ईरान के पास तैनात होगी US की सबसे ताकतवर मिसाइल Dark Eagle Missile! कितने की आती है- कौन बनाता है?
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ईरान के खिलाफ मिडिल ईस्ट में डार्क ईगल मिसाइल तैनात करने पर विचार कर रहे हैं। यह हाइपरसोनिक हथियार अभी पूरी तरह ऑपरेशनल नहीं है, लेकिन इसकी तैनाती से ईरान पर भारी दबाव बनेगा। ट्रंप के पास 1 मई तक कांग्रेस की मंजूरी लेने की डेडलाइन है। क्या यह कदम युद्ध को और भड़काएगा या शांति की राह खोलेगा?
Dark Eagle Missile: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस समय ईरान के खिलाफ शुरू किए गए युद्ध को लेकर भारी दबाव में हैं। उनके बयान और फैसले इस बात की सीधी गवाही दे रहे हैं जैसे- उनका सीजफायर का टाइम बढ़ाना, ईरान से बात करने न जाना आदि। इसकी वजह सिर्फ युद्ध का मैदान नहीं, बल्कि अमेरिकी कानून भी है। 1973 के War Powers Resolution के तहत अगर कांग्रेस की मंजूरी नहीं मिलती, तो राष्ट्रपति को 1 मई तक अमेरिकी सेना को वापस बुलाना पड़ सकता है। यानी ट्रंप के पास फैसला लेने के लिए सीमित समय बचा है। इसी बीच खबर आ रही है कि ट्रंप अब मिडिल ईस्ट में अपनी सबसे ताकतवर में से एक मिसाइल डार्क ईगल तैनात कर रहे हैं।
पहली बार होगी डार्क ईगल की तैनाती
ईरान की ओर से शांति समझौते को लेकर नरम रुख नहीं दिखने के बाद ट्रंप प्रशासन ने अब मिडिल ईस्ट में अपनी लंबी दूरी की हाइपरसोनिक मिसाइल डार्क ईगल (Dark Eagle Missile) तैनात करने पर विचार शुरू कर दिया है। यह मिसाइल अभी पूरी तरह ऑपरेशनल नहीं मानी जाती, लेकिन अगर इसे तैनात किया गया तो यह पहली बार होगा जब अमेरिका इसे किसी एक्टिव वॉर जोन में इस्तेमाल करेगा। इससे अमेरिका हमला करे या नहीं लेकिन ईरान पर दबाव जरूर बनाना चाहता है।

क्या है डार्क ईगल? अमेरिका का महंगा सुपर वेपन
Dark Eagle Missile अमेरिकी सेना का लंबी दूरी वाला हाइपरसोनिक वेपन सिस्टम है। इसकी रेंज 2,776 किलोमीटर (1,725 मील) से ज्यादा बताई जाती है। इसकी असली क्षमताएं अभी तक सीक्रेट रखी गई हैं। इसकी खास बातें-
• ध्वनि की गति से 5 गुना तेज उड़ान
• ऊपरी वायुमंडल में यात्रा
• हवा में दिशा बदलने की क्षमता
• एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में सक्षम

कितने का आती है डार्क ईगल मिसाइल?
इस मिसाइल सिस्टम को अमेरिकी कंपनी Lockheed Martin ने विकसित किया है। इसे खास तौर पर चीन और रूस जैसी शक्तियों की एडवांस एयर डिफेंस टेक्नोलॉजी से निपटने के लिए डिजाइन किया गया था। लागत-
• एक मिसाइल: लगभग $1.5 करोड़ डॉलर
• एक बैटरी (8 मिसाइल): लगभग $2.7 अरब डॉलर
अभी तक पूरी तरह तैयार भी नहीं
सबसे बड़ा ट्विस्ट यही है कि डार्क ईगल को 2022 तक ऑपरेशनल होना था, लेकिन अभी तक इसे पूरी तरह तैयार घोषित नहीं किया गया है। इसका मतलब एक बिना तैयार हुआ हथियार अमेरिका इस्तेमाल करना चाहता है। इसी वजह से डिफेंस एक्सपर्ट इस पर सवाल उठा रहे हैं।
सेंटकॉम ने मांगी तैनाती, वजह भी गंभीर
अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने मिडिल ईस्ट में डार्क ईगल तैनात करने की इजाजत मांगी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह परमरीशन ईरान के खिलाफ संभावित इस्तेमाल को ध्यान में रखकर किया गया है।
इसके पीछे दो मुख्य कारण बताए जा रहे हैं-
• प्रेसिजन स्ट्राइक मिसाइलों की कमी
• मौजूदा लॉन्चर सिस्टम्स की सीमित पहुंच
यानी अमेरिका मानता है कि जो हथियार अभी इस्तेमाल हो रहे हैं, वे ईरान के बड़े मिसाइल ठिकानों को पूरी तरह निशाना बनाने के लिए काफी नहीं हैं।
मौजूदा हमले नाकाफी
अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि अभी तक हुए हमले ईरान के बड़े और सुरक्षित सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचाने के लिए पर्याप्त नहीं रहे हैं। इसी बीच Axios की रिपोर्ट में दावा किया गया कि CENTCOM ईरान पर छोटे लेकिन बेहद ताकतवर हमलों की तैयारी कर रहा है। जिनमें टारगेट हो सकते हैं-
• मिसाइल लॉन्च साइट्स
• मिलिट्री इन्फ्रास्ट्रक्चर
• स्ट्रेटजिक सप्लाई नेटवर्क
• सरकारी इमारतें
बातचीत बंद, दोबारा शुरू होगी जंग?
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत ठप पड़ी हुई है। ट्रंप ने फारस की खाड़ी में ईरानी जहाजों की नाकेबंदी जारी रखने का ऐलान किया है। दूसरी तरफ तेहरान का कहना है कि पहले नाकेबंदी हटाओ फिर बातचीत होगी। यहीं से मामला और खतरनाक हो जाता है, क्योंकि दोनों देश अपनी शर्तों से पीछे हटते नहीं दिख रहे।
1 मई की डेडलाइन क्यों अहम है?
8 फरवरी को अमेरिका-इजरायल हमले के बाद ट्रंप ने 2 मार्च को कांग्रेस को सूचना दी थी। इसके बाद 60 दिन की कानूनी उलटी गिनती शुरू हुई। इस हिसाब से 2 मार्च से 1 मई तक 60 दिन पूरे होते हैं और 1 मई डेडलाइन है। अगर इसके बाद कांग्रेस इजाजत नहीं देती है तो अमेरिका को अपनी सेनाएं वापस बुलाना होंगी।
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