क्या चीन का मंगल मिशन हुआ फेल ? 6 महीने में एक इंच भी क्यों नहीं खिसका Zhurong rover

चीन के अंतरिक्ष कार्यक्रम को लेकर एक बुरी खबर है। पता चला है कि दो साल पहले उसने लाल ग्रह पर जो तियानवेन-1 मिशन भेजा था, उसके जूरोंग रोवर ने चलना बंद कर दिया है। 6 महीने में वह पूरी तरह से स्थिर हो गया है।

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मंगल ग्रह को जानने-समझने के लिए चीन ने करीब दो साल पहले जो तियानवेन-1 मिशन लाल ग्रह पर भेजा था, उसमें रुकावटें पैदा हो गई हैं। इसका जूरोंग रोवर करीब 6 महीने से एक ही स्थान पर ठहर गया है। चाइनीज रोवर के साथ क्या हुआ है, वह दो साल में लैंडिंग वाली जगह से दो किलोमीटर भी ठीक से क्यों नहीं खिसक पाया है, इसको लेकर कई तरह की आशंकाए हैं। इसमें सोलर पैनल के किसी वजह से काम नहीं कर पाने की भी बात शामिल है। हालांकि, चीन की इस मसले पर महीनों की चुप्पी ने मिशन की कामयाबी को लकर संदेह और बढ़ा दिया है।

जूरोंग रोवर में क्यों लगी है 6 महीने से ब्रेक ?

जूरोंग रोवर में क्यों लगी है 6 महीने से ब्रेक ?

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के मार्स रीकानिसंस ऑर्बिटर ने सितंबर 2022 और फरवरी 2023 के बीच एक टाइम सीरीज तैयार की है, जिससे पता चलता है कि मंगल ग्रह पर गया चीन का जूरोंग रोवर इतने दिनों में एक इंच भी नहीं खिसका है। वह लाल ग्रह पर स्थिर हो चुका है। चीन के तियानवेन-1 मिशन के तहत 2021 के मई में जूरोंग मंगल पर उतरा था। इसका मकसद लाल ग्रह की भौगोलिक स्थिति का अध्ययन, उसकी मिट्टी का परीक्षण, वहां के तत्वों का सर्वे करना और वहां के वातावरण से सैंपल जुटाना था।

2 किलोमीटर भी ठीक से नहीं चला जूरोंग रोवर-रिसर्च

2 किलोमीटर भी ठीक से नहीं चला जूरोंग रोवर-रिसर्च

अमेरिकी एजेंसी ने जो कुछ पता लगाया है उससे लगता है कि सौर ऊर्जा से संचालित जूरोंग रोवर लैंडिंग वाली जगह से मुश्किल से 2 किलोमीटर भी नहीं चल पाया है। स्थाई तौर पर ठहरने से पहले रोवर मंगल के यूटोपिया प्लैनिटिया के मैदानी क्षेत्र में उतरा था। ऑर्बिटर पर लगाए गए हाई रेजोल्यूशन इमेजिंग साइंस एक्सपेरिमेंट (HiRISE) कैमरे से इसकी स्थिर अवस्था का खुलासा हुआ है। इस कैमरे को कैलटेक स्थित नासा के जेट प्रपल्शन लैबोरेटरी और यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना के शोधकर्ता संचालित करते हैं।

मंगल की सतह पर एक गड्ढे के पास शिथिल हो चुका है रोवर

मंगल की सतह पर एक गड्ढे के पास शिथिल हो चुका है रोवर

यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना के वैज्ञानिकों ने इस खुलासे के बारे में ब्लॉग पोस्ट पर लिखा है, 'HiRISE का इस्तेमाल अक्सर मार्स सर्फेस मिशन के पास के धूल-भरे इलाके में बदलाव को देखने के लिए किया जाता है।' 'इस बार सीरीज देखने से पता चलता है कि (जूरोंग) रोवर ने 8 सितंबर और 7 फरवरी, 2023 के बीच अपनी स्थिति नहीं बदली है।' फोटो में रोवर नीली डॉट की शक्ल में मंगल की सतह पर एक गड्ढे के पास नजर आता है। (ऊपर वाली तस्वीर सौजन्य: @HiRISE)

महीनों से सिग्नल नहीं मिलने की आ चुकी है रिपोर्ट

महीनों से सिग्नल नहीं मिलने की आ चुकी है रिपोर्ट

तियानवेन-1 चीन का पहला अन्तर्ग्रहीय मिशन है। लेकिन, इसके जूरोंग रोवर की कोई नई तस्वीर महीनों से सामने नहीं आई है। ना ही इसके बारे में कोई अपडेट ही सामने आया है। जनवरी में साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने एक रिपोर्ट दी थी, जिसमें बताया गया था कि पिछले साल मई में योजनाबद्ध हाइबर्नैशन में जाने के बाद से मिशन की टीम को जूरोंग से कोई सिग्नल नहीं मिला था। यह ऐसा समय होता है जब ग्रह पर सोलर रेडिएशन का स्तर कम होता है।

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    चीन का मंगल मिशन हुआ फेल ?

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    इसके बारे में कहा गया है कि इसका शुरुआती मिशन तो पूरा हुआ था, लेकिन दिसंबर में जब सोलर रेडिएशन का स्तर वापस लौटता, तब इसके सोलर पैनल को चार्ज करने में आसानी होती। खगोलविदों के बीच जूरोंग रोवर के रुके होने को लेकर एक थ्योरी यह है कि इसके सोलर पैनल और क्लीनिंग 'विंडो' पर मंगल की धूल जम गई है, जिसके चलते यह चार्ज नहीं हो पा रहा है और वहीं पर रुका पड़ा है।


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