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लीबिया में भीषण गृहयुद्ध शुरू होने की आशंका, हिंसा में अब तक 32 की मौत, 159 घायल

''कई इलाकों में स्थिति अब सुधार हुआ है और शांति लौटी है, लेकिन यहां के लोगों को अब भी डर है, कि लीबिया पूर्ण पैमाने पर संघर्ष के कगार पर फिर से आ सकता है।”

त्रिपोली, अगस्त 28: सालों से अशांत रहा लीबिया एक बार फिर से गृहयुद्ध की तरफ बढ़ चला है और देश की राजधानी त्रिपोली में भारी हिंसा हो रही है और अब तक 32 लोगों की हत्या की जा चुकी है और 150 से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं। लीबिया में प्रतिद्वंदी सरकारों द्वारा समर्थित मिलिशिया के बीच ये संघर्ष हो रहा है, जो काफी हिंसक हो चुका है और शनिवार को राजधानी त्रिपोली की स्थिति पिछले दो सालों में सबसे खराब हो गई थी। अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, आशंका जताई जा रही है, कि देश काफी तेजी से गृहयुद्ध की तरफ बढ़ रहा है और एक बार फिर से देश में गृहयुद्ध शुरू हो सकता है।

कैसे भड़की त्रिपोली में हिंसा?

कैसे भड़की त्रिपोली में हिंसा?

रिपोर्ट के मुताबिक, एक कॉमेडियन मुस्तफा बराका की हत्या के बाद तनाव में हिंसा का रूप ले लिया और अलग अलग मिलिशिया ग्रुप आपस में भड़ गये। कॉमेडियन मुस्तफा बराका सोशल मीडिया पर देश की खराब स्थिति, मिलिशिया और भ्रष्टाचार को लेकर लगातार व्यंग कसते रहते थे, जिसके बाद उनकी छाती में गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई। आपातकालीन सेवा के प्रवक्ता मालेक मेरसेट ने कहा कि, बराका की छाती में गोली लगने से मौत हो गई। मेरसेट ने कहा कि, आपातकालीन सेवाएं अभी भी घायलों और लड़ाई में फंसे नागरिकों को निकालने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने कहा कि, अलग अलग हिस्सों में अभी भी लड़ाई चल रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि, अब तक 140 घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिनकी संख्या में भारी इजाफा हो सकता है, वहीं 64 परिवारों को लड़ाई के क्षेत्र से बाहर निकाला गया है। उन्होंने कहा कि, राजधानी में अस्पतालों और चिकित्सा केंद्रों पर गोलाबारी की गई है और एम्बुलेंस टीमों को नागरिकों को निकालने से रोक दिया गया, जो कि "युद्ध अपराध" है।

फिर से संघर्ष में फंसेगा लीबिया?

फिर से संघर्ष में फंसेगा लीबिया?

अलजजीरा की संवाददाता मलिक ट्रेना ने शनिवार को अपनी रिपोर्ट में कहा है कि, ''कई इलाकों में स्थिति अब सुधार हुआ है और शांति लौटी है, लेकिन यहां के लोगों को अब भी डर है, कि लीबिया पूर्ण पैमाने पर संघर्ष के कगार पर फिर से आ सकता है।" आपको बता दें कि, लीबिया में सत्ता के लिए ही ये संघर्ष हो रहा है और सरकार के समानांतर एक और पक्ष अपनी सरकार होने का दावा करती है और दोनों पक्ष अलग अलग क्षेत्रीय मिलिशिया को समर्थन करती हैं। त्रिपोली में जो सरकार है, उसे अब्दुलहमीद अल-दबीबा चला रहे हैं और उनकी सरकार का नाम 'गवर्नमेंट ऑफ नेशनल यूनिटी' है और उनके प्रतिद्वंदी में जो प्रशासन बनाया गया है, उसका नेतृत्व फाथी बाशागा कर रहे है, जिन्हें देश के पूर्वी हिस्से की संसद का समर्थन प्राप्त है और अब दोनों प्रतिद्वंदी सरकारों के बीच झड़प होती रहती है।

शांति वार्ता का नहीं निकलता समाधान

शांति वार्ता का नहीं निकलता समाधान

संयुक्त राष्ट्र भी लंबे वक्त से लीबिया में एक्टिव दोनों सरकारी गुटों के बीच शांति समाधान करवाने की कोशिश में है, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली है। संयुक्त राष्ट्र ने पहले दौर की हिंसा के बाद अब्दुलहमीद अल-दबीबा के नेतृत्व में जीएनयू प्रशासन का गठन किया था और कहा जा रहा है, कि अभी जो हिंसा राजधानी त्रिपोली में भड़की है, उसके पीछे दूसरे प्रशासन फाथी बाशागा के समर्थित मिलिशिया गुट की तरफ से फायरिंग किया जाना बताया जा रहा है। वहीं, आरोप लग रहे हैं, कि फाथी बाशागा और उनका गुट शांति प्रक्रिया से पीछे हट रहा है।

फाथी बाशागा को किसका समर्थन

फाथी बाशागा को किसका समर्थन

फाथी बाशागा को देश की संसद का समर्थन प्राप्त है और उन्हें देश के पूर्व में स्थिति ताकतवर सैन्य खलीफा हफ्तार का भी समर्थन प्राप्त है। बाशागा का कहना है कि जीएनयू का जनादेश समाप्त हो गया है। लेकिन, त्रिपोली से सरकार चला रहे अब्दुलहमीद अल-दबीबा ने अभी तक सत्ता को दूसरे पक्ष को नहीं सौपा है। अब्दुलहमीद अल-दबीबा का कहना है कि, वो केवल एक चुनी हुई सरकार को ही सत्ता सौंपेगे। बाशागा के प्रशासन ने एक बयान में कहा कि, उसने कभी भी वार्ता को खारिज नहीं किया है और दबेबा ने अपने स्वयं के प्रस्तावों को खारिज कर दिया है। इसने सीधे तौर पर इस दावे का जवाब नहीं दिया कि वह भी झड़पों से जुड़ा है।

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