ऑस्ट्रेलिया में इतनी जोरदार बारिश कि सड़क पर निकले मगरमच्छ और सांप
कैनबरा। ऑस्ट्रेलिया का एक हिस्सा इस समय भयंकर बाढ़ का सामना कर रहा है। यहां पर अब तक की खतरनाक बाढ़ आई है और पूरे नॉर्थ ईस्ट ऑस्ट्रेलिया में एयरपोर्ट से लेकर स्कूलों तक में पानी भर गया है। बाढ़ का आलत ऐसा है कि यहां पर सड़कों पर मगरमच्छ और सांप निकल रहे हैं। बाढ़ की वजह से यहां पर पहली बार ऑस्ट्रेलियन मिलिट्री को हालातों से निबटने के लिए तैनात किया गया है। ऑस्ट्रेलिया की मिलिट्री को ऐसे मौकों पर कम ही तैनात किया जाता है। स्कूलों, घरों और एयरपोर्ट तक पर पानी भर गया है और लोगों को यहां से निकाला जा रहा है। सड़कों पर निकले मगरमच्छों की वजह से भी लोगों को अपना घर छोड़कर जाने को मजबूर होना पड़ रहा है।

बांध में पानी बढ़ने से हालात बेकाबू
ऑस्ट्रेलिया का उत्तरी हिस्से में आमतौर पर मॉनसून के मौसम में भारी बारिश होती है। लेकिन हाल ही में यहां पर हुई बारिश काफी असामान्य है और अथॉरिटीज को बारिश के बाद एक्शन में आना पड़ा है। भारी बारिश की वजह से यहां पर ऑस्ट्रेलियन डिफेंस फोर्सेज को सैंडबैग्स प्रयोग करने पड़े और कार्गो व्हीकल तैनात करने पड़े हैं। बारिश इतनी ज्यादा है कि रविवार को अथॉरिटीज को फ्लडगेट्स खोलने पड़े हैं। अथॉरिटीज का कहना है कि बांध में जलस्तर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है और बहाव भी काफी तेज है।
रिहायशी इलाकों में सांप और मगरमच्छ
बाढ़ से सबसे ज्यादा खराब हालात टाउन्सविले में हैं जहां पर कई घर तक डूब गए हैं। यहां के स्थानीय रेडियो जर्नलिस्ट गाबी एलगुड ने कहा, 'मैंने अब तक अपनी जिंदगी में इतना पानी नहीं देखा है। जब आपको लगता है कि अब इससे ज्यादा पानी नहीं आएगा तभी ऐसी बारिश होती है जो रुकने का नाम हीं नहीं लेती है।' कई रिहायशी इलाकों में सांप और मगरमच्छ जैसे जानवरों की वजह से लोगों में डर का माहौल है।
लोगों में डर का माहौल
टाउन्सविले के कई इलाकों में सड़कों पर मगरमच्छों को देखा गया है। करीब 1100 लोगों ने मदद के लिए इमरजेंसी सर्विसेज को कॉल किया है। न्यूज एजेंसी एएफपी के मुताबिक करीब 16,000 लोग बिना बिजली के रहने को मजबूर हैं। उन्हें नहीं मालूम कि कब उनके घर में इलेक्ट्रिसिटी आएगी। करीब 100 किलोमीटर की रफ्तार से चलने वाली हवाओं ने भी हालात मुश्किल कर दिए हैं। करीब 20,000 घरों पर खतरा है।
100 वर्षों में एक बार होने वाली घटना
मौसम विभाग के अधिकारियों की मानें तो यह कोई 20 वर्ष में एक बार होने वाली घटना नहीं है बल्कि 100 वर्षों में एक बार होने वाली घटना है। करीब 1,000 लोगों को इवैक्युएशन सेंटर में रखा गया है।












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