चीन-पाकिस्तान की दोस्ती पर संकट, CPEC का बढ़ रहा है विरोध

नई दिल्ली, 21 अगस्त: पाकिस्तान और चीन की गहरी दोस्ती संकट में पड़ सकती है। पाकिस्तान में चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर का विरोध बढ़ता ही जा रहा है। पिछले एक महीने में ही पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले इलाकों में चीन के नागरिकों पर हमले बढ़ गए हैं। हालात ऐसे हो चुके हैं कि चीन बार-बार पाकिस्तान से अपने नागरिकों की सुरक्षा कड़ी करने को कह रहा है, लेकिन वहां चल रहे चीन के प्रोजेक्ट के खिलाफ लोगों का गुस्सा बढ़ता ही जा रहा है। सीपीईसी पर चीन 600 करोड़ डॉलर का निवेश कर रहा है, इसलिए उसका प्रोजेक्ट से अब हटना मुश्किल है। लेकिन, ग्वादर के लोगों का कहना है कि इस प्रोजेक्ट के चलते उनकी जिंदगी मुश्किलों में आ गई है।

ग्वादर में शुक्रवार को हुआ था आत्मघाती हमला

ग्वादर में शुक्रवार को हुआ था आत्मघाती हमला

पाकिस्तान स्थित चीनी दूतावास ने इस बात की पुष्टि की है कि बलूचिस्तान प्रांत के ग्वादर में हुए आत्मघाती हमले में चाइनीज नागरिक जख्मी हुए हैं। यह हमला शुक्रवार शाम को हुआ था, जिसमें ग्वादर ईस्ट बे एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट पर चीन के इंजीनियरों के खाफिले को निशाना बनाकर हमला किया गया था। इस हमले की जिम्मेदारी बलूचिस्तान लिब्रेशन आर्मी ने ली है, जो कि एक अलगावादी आतंकी संगठन है। इस हमले में दो स्थानीय बच्चे मारे गए हैं, जबकि कई लोग जख्मी हो गए हैं। घायलों में चीन का एक नागरिक भी शामिल है। चीन ने शुक्रवार को ग्वादर में हुए आत्मघाती हमले की कड़ी निंदा की है। ग्वादर में इस तरह का हमला इसलिए अहम है, क्योंकि यहां काफी तादाद में चीन के कर्मचारी मौजूद हैं और ड्रैगन ने प्रोजेक्ट पर बहुत ज्यादा निवेश किया है। चीनी दूतावास ने कहा है कि 'पाकिस्तान से जख्मियों के उचित इलाज करवाने, हमले की पुख्ता जांच करने और साजिशकर्ताओं को सख्त सजा देने की मांग करते हैं।'

चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर का विरोध

चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर का विरोध

दरअसल, 600 करोड़ डॉलर के चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर के खिलाफ स्थानीय स्तर पर विरोध बढ़ता ही जा रहा है। गार्डियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक इसी हफ्ते वहां प्रदर्शनकारियों ने रोड जाम कर दिया था, टायर जलाए थे। वे लोग प्रोजेक्ट के चलते ग्वादर में पानी और बिजली की किल्लत का आरोप लगा रहे हैं, जिससे उनके जीवन पर भयानक असर पड़ने का दावा है। एक स्थानीय नेता फैज निगोरी ने कहा है, 'हम चाइनीज ट्रॉलर और एक महीने से ज्यादा समय से पानी और बिजली की किल्लत के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं और उसका विरोध कर रहे हैं। लेकिन, सरकार ने कभी हमारी मांगों पर ध्यान नहीं दिया। हमने पूर्ण बंद कराया और जिला प्रशासन ने हमपर हमले भी किए थे।' जानकारी के मुताबिक इस कार्रवाई में दो लोग जख्मी हुए थे।

ग्वादर में काफी संख्या में चाइनीज मौजूद हैं

ग्वादर में काफी संख्या में चाइनीज मौजूद हैं

ग्वादर बलूचिस्तान का तटीय शहर है, जो सीपीईसी का आखिरी प्वाइंट है। अरब सागर के तट पर स्थित ग्वादर बंदरगाह चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर के तहत चीन की ओर से विकसित किया रहा है, जो उसके बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट का हिस्सा है। इससे जुड़े विभिन्न प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए ग्वादर और आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर चाइनीज एक्सपर्ट और कर्मचारी मौजूद हैं। लेकिन, पिछले कुछ महीनों में बलूचिस्तान से लेकर कराची तक चीनी नागरिकों पर हमले बढ़ गए हैं। (ऊपर की दो तस्वीरें सौजन्य-विकीपीडिया)

पाकिस्तान में निशाने पर चीन के नागरिक

पाकिस्तान में निशाने पर चीन के नागरिक

शुक्रवार के हमले के बाद से चीन टेंशन में है और उसने पाकिस्तान की सुरक्षा हालात पर चिंता जताई है। उसे पाकिस्तान में मौजूद अपने नागरिकों से कहना पड़ा है कि सतर्क रहें, अपनी सुरक्षा का ख्याल रखें और बेवजह के बाहर न निकलें, साथ ही सभी एहतियाती कदम उठाएं। उधर पाकिस्तान ने कहा है कि वह चीन के नागरिकों की सुरक्षा की तत्काल समीक्षा कर रहा है और उनकी पुख्ता सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। पिछले महीने खैबर पख्तूनख्वा में हुए आतंकवादी हमले में कम से कम 13 लोग मारे गए थे, जिनमें 9 चाइनीज थे। 14 जुलाई को चाइनीज इंजीनियरों और मजदूरों को निर्माणाधीन दासु डैम ले जा रही बस को धमाके से उड़ा दिया गया था, जिसके चलते वह गहरी घाटी में गिर गई थी। इस घटना में पाकिस्तान ने बार-बार बयान बदलने के बाद इसे आंतकी वारदात बताया था। इस बीच पिछले महीने ही कराची में भी चीन के नागरिक पर फायरिंग की गई थी।

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