गिद्धों की घटती संख्या बड़ी त्रासदी की वजह! भारत में बढ़ेगा मौतों का आंकड़ा, रिपोर्ट में चौंकाने वाला दावा

दुनिया में तेजी से बदलती जलवायु के बीच प्रकृतिक संतुलन बिगड़ता जा रहा है। बाढ़, सूनामी और ग्लोबल वॉर्मिंग के चलते साल दर साल लगातार तबाही लेकर आती हैं। इस बीच कई ऐसे जीव हैं, जो या तो विलुप्त हो गए हैं, या फिर विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुके हैं। इन्हीं में से एक हैं, गिद्ध, जिनकी संख्या घटती जा रही है।

विलुप्तप्राय जीवों पर रिसर्च करने वाली एक संस्था ने अपनी ताजा रिपोर्ट में भारत में घटती गिद्धों की भारत के टेंशन बढ़ाने वाली है। दावा किया गया है कि जिस गति से गिद्दों की संख्या घट रही है, अगर यही क्रम जारी रही है, तो आने वाले समय में भारत में मौतों की संख्या बढ़ सकता है।

vultures will cause of big tragedy

1990 के दशक के मध्य में भारत की 50 मिलियन गिद्ध आबादी लगभग विलुप्त हो गई थी, जिसका मुख्य कारण बीमार मवेशियों के इलाज के लिए एक गैर-स्टेरायडल विरोधी भड़काऊ दवा (एनएसएआईडी) डाइक्लोफेनाक का व्यापक उपयोग था। उपचारित पशुओं के शव खाने वाले गिद्ध गुर्दे की विफलता से मर गए।

ताजा शोध में लेखकों का अनुमान है कि 2000 और 2005 के बीच गिद्धों की हानि के कारण सालाना लगभग 100,000 अतिरिक्त मानव मौतें हुईं।

क्यों घटी गिद्धों की संख्या
ताजा शोध में लेखकों का अनुमान है कि 2000 और 2005 के बीच गिद्धों की हानि के कारण सालाना लगभग 100,000 अतिरिक्त मानव मौतें हुईं। स्विस फार्मास्युटिकल कंपनी सिबा-गीगी को नोवार्टिस के नाम जाना जाता है। कंपनी की डाइक्लोफेनिक साल्ट से बनी दवाओं का उपयोग भी गिद्धों की संख्या में कमी वजह बनी है। रिपोर्ट के मुताबिक, घायल या बीमार जानवरों में चोट, सूजन और बुखार के इलाज में किसानों सबसे पहले इसे पशुओं के लिए प्रयोग किया। दरअसल, डिक्लोफेनाक सस्ता होने के साथ साथ 15 मिनट अपना असर दिखाने लगता है। लेकिन जब इस दवा का सेवन करने वाली पशुओं की मौत होती है और गिद्ध उनकी मांस को खाते हैं, तो उनका बचना मुश्किल हो जाता है।

रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में गिद्धों की आबादी लगभग खत्म हो गई थी। 2000 के दशक की शुरुआत में गिद्ध दुर्लभ हो गए, 1990 के दशक की शुरुआत में इनकी संख्या लगभग 40 मिलियन से कम हो गई।

एक स्टडी 'द सोशल कॉस्ट्स ऑफ कीस्टोन स्पीशीज़ कोलैप्स: एविडेंस फ्रॉम द डिक्लाइन ऑफ वल्चर्स इन इंडिया' में कहा है, "गिद्धों की कार्यात्मक विलुप्ति...मानव मृत्यु दर में 4 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है।" यह कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं लग सकता है, लेकिन हम यहां मानव जीवन के बारे में बात कर रहे हैं। यदि किसी देश में हर साल 100,000 लोग मरते हैं, तो 4 प्रतिशत की वृद्धि 4,000 और मौतों के बराबर होती है। शोध के लेखकों में शामिल एक्सपर्ट ईयाल फ्रैंक और अनंत सुदर्शन की इस स्टडी के अनुसार, गिद्धों के विलुप्त होने से अप्रत्यक्ष रूप से सैकड़ों हजारों मानव मौतें हुईं।

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