लीबिया में हर दिन बढ़ रहा मौत का आंकड़ा, अब तक 11,300 लोगों की मौत, 2600 साल पुराना शहर भी हुआ बर्बाद
साइरेनिका अब शोक में डूबा हुआ है। प्राचीन साइरेन से 100 किमी दूर डर्ना शहर में, अचानक आई बाढ़ ने इसके एक चौथाई इलाकों को नष्ट कर दिया। रविवार को आई विनाशकारी बाढ़ से हजारों लोगों की मौत हो गई। हजारों लोगों का अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है।
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक कम से कम 20,000 लोगों के मारे जाने की आशंका है। ग्रीन माउंटेन की ढलान जो कि लीबिया के सांस्कृतिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल में शामिल है, को भी नुकसान पहुंचा है।

यहां पर ग्रीक, रोमन और बीजान्टिन युग की कई कब्रें, अंत्येष्टि पत्थर और अन्य पुरातात्विक संरचनाएं मिट्टी के नीचे दब गईं या पानी की तेज धाराओं के साथ मंसौरा क्षेत्र की निचली घाटियों में बह गईं।
संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि पूर्वोत्तर लीबिया में अभूतपूर्व बाढ़ से मरने वालों की संख्या कम से कम 11,300 लोगों तक पहुंच गई है, जबकि अकेले डेर्ना के तबाह शहर में 10,100 लोग लापता हैं।
आपको बता दें कि डेनियल तूफान के कारण हुई भारी बारिश के कारण डेर्ना शहर के बाहर बने दो डैम टूट गए, जिनके कारण एक विनाशकारी बाढ़ आई। हजारों लोग बाढ़ के कारण समुद्र में बह गए।
फिलहाल बचावकर्मी ढही हुई इमारतों में जीवित बचे लोगों की तलाश में हैं। हालांकि लोगों के बचने की उम्मीद कम है। उन्हें अब तक सिर्फ शव ही मिले हैं। सीमेंट के मलबे के नीचे और भी शवों के दबे होने की आशंका है।
इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन ने कहा कि पूर्वी लीबिया में 38,640 से अधिक लोग बेघर हो गए हैं, जिनमें से 30,000 अकेले डेरना में थे। जलवायु विशेषज्ञों ने इस आपदा को लीबिया के क्षयकारी बुनियादी ढांचे और गर्म होते वातावरण का परिणाम बताया है।












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