दावोस में यूक्रेन युद्ध शांति समझौते पर NSAs की बड़ी बैठक.. रूस को लेकर भारत को दी गई बड़ी जिम्मेदारी
NSAs meet in Davos: यूक्रेन में पिछले करीब 2 सालों से चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए दावोस में काफी अहम बैठक की गई है, जिसमें कई देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों ने यूक्रेन के लिए शांति फार्मूले पर चर्चा की है, जिसका मकसद था, युद्ध प्रभावित देश में जल्द शांति बहाली पर जोर दिया।
इस बैठक के दौरान मेजबान स्विट्जरलैंड ने भारत को अहम जिम्मेदारी दी है, और जोर देकर कहा है, कि भारत अपने प्रभाव और रूस के साथ संबंधों का इस्तेमाल कर, इस युद्ध को शांति की तरफ ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। भारत की तरफ से इस बैठक में डिप्टी एनएसए विक्रम मिसरी शामिल हुए थे।

दावोस बैठक में सेंटर में भारत
दावोस में दुनिया के कई देशों के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर्स की बैठक में, कई देशों के ने भारत की स्थिति को दोहराया और प्रधानमंत्री मोदी के इस बात का उल्लेख किया, कि युद्ध कभी भी समाधान नहीं हो सकता है और मौजूदा स्थिति को हल करने के लिए बातचीत जरूरी है।
बैठक के बाद एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, स्विस विदेश मंत्री इग्नाज़ियो कैसिस ने कहा, कि रूस को किसी समय शांति योजना चर्चा में शामिल होने के लिए कहा जाएगा, लेकिन रूस को मेज पर लाने के लिए कुछ देशों की मध्यस्थता की आवश्यकता होगी।
उन्होंने कहा, कि शांति बहाल करना ही आखिरी मकसद है। विदेशी मामलों के स्विस संघीय पार्षद ने कहा, कि वर्तमान में, रूस कोई रियायत देने को तैयार नहीं है, लेकिन दोनों देशों को बातचीत की टेबल पर लाने के अलावा भी कोई और विकल्प नहीं है, लिहाजा इसके लिए सामूहिक तौर पर जिम्मेदारी उठानी होगी और 100 से ज्यादा देशों को एक साथ काम करना होगा।
कैसिस ने कहा, कि "दांव पर काफी कुछ लगा हुआ है और हमें इससे आगे बढ़ने की जरूरत है। बिना संवाद के हम किसी संतोषजनक उद्देश्य तक नहीं पहुंच सकते। इतिहास बताता है, कि युद्ध कोई समाधान नहीं है।"
सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, कि भारत सहित ब्रिक्स देशों की भागीदारी बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये वे देश हैं, जिनके रूस के साथ कुछ संबंध जारी हैं।
उन्होंने भारत जैसे देशों द्वारा अपनाए गए रुख की भी सराहना की और कहा, कि उनके कार्यों से इस सामूहिक आंदोलन को सुविधा मिल रही है।
उन्होंने कहा, कि "वे (शारीरिक रूप से संघर्ष क्षेत्र से) बहुत दूर हो सकते हैं, लेकिन वे एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, क्योंकि रूस में उनका प्रभाव है। चीन भी अहम भूमिका निभा सकता है और हमें इन बैठकों में चीन को शामिल करने के लिए काम करना होगा।'
यह पूछे जाने पर कि क्या स्विट्जरलैंड चीन और रूस को बातचीत की मेज पर लाने में मदद कर सकता है, कैसिस ने सकारात्मक जवाब देते हुए कहा, "हां, मैं ऐसा करने में हमारी भूमिका देखता हूं।"
यूक्रेन में शांति को लेकर चौथी बैठक
स्विस विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, कि "बैठक का आयोजन करके, स्विट्जरलैंड इस लक्ष्य को हासिल करने में यूक्रेन का समर्थन करना जारी रखेगा"।
आपको बता दें, कि 2022 में यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की द्वारा प्रस्तावित शांति फॉर्मूले पर यह चौथी एनएसए बैठक थी, जो यूक्रेन में न्यायसंगत और स्थायी शांति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से दस सिद्धांतों का पालन करती है।
इससे पहले कोपेनहेगन, जेद्दा और माल्टा में बैठकें हो चुकी हैं। भारत ने हमेशा यूक्रेन में शांति बहाली की वकालत की है और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने ज़ेलेंस्की के साथ चर्चा के दौरान कहा है, कि भारत शांति बहाल करने में मदद के लिए हर संभव तरीके से मदद करने के लिए तैयार है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत के दौरान भी मोदी ने कहा था, कि यह युद्ध का समय नहीं है।
भारत ने किया शांति का आह्वान
सूत्रों ने कहा कि दावोस बैठक में भारतीय प्रतिनिधि ने फिर से जल्द शांति बहाली का आह्वान किया, हालांकि इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
कैसिस के साथ बैठक की सह-अध्यक्षता करने वाले यूक्रेन के राष्ट्रपति के कार्यालय के प्रमुख एंड्री यरमक ने कहा, कि इसमें 81 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
स्विस विदेश मंत्रालय ने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य यूक्रेन में स्थायी और न्यायपूर्ण शांति के सिद्धांतों पर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के स्तर पर बातचीत को अंतिम रूप देना है।
चौथी एनएसए बैठक में खाद्य सुरक्षा और मानवीय पहलुओं पर पैनल चर्चा भी शामिल थी। यह बैठक यहां पांच दिवसीय विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक शुरू होने से एक दिन पहले आयोजित की गई थी, जिसमें लगभग 60 राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों सहित 2,800 से अधिक वैश्विक नेता शामिल होंगे।












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