दावा- कोरोना के खिलाफ 'अमृत' है वैक्सीन, इन प्राकृतिक आपदाओं से मौत का खतरा कहीं ज्यादा
वाशिंगटन, 10 फरवरी। कोरोना वायरस के खिलाफ दुनिया पिछले दो वर्षों से भी अधिक समय से जंग लड़ रही है। अभी भी ये महामारी कई लोगों को काल का ग्रास बना रही है। हालांकि कोविड-19 वैक्सीन आने के बाद मरीजों की मौत की संख्या में कमी जरूर आई है लेकिन अभी भी कुछ लोग हैं जो टीका लगवाने से परहेज कर रहे हैं। ऐसे लोगों को अमेरिका से सामने आए एक रिसर्च के नतीजों के बारे में जानना बेहद आवश्यक है। रिसर्च के मुताबिक कोरोना वायरस के खिलाफ वैक्सीन किसी 'अमृत' से कम नहीं है।

जानिए, कोरोना के खिलाफ क्यों 'अमृत' है वैक्सीन?
हां, ये सच है कि वैक्सीन की दोनों डोज लेने के बाद भी कोरोना वायरस का संक्रमण हो सकता है, लेकिन बीमारी के बाद होने वाली गंभीर स्वास्थ्य स्थिति से जरूर बचा जा सकता है। अमेरिकी हेल्थ एजेंसी सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) द्वारा की गई एक रिसर्च में इस बात का खुलासा किया गया है। सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक वैज्ञानिकों ने जांच में पाया कि वैक्सीन लगवा चुके लोगों में कोरोना वायरस से होने वाली मौत का खतरा न के बराबर हो जाता है।

1228664 लोगों पर वैक्सीनेशन के बाद हुई रिसर्च
अगर आपने अभी तक वैक्सीन की दोनों डोज नहीं ली है तो अब ज्यादा देर नहीं करनी चाहिए। वैज्ञानिकों ने रिसर्च के नतीजे तक पहुंचने के लिए अमेरिका के 1228664 लोगों की हेल्थ को ट्रैक किया, यह स्टडी उस समय की गई जब देश में कोरोना का खरतनाक डेल्टा वेरिएंट तबाही मचा रहा था। गौरतलब है कि दुनिया में कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाला देश अमेरिका है। यही वजह है कि वहां वैक्सीन के लिए सरकार ने जल्द से जल्द जरूरी कदम उठाए।

11 महीने तक किया गया लोगों को ट्रैक
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक की गई स्टडी में 12 लाख से अधिक लोगों को दिसंबर 2020 से अक्टूबर 2021 तक ट्रैक किया गया। इन सभी लोगों ने इसी समय अंतराल के बीच कोरोना वैक्सीन की दोनों खुराकें ली थीं। स्टडी में जो नतीजे सामने आए उससे वैज्ञानिकों को बड़ी राहत मिली है। रिपोर्ट के मुताबिक ट्रैक किए जा रहे लोगों में से 2256 लोगों को फिर से कोरोना वायरस का संक्रमण हुआ। इनमें से 189 लोग की हालत गंभीर स्थिति तक पहुंच गई थी।

वैक्सीनेशन के बाद पहले से हुई गंभीर बीमारियों के चलते मौत
स्टडी में पाया गया कि 189 गंभीर मरीजों में से 36 लोगों की जान गई, जबकि अन्य की जान बच गई। गौर करने वाली बात ये है कि जिन 36 लोगों की इस दौरान मौत हुई उनमें से 28 लोग ऐसे थे जो पहले से चार या उससे ज्यादा गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। इनमें डायबिटीज, किडनी की बीमारी, लिवर की बीमारी, फेफड़ों की बीमारी, हृदय रोग, मानसिक बीमारी से पीड़ित लोग भी थे। वहीं, 65 साल से अधिक उम्र वाले स्वस्थ लोगों को वैक्सीन लेने के बाद कोरोना का गंभीर संक्रमण नहीं हुआ।

इन प्राकृतिक आपदाओं से मौत की संभावना कोरोना से अधिक
सामने आई रिपोर्ट से समझा जा सकता है कि वैक्सीनेशन के बाद प्रति 1.5 लाख लोगों में से सिर्फ एक व्यक्ति की ही कोविड-19 के चलते मौत हुई। कोरोना से होने वाली मौत की ये दर आग में झुलसकर मरने वालों के बराबर है। जबकि अमेरिका में इससे ज्यादा मौतें भूकंप और बिजली गिरने से हो जाती हैं। वहीं, कार एक्सीडेंट में मरने की संभावना वैक्सीनेशन के बाद कोरोना की तुलना में 3 गुना अधिक है। राहत की बात ये है कि पूर्व टीकाकरण के बाद बच्चों में कोरोना से मौत का खतरा और भी कम हो जाता है।
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