकार है, भले ही अमेरिका और कनाडा जैसे देशों की पेट में कितना ही दर्द क्यों ना हो।












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