पुलित्जर प्राइज विजेता कॉलमनिस्ट चार्ल्स क्राउथमर का देहांत, दो हफ्ते पहले ही कर दी थी अपनी मृत्यु की घोषणा
नई दिल्ली। पुलित्जर प्राइज विजेता कॉलमनिस्ट चार्ल्स क्राउथमर की 68 वर्ष की आयु में मृत्यु हो गई है। उनका साप्ताहिक कॉलम दुनियाभर के 400 से अधिक पब्लिकेशन में छपता था। दो हफ्ते पहले ही चार्ल्स ने इस बात की घोषणा की थी कि डॉक्टरों ने उन्हें अब जीने के लिए सिर्फ दो हफ्ते का समय दिया है। उन्होंने अपने हाथ से ही एक बयान लिखा था ,जिसमे उन्होंने कहा था कि यह आखिरी फैसला, मेरी लड़ाई अब खत्म है।

मरने से पहले लिखा पत्र
चार्ल्स ने कहा था कि वह पिछले एक साल से वह पेट में कैंसर के ऑपरेशन से लड़ रहे हैं और लगातार अपने स्वास्थ्य को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन हाल के टेस्ट ने दिखाया है कि उनका कैंसर एक बार फिर से वापस आ गया है और काफी तेजी से फैल रहा है। चार्ल्स का पिछले वर्ष ही कैंसर का ऑपरेशन हुआ था। उन्होंने अपने पत्र में लिखा था कि मैं अपने डॉक्टर का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं, जिन्होंने काफी शानदार प्रयास किया है, मेरे दोस्त जिन्होंने मुझे जीवनभर काफी शानदार पल दिए, जिनका साथ मेरे खराब समय में लगातार रहा। साथ ही वॉशिंगटन पोस्टर, पोस्ट फॉक्स, फॉक्स न्यूजस क्राउन पब्लिशिग के मेरे सहयोगियों का भी मैं शुक्रिया अदा करना चाहता हूं।
युवावस्था में हुआ था एक्सिडेंट
आपको बता दें कि चार्ल्स का जन्म 13 मार्च 1950 को न्यूयॉर्क शहर में हुआ था, काफी युवावस्था में ही उनका परिवार मॉटरीयल चला गया था, जिसके बाद उन्होंने मैकगिल विश्वविद्यालय से अपनी पढ़ाई पूरी की और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से मेडिकल की डिग्री हासिल की। पढ़ाई के पहले वर्ष में उन्होंने हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में चार्ल्स के कमर के नीचे के शरीर को लकवा मार गया था, जब उनका एक्सिडेंट हो गया था।
एक साल से लिखना बंद कर दिया था
1980 में चार्ल्स ने बतौर राजनीतिक कॉलमनिस्ट अपना कैरियर शुरू किया और कई बड़े पब्लिशिंग हाउस के लिए लिखने लगे। अगस्त 2017 को कैंसर से लड़ाई लड़ने की वजह से उन्होंने लिखना शुरू कर दिया था और फॉक्स न्यूज में बतौर कॉट्रिब्यूटर वह अपनी सेवाएं दे रहे थे।












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