भारत घूमकर गये आलोचक CNN पत्रकार फरीद जकारिया के बदले सुर, अमेरिकी मीडिया का 'मन परिवर्तन'?
अमेरिकी मीडिया ने अकसर भारत की आलोचना की है, खासकर धार्मिक उत्पीड़न को लेकर भारत को टारगेट किया है। लेकिन, कई जर्नलिस्ट, जो भारत घुमकर गये हैं, उनके सुर पूरी तरह से बदल चुके हैं।

Fareed Zakaria on India: भारत को लेकर क्या अचानकर अमेरिकी मीडिया का मन परिवर्तन होने लगा है? ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं, क्योंकि पिछले कुछ महीनों से अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में भारत को दुनिया का भविष्य बताया जा रहा है और मोदी सरकार की तारीफ के कसीदे पढ़े जा रहे हैं।
पिछले दिनों भारत घुमकर गये सीएनएन के वरिष्ठ पत्रकार और भारत के बड़े आलोचक रहे फरीद जकारिया ने अपनी भारत यात्रा को लेकर चौंकाने वाली बातें कही हैं। चौंकाने वाली बातें इसलिए, क्योंकि अमूमन अमेरिकन पत्रकारों के मुंह से भारत की तारीफ कम ही सुनी जाती है।
फरीद जकारिया ने सीएनएन पर अपनी भारत यात्रा के बारे में एक टिप्पणी की है, जिसमें उन्होंने खुलकर भारत की तारीफ की है। हालांकि, आखिर में उन्होंने 'धार्मिक उत्पीड़न' की बात कहकर ये सबूत भी दे दिया, कि भारत को लेकर पूरी तरह से मन परिवर्तन होने में अभी काफी वक्त लगेगा।
फरीद जकारिया ने क्या कहा?
CNN के जाने-माने स्तंभकार फरीद जकारिया पिछले हफ्ते भारत का दौरा किया है और उन्होंने कहा है, कि एक ऐसे समय में, जब अमेरिका और यूरोपीय देश बढ़ती महंगाई और संभावित मंदी की आशंकाओं को लेकर काफी चिंतिंत हैं, उस समय भारत के लोग अपने भविष्य को लेकर काफी उत्साहित हैं।
द वाशिंगटन पोस्ट में प्रकाशित एक ओपिनियन पीस में, जकारिया ने लिखा है, कि वह इस बात से हैरान हैं, कि दुनिया के अधिकांश हिस्सों की तुलना में भारत में लोगों का मिजाज कितना अलग है।
उन्होंने कहा, कि भारत अब इस ग्रह पर सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन गया है, जिसके इस साल 5.9 प्रतिशत के साथ सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बनने का अनुमान है।
ओपिनियन पीस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हवाले से कहा गया है, कि जिन्होंने हाल ही में कहा था, "भारत का समय आ गया है।" हालांकि, फरीद जकारिया ने कहा, कि उन्होंने एक पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री के मुंह से भी 2006 में ऐसी बातें सुनी थीं।
उन्होंने कहा, कि साल 2006 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दावोस में विश्व आर्थिक मंच पर "अतुल्य भारत!" और "दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता मुक्त बाजार लोकतंत्र" वाला देश बताया था। फरीद जकारिया ने कहा, कि उस वक्त भारत की विकास की रफ्तार 9 प्रतिशत था, यानि अभी से भी ज्यादा, तो क्या प्रधानमंत्री मोदी का यह कहना, कि 'भारत का समय आ गया है', क्या पूरी तरह से सही माना जाएगा?
