कोरोना का बार-बार संक्रमण हो सकता है बहुत खतरनाक, बूस्टर लगाने वालों का क्या ? शोध में पता चला
Coronavirus repeat infections: अमेरिका में कोरोना वायरस संक्रमण पर हुई एक रिसर्च का नतीजा बहुत ही भयावह है। पिछले तीन साल में यह आम धारणा बनी है कि एक बार कोविड हो गया और स्वस्थ हो गए तो आगे इसका खतरा कम हो गया। लेकिन, नए शोध के जो नतीजे हैं, इस सोच के ठीक विपरीत हैं। इसमें पाया गया है कि दोबारा-तिबारा संक्रमण होने के साथ ही कई तरह का खतरा कई गुना तक बढ़ सकता है। वैज्ञानिकों ने इस शोध के लिए कोविड मरीजों के बहुत बड़े इलेक्ट्रोनिक मेडिकल डेटाबेस का इस्तेमाल किया है।

हर बार किस्मत दांव पर लगी होती है- रिसर्च
वाशिंगटन पोस्ट में छपी एक खबर के मुताबिक कोरोना वायरस का दोबारा या बार-बार होने वाला संक्रमण काफी खतरनाक साबित हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने एक विस्तृत शोध के बाद यह निष्कर्ष निकाला है। वेटरंस अफेयर्स के सेंट लुइस हेल्थ केयर सिस्टम के रिसर्च एंड डेवलपमेंट के चीफ और इस शोध के एक प्रमुख ऑथर जियाद अल-अली ने कहा है कि कोविड-19 का दूसरा, तीसरा या आगे का संक्रमण उसी तरह की स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है, जैसा पहले से हो सकता है। अली वाशिंगटन यूनिवर्सिटी में क्लिनिकल एपिडेमियोलॉजिस्ट भी हैं और उनका कहना है, 'हो सकता है कि आप पहले बुलेट से बच निकले हों, लेकिन हर बार जब आपको संक्रमण होता है तो आपकी किस्मत फिर से दांव पर लगी होती है।'

हर बार के संक्रमण से ज्यादा गंभीर बीमारी का खतरा-शोध
यह शोध पत्र जर्नल नेचर मेडिसिन में गुरुवार को प्रकाश हुआ है, जिसके लिए वेटरंस अफेयर्स के मेडिकल रिकॉर्ड का इस्तेमाल किया गया है। शोध में यह भी पता चला है कि जिन लोगों को दोबारा-तिबारा संक्रमण हुआ है, उनमें लंबे समय वाला कोविड ज्यादा हुआ है और वह उनके मुकाबले ज्यादा बीमार हो गए या उनके अंगों के साथ ज्यादा परेशानियां हुई हैं, जिन्हें दोबारा इंफेक्शन नहीं हुआ। यह निष्कर्ष उन सबके लिए समान है, जिन्होंने वैक्सीन नहीं ली है, वैक्सीन लगवाई है और बूस्टर की खुराक भी ले रखी है।

ज्यादा बार संक्रमण होने पर मौत का खतरा दोगुना-शोध
इस रिसर्च के लिए 58 लाख मरीजों के मेडिकल रिकॉर्ड की पड़ताल की गई है। इनमें से 4,43,588 को सिर्फ एक बार इंफेक्शन हुआ और 40,947 मरीजों को दो बार या उससे भी अधिक पर कोविड संक्रमण हुआ था। पहले और दूसरे संक्रमण के बीच का औसत समय 191 दिनों का था। अब आगे के आंकड़े डराने वाले हैं। इस शोध के मुताबिक जिन लोगों को सिर्फ एक बार कोरोना हुआ था, उनकी तुलना में जिन्हें फिर से संक्रमण हुआ था, उनमें मौत का जोखिम दोगुना, अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति तीन गुना, लॉन्ग कोविड का खतरा दोगुना, हृदय रोग संबंधी दिक्कतें तीन गुना और खून जमने की परेशानी और थकान होने की समस्या दो गुना ज्यादा पाया गया।

कोविड की शुरुआत के तीन साल होने वाले हैं
वैसे चीन के वुहान से कोरोना वायरस का संक्रमण शुरू हुए लगभग तीन साल होने वाले हैं। जब इसकी शुरुआत हुई थी तो इस वायरस के खिलाफ सबका इम्यून सिस्टम एक तरह का था।आज की तारीख में कई लोगों को संक्रमण हो चुका है, कई लोग अलग-अलग वेरिएंट से संक्रमित हो चुके हैं, काफी तादाद में लोगों को अलग-अलग कंपनी की वैक्सीन लग चुकी है और ढेरों ने बूस्टर डोज भी लिया है। यह विविधता पूरी दुनिया में देखी जा सकती है। मतलब, पहले इंफेक्शन का दूसरे संक्रमण पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इसका सामान्य जवाब नहीं दिया जा सकता। जहां तक अमेरिका का सवाल है तो वहां के 80 फीसदी लोग कम से कम एक बार कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं।

कई वैज्ञानिक नए शोध से असहमत
हालांकि, कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी की संक्रामक-रोग विशेषज्ञ मोनिका गांधी ने कहा है कि यह ध्यान में रखना जरूरी है कि इलेक्ट्रोनिक मेडिकल रिकॉर्ड के इस्तेमाल से किया गया रिसर्च 'इस संबंध को विश्वसनीयता के साथ भविष्यवाणी नहीं करता।' उन्होंने उन 26 शोधों का हवाला दिया है, जिसके अनुसार बार-बार संक्रमण होने से समय के साथ यह कम गंभीर होता चला जाता है। उधर कतर में हुई एक रिसर्च का भी ऐसा ही अनुमान है। हालांकि, इन रिसर्च की अभी तक वैज्ञानिकों के द्वारा समीक्षा नहीं की गई है।












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