दक्षिण अफ्रीका में रॉकेट की रफ्तार से बढ़े कोरोना के मामले, 5 साल से छोटे बच्चों पर ओमिक्रॉन का कहर

दक्षिण अफ्रीका में 9 प्रांत हैं, जिनमें से सात प्रांतों में कोरोना वायरस के मामलों में काफी ज्यादा तेजी दर्ज की गई है। वहीं, छोटे बच्चे भी कोरोना वायरस का शिकार काफी तेजी से बनते जा रहे हैं।

जोहानिसबर्ग, दिसंबर 04: कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वेरिएंट ने पूरी दुनिया को दहशत में डाल रखा है और दक्षिण अफ्रीका में रॉकेट की रफ्तार से कोरोना वायरस के मामले बढे़ हैं। और सबसे टेंशन की बात ये है कि, ओमिक्रॉन वेरिएंट की चपेट में बच्चे भी आ रहे हैं। दक्षिण अफ्रीका में शुक्रवार को 16 हजार से ज्यादा मामले सामने आए हैं और 25 लोगों की मौत हुई है। लिहाजा, अब जबकि पूरी दुनिया में ओमिक्रॉन वेरिएंट फैल चुका है, तो जानना जरूरी हो जाता है कि, आखिर ओमिक्रॉन वेरिएंट से छोटे बच्चों को कितना खतरा है?

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    ओमिक्रॉन से बच्चों को खतरा

    ओमिक्रॉन से बच्चों को खतरा

    दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने छोटे बच्चों को लेकर काफी चिंता व्यक्त की है और पैरेंट्स से छोटे बच्चों को सुरक्षित रखने की अपील की है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कम्युनिकेबल डिजीज (एनआईसीडी) की डॉ वसीला जसत ने एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि, "हमने हमेशा देखा है कि अतीत में बच्चों को बहुत अधिक अस्पतालों में भर्ती नहीं करना पड़ा, लेकिन तीसरी लहर में हमने पांच साल से कम उम्र के बच्चों और 15 से 19 साल के किशोरों को काफी संख्या में अस्पतालों में भर्ती होते हुए देखा है।'' डॉ. वसीला जसत ने कहा कि, "अब, इस चौथी लहर की शुरुआत में हम सभी आयु समूह के लोगों को कोरोना के नये वेरिएंट से संक्रमित होता हुए देख रहे हैं, खासकर 5 साल से छोटे बच्चे काफी ज्यादा वायरस के शिकार हो रहे हैं"।

    ओमिक्रॉन से बच्चों को बचाना जरूरी

    ओमिक्रॉन से बच्चों को बचाना जरूरी

    दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि, "जैसा कि हम आशंका जता रहे थे कि, बच्चे भी पीड़ित हो रहे हैं। हालांकि, अभी तक ज्यादा मामले सामने नहीं आए हैं लेकिन पांच साल से कम उम्र के बच्चों का कोरोना पीड़ित होना कुल मामलों में दूसरे नंबर पर पहुंच चुका है। अभी तक 60 से ज्यादा बच्चों को पीड़ित पाया गया है।'' डॉ. वसीला जसत ने कहा कि, "अब हम जो रुझान देख रहे हैं, वह पांच साल से कम उम्र के बच्चों में अस्पताल में दाखिले की संख्या में इजाफा हो रहा है।" वहीं, एनआईसीडी के डॉ मिशेल ग्रोम ने कहा कि हम ज्यादा से ज्यादा जानकारी जुटाने के लिए लगातार रिसर्च कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि, "ओमिक्रॉन वेरिएंट के लहर की ये काफी शुरूआती समय है, लिहाजा अभी पुख्ता तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता है। हम हर उम्रवर्ग के लोगों को निगरानी कर रहे हैं।''

    बच्चों को सुरक्षित करने की जरूरत

    बच्चों को सुरक्षित करने की जरूरत

    डॉ. ग्रोम ने कहा कि, "हमें बच्चों को बचाने के लिए कोशिशें तेज करनी होगी और बाल चिकित्सालय में बिस्तरों की संख्या बढ़ानी होगी और कर्मचारियों की संख्या में भी इजाफा करना होगा।'' दक्षिण अफ्रीका के गौतेंग प्रांत में स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी डॉ. नटसाकिसी मालुलेके, जहां से कोरोना वायरस के मामले सबसे ज्यादा आ रहे हैं, उन्होंने भी बच्चों में संक्रमण फैलने को लेकर चिंता जताई है। मलुलेके ने कहा कि, "कम उम्र के समूहों के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं में संक्रमण बढ़ने की घटना की जांच की जा रही है।" उन्होंने कहा कि, "हम उम्मीद कर रहे हैं कि आने वाले हफ्तों में हम यह भी कारण बता पाएंगे कि मरीजों के इस विशेष समूह में संक्रमण क्यों बढ़ रहा है"।

    7 प्रांतों में रॉकेट की रफ्तार से संक्रमण बढ़ा

    7 प्रांतों में रॉकेट की रफ्तार से संक्रमण बढ़ा

    आपको बता दें कि, दक्षिण अफ्रीका में 9 प्रांत हैं, जिनमें से सात प्रांतों में कोरोना वायरस के मामलों में काफी ज्यादा तेजी जर्ज की गई है। दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य मंत्री जो फाहला ने ब्रीफिंग में कहा कि दक्षिण अफ्रीका के नौ प्रांतों में से सात में संक्रमण और कोरोना पॉजिटिविटी दर बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि, ''केवल फ्री स्टेट और नॉर्दर्न केप वर्तमान में कम संख्या और कम पॉजिटिविटी दर दिखा रहे हैं। हालांकि वहां भी पॉजिटिविटी दर तीन से पांच फीसदी है।'' उन्होंने कहा कि, अभी तक हमारे पासे ज्यादा डेटा नहीं है और हम संक्रमण की भयावहता का भी अंदाजा नहीं लगा पा रहे हैं। वहीं, जिन लोगों ने वैक्सीन ले रखी है, उनमें हल्के लक्षण हैं, लेकिन जिन लोगों ने टीका नहीं लिया है और 40 साल से कम उम्र के युवाओं को काफी ज्यादा संख्या में अस्पतालों में भर्ती होना पड़ रहा है।

    इजरायली डॉक्टर ने दी चेतावनी

    इजरायली डॉक्टर ने दी चेतावनी

    इजरायल के डॉक्टर एलाद मौरो दुनिया के अलग-अलग देशों में कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वेरिएंट से संक्रमित हुए शुरुआती मरीजों में से एक हैं। डॉक्टर एलाद मौरो ने 'द गार्जियन' को दिए एक इंटरव्यू में दावा किया है कि वो इस नए वेरिएंट की चपेट में लंदन में आए थे। डॉक्टर एलाद मौरो ने बताया, 'मेडिकल कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने के बाद मैं 23 नवंबर को इजरायल लौटा और अगले एक-दो दिन में ही मुझे कोरोना वायरस के लक्षण महसूस होने लगे। मैंने टेस्ट कराया और 27 नवंबर को मेरी कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आई। माना जाता है कि कोरोना वायरस से संक्रमित होने के 14 दिनों के भीतर लक्षण महसूस होते हैं, लेकिन आमतौर पर लक्षण दिखने की शुरुआत पांचवें दिन से हो जाती है।'

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