उन्होंने यह भी याद किया, कि उस समय के भारतीय व्यापार मंत्री कमलनाथ ने भविष्यवाणी की थी, कि भारतीय अर्थव्यवस्था जल्द ही चीन से आगे निकल जाएगी, लेकिन यह उस तरह से काम नहीं कर सका। चीनी अर्थव्यवस्था अब भारत के आकार का लगभग पांच गुना हो चुका है।
हालांकि, फरीद जकारिया ने अपने लेख में कहा, कि उन्होंने भारत की जो यात्रा की है, वो काफी उत्साहित करने वाला है और वो काफी उत्साहित होकर भारत से वापस अमेरिका लौटे हैं।
'तेजी से विकास कर रहा है भारत'
फरीद जकारिया ने लिखा है, कि 2000 के दशक के बाद भारत ने लगातार प्रगति करना जारी रखा है और पिछले 20 सालों में चीन के बाद दूसरी सबसे तेजी से बढ़ने वाला अर्थव्यवस्था बना हुआ है। उन्होंने कहा, कि हाल के सालों में कई ऐसी बातें हुई हैं, जिसने भारत के विकास की रफ्तार को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।
फरीद जकारिया ने मोदी सरकार के आधार कार्ड पॉलिसी की जमकर तारीफ की है। उन्होंने आधार कार्ड को 'क्रांति' करार दिया है और कहा है, कि आधार कार्ड प्रत्येक भारतीय को एक अद्वितीय 12-अंकीय आईडी नंबर देता है, जो उंगलियों के निशान या आंख की पुतली द्वारा सत्यापित किया जा सकता है और आधार कार्ड के जरिए. फौरन बैंक अकाउंट खोले जा रहे हैं। इसके साथ ही, भ्रष्टाचार को कम करने में आधार ने अभूतपूर्व भूमिका निभाई है।
आधार के अलावा उन्होंने, जियो को भारत में इंटरनेट क्रांति लाने का अगुवा बताया है। उन्होंने रिलायंस प्रमुख मुकेश अंबानी की दूरसंचार सेवा के माध्यम से स्मार्टफोन और टैरिफ योजनाओं की सस्ती पेशकश का जिक्रक किया है और कहा है, कि अब भारत में 70 करोड़ से ज्यादा लोग हाई स्पीड इंटरनेट सेवा का इस्तेमाल कर रहे हैं। और 2015 में जो भारत, इंटरनेट इस्तेमाल करने के मामले में 122वें स्थान पर था, वो अब अमेरिका और चीन को संयुक्त रूप से मिलाकर जितना डेटा होता है, उतने डेटा का अकेले इस्तेमाल कर रहा है।
भारत में इन्फ्रास्ट्रक्चर क्रांति
फरीद जकारिया ने इसके अलावा इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को भारत की तीसरी क्रांति करार दिया है। उन्होंने कहा, कि भारत में सड़कों, हवाई अड्डों, ट्रेन स्टेशनों और अन्य परियोजनाओं के निर्माण में विस्फोट खर्च किया गया है। वित्तीय वर्ष 2014 के बाद से सरकारी पूंजीगत व्यय पांच गुना बढ़ गया है, और राष्ट्रीय राजमार्गों का औसत निर्माण मोटे तौर पर दोगुना हो गया है, वहीं बंदरगाहों की क्षमता और हवाई अड्डों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है।
उन्होंने कहा, ये तीन क्रांतियां इस बार भारत को सही मायने में बदल सकती हैं। इसके अलावा, जकारिया के लेख में आधार के निर्माता नंदन नीलेकणि का भी उल्लेख है।
उन्होंने कहा, कि रोजगार देने के लिए चीन ने भारी संख्या में फैक्ट्रियों का निर्माण किया था, लेकिन भारत का मॉडल दूसरा है। भारत में एक करोड़ लोगों को छोटे-छोटे व्यवसाय के लिए कर्ज दिया गया है, ताकि वो छोटे छोटे व्यवसायी, दो या तीन लोगों को रोजगार दे सके, जिससे 2 करोड़ से ज्यादा नई नौकरियों का निर्माण होगा। इसके अलावा फरीद ने भारत में काम के क्वालिटी को लेकर भी अपने ब्लॉग में तारीफ की है।
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