VIDEO: वैज्ञानिकों ने पानी से बना दी सोने जैसी धातु, लेकिन चंद सेकंड में बदल गया खेल
नई दिल्ली, 30 जुलाई: कई फिल्मों में आपने देखा होगा कि जादूगर अपने जादू से तरल पदार्थों को ठोस में बदल देता है। इसके अलावा कई लोक कहानियों में भी ऐसे दावे किए गए। वैसे तो ये सब झूठ लगता है, लेकिन अब वैज्ञानिकों ने इस तरह के एक प्रयोग में कामयाबी हासिल की है, जहां पर पानी को सोने जैसी चमकीली धातू में बदल दिया गया। हालांकि ये कारनाम सिर्फ चंद सेकंड के लिए था। (वीडियो-नीचे)

प्राग शहर में बना इतिहास
दरअसल चेक एकेडमी ऑफ साइंसेज के शोधकर्ता लंबे वक्त से तरल पदार्थ से ठोस धातू बनाने की कोशिश कर रहे थे। हाल ही में चेक रिपब्लिक के प्राग शहर में उन्होंने इस प्रयोग को पूरा किया, जहां पानी को सोने जैसे चमकने वाली धातू की पतली परत में बदल दिया गया। ये सब इलेक्ट्रॉन-साझा करने वाली क्षार धातुओं की मदद से हुआ। कुछ ही सेकंड बाद पानी फिर से अपने स्वरूप में आ गया, क्योंकि प्रयोग के लिए उच्च दबाव और तापमान वैज्ञानिक स्थापित नहीं कर पाए थे।

कई ग्रहों पर है इतना दबाव
शोधकर्ताओं के मुताबिक दबाव लागू करके इन्सुलेट सामग्री को धातु बनाना संभव है, लेकिन सबसे बड़ी समस्या ये है कि इसके लिए 48 मेगाबार (4,73,72,316 वायुमंडल से अधिक) दबाव चाहिए। इतना दबाव पृथ्वी पर ज्यादा देर के लिए बनाना असंभव है। शोधकर्ताओं ने बताया कि कई बड़े ग्रह और तारे ऐसे हैं, जहां के आंतरिक भाग में इतना दबाव हमेशा रहता है, ऐसे में वहां पर तरल पदार्थ को आसानी से ठोस में बदला जा सकता है।

अणुओं को कसकर किया पैक
अध्ययन के मुताबिक जब 48 मेगाबार का दबाव वाला इलाका मिल जाएगा, तो वहां पर अणुओं को इतनी कसकर पैक किया जा सकता है कि वे अपने बाहरी इलेक्ट्रॉनों को साझा करना शुरू कर देते हैं, जो बिजली का संचालन कर सकते हैं। वैज्ञानिकों का मत है कि नेपच्यून या यूरेनस ऐसी धात्विक अवस्था में पानी की मेजबानी करते हैं और ये बिजली का संचालन करने में सक्षम सुपरकंडक्टर बन जाते हैं। प्राग में जो शोध हुआ वहां पर पानी को कुछ ही सेकंड के लिए धात्विक अवस्था में रखने में सफलता हासिल हुई।
पानी ही सबसे बेहतरीन तरल
नेचर जर्नल में प्रकाशित शोध में कहा गया है कि इस प्रयोग में दबाव आवश्यकता अनुसार नहीं मिला, लेकिन एक बात साफ हो गई कि तरल को धातु में बदलने के लिए पानी सबसे अच्छा है। पानी का एक चरण जो अत्यधिक उच्च तापमान और दबाव में मौजूद होता है, जहां पानी के अणु उच्च प्रोटॉन चालकता के साथ टूट जाते हैं, लेकिन धातु नहीं। हालांकि, शोधकर्ता मानते हैं कि इलेक्ट्रॉनों के साथ बड़े पैमाने पर डोपिंग द्वारा एक धातु के पानी का घोल तैयार किया जा सकता है।












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