लॉकडाउन: लोगों के घरों में रहने से धरती पर शोर का स्तर हुआ कम, हवा-पानी में भी सुधार
लंदन। दुनियाभर में कोरोना वायरस (कोविड-19) के चलते लॉकडाउन लगा हुआ है, जिसके चलते लोग अपने-अपने घरों में बंद हैं। इससे ना केवल हवा और नदियां साफ हो रही हैं, बल्कि धरती की सतह पर मौजूद साउंड वाइब्रेशन में कमी भी महसूस की गई है। इसे सीसमिक नॉइज भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए हो रहा है कि क्योंकि लॉकडाउन के कारण मानव गतिविधि कम हो गई है। सभी बड़े शहरों में लोगों का आना-जाना, मिलना-जुलना बंद है।

धरती पर शोर का स्तर कम हुआ
जर्नल नेचर में छपे एक लेख के अनुसार, इससे डिटेक्टरों को छोटे भूकंपों का पता लगाने और ज्वालामुखी गतिविधि सहित अन्य भूकंपीय घटनाओं की निगरानी के प्रयासों को बढ़ावा देने में मदद मिल रही है। सीसमोमीटर्स से जुटाए गए आंकड़ों से पता चला है कि मानवीय गतिविधियों में कमी आने के साथ ही धरती पर शोर का स्तर कम हुआ है। बेल्जियम के ब्रसेल्स में रॉयल ऑब्जर्वेटरी में सीसमोलॉजिस्ट थॉमस जैकॉक के अनुसार, इस तरह के शोर में कमी आमतौर पर केवल क्रिसमस के आसपास ही अनुभव की जाती है।

मानवीय शोर में 30 फीसदी की कमी
बेल्जियम में वैज्ञानिकों ने लॉकडाउन शुरू होने के बाद से व्यापक मानवीय शोर की मात्रा में कम से कम 30 फीसदी की कमी दर्ज की है। लेख के अनुसार, मौजूदा गिरावट ने लैब के उपकरण की संवेदनशीलता को बढ़ाया है, जिससे शोर के बराबर वाली उच्च तरंगों की ध्वनि क्षमता का पता लगाने में सुधार हुआ है। हालांकि, सभी सीसमिक मॉनिटरिंग स्टेशनों में एक जैसा प्रभाव नहीं दिखाई दिया है, ऐसा केवल ब्रसेल्स में महसूस हुआ है।

कई स्टेशन दूरस्थ क्षेत्रों में स्थित हैं
न्यू मैक्सिको में अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की एमिली वॉलिन ने कहा, मानव शोर से बचने के लिए कई स्टेशन दूरस्थ क्षेत्रों में स्थित हैं। इन्हें उच्च-आवृत्ति वाले शोर के स्तर में छोटी कमी या कोई बदलाव नहीं देखना चाहिए। विशेषज्ञों के मुताबिक, मानव गतिविधियों के साथ और उनके बिना भूकंप का पता लगाने में हम सक्षम हुए हैं। कई शोर-शराबे वाले स्थान तय किए हैं, जहां कम और ज्यादा शोर मौजूद था। शोर सिर्फ इंसान ही नहीं करते, बल्कि हवाएं और महासागरों से भी शोर उत्पन्न होता है। इस तरह प्राकृतिक ध्वनियों की अलग केटेगरी हो सकती हैं।












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