अब बोलने से भी कोरोना वायरस के फैलने का खतरा, वैज्ञानिकों ने रिसर्च के बाद किया दावा
वॉशिंगटन। अभी तक इस बात पर बहस बनी हुई है कि आखिर जानलेवा कोविड-19 किस तरह से लोगों में फैल रहा है। अब एक नई रिसर्च हुई है जिसके बाद वैज्ञानकों ने दावा किया है बोलने से भी कोरोना वायरस फैल सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है किसी व्यक्ति की लार में 1,000 से ज्यादा ड्रॉपलेट्स होती है जो आसानी से कोरोना वायरस की वाहक हो सकती हैं।

10 मिनट तक रह सकता है वायरस
इस रिसर्च के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति काफी करीब है और एक मिनट तक तेज आवाज में बात करता है तो उसकी लार से निकला वायरस आठ मिनट तक उस जगह पर रह सकता है।न्यूज एजेंसी एएफपी के मुताबिक किसी के बोलने से पैदा हुईं माइक्रोड्रॉपलेट्स हवा में 10 मिनट तक बरकरार रह सकता है। रिसर्च को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड किडनी डिजीज (एनआईडीडीके) की तरफ से अंजाम दिया गया है। साइंटिस्ट्स ने एक व्यक्ति को डब्बेनुमा कमरे में बंद कर दिया था। इसके बाद से 25 सेकेंड्स तक 'स्टे हेल्दी' दोहराना था। इसके बाद लेसर के जरिए ड्रॉपलेट्स को देखा गया। वैज्ञानिक इन्हें आसानी से देख सकते थे और इनकी गिनती कर सकते थे। हवा में ये करीब 12 मिनट तक थीं। बुधवार को आई यह स्टडी अमेरिका के जर्नल प्रोसिडिंग्स ऑफ नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में पब्लिश हुई है।
हवा से भी वायरस फैलने का डर
पिछले माह आई एक रिसर्च में वैज्ञानिकों ने पता लगाया था कि कोरोना वायरस मरीज से हवा में चार मीटर यानी 13 फीट तक ट्रांसमिट हो सकता है। लोगों को दूसरे व्यक्ति से दो मीटर की दूरी पर रहने की सलाह दी जा रही है और अब हवा में भी वायरस मौजूद है तो यह दूरी उससे दोगुना ज्यादा है। चीनी रिसर्चर्स की तरफ से हुई जांच के नतीजे अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के इमरजिंग इंफेक्शियस डिजीज में पब्लिश हुए हैं। इस रिसर्च के शुरुआती नतीजों में इस बात की पुष्टि हुई है। वैज्ञानिकों की तरफ से इस बात की चेतावनी भी दी गई है कि यह जरूरी नहीं है कि इतनी दूरी पर मिला वायरस संक्रमण फैलाने वाला हो।












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