Video: चीन के रोबोटिक स्पेसक्राफ्ट ने की चांद के अनदेखे हिस्से पर लैंडिंग
बीजिंग। नए वर्ष के मौके पर चीन ने अंतरिक्ष में एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया है जो अब तक अमेरिका जैसे देशों के हिस्से भी नहीं आया है। चीनी मीडिया की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक उसने चांद के एकदम अंधेरे हिस्से में पहली बार किसी रोबोटिक स्पेसक्राफ्ट की सफल लैंडिंग की है। यह अभी तक का पहला प्रयास था और पहली लैंडिंग है जो चांद के एक ऐसे हिस्से में हुई जिसके बारे में कोई भी नहीं जानता है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक गुरुवार को चीनी समयानुसार 10:26 मिनट पर अनमैन्ड स्पेसक्राफ्ट चांगे-4 ने साउथ पोल-एटकिन बेसिन पर लैंडिंग की।

अब सामने आएंगी तस्वीरें
चांगे-4 अपने साथ ऐसे उपकरण लेकर गया जिनकी मदद से इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति के बारे में पता लग सकेगा। इसके साथ ही यान अपने साथ कुछ ऐसे इंस्ट्रूमेंट्स भी ले गया है जो बायोलॉजिकल एक्सपेरीमेंट करने में सहायक होंगे। मीडिया की मानें तो अंतरिक्ष विज्ञान में यह उपलब्धि किसी मील के पत्थर से कम नहीं है। पूर्व के सभी मिशन में स्पेसक्राफ्ट चांद के ऐसे हिस्से पर उतरा था जो कि धरती के तरफ थे। यह पहला स्पेसक्राफ्ट है जो एक ऐसे हिस्से पर उतरा है जो अबतक अनछुआ था। चीन का यह स्पेसक्राफ्ट इस हिस्से की तस्वीर भेजेगा। चीन के इस स्पेसक्राफ्ट से किसी भी तरह का डायरेक्ट कम्यूनिकेशन संभव नहीं है। ऐसे में सभी डाटा और फोटोग्राफ एक अलग सैटेलाइट से भेजे गए और फिर वहां से पृथ्वी तक आए हैं।
चीन का प्रपोगेंडा
साल 2013 में चीन ने चांद पर एक रोवर उतारा था। इससे पहले अमेरिका और सोवियत संघ ने ही वहां पर लैंडिंग करवाई थी। चीन के स्पेस मैनेजमेंट पर करीब से नजर रखने वाली मकाऊ यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के प्रोफेसर झू मेंघुआ ने इस सफलता पर कहा, 'यह स्पेस मिशन दिखाता है कि चीन गहरी स्पेस रिासर्च में एडवांस वर्ल्ड लेवल पर पहुंच गया है। हम लोगों ने कुछ ऐसा कर दिया है जिसे करने की हिम्मत अमेरिका भी नहीं कर पाया था।' बीबीसी की मानें तो चीन ने ऐसा करके फिर से एक प्रपोगेंडे को आगे बढ़ा दिया है। उसके इस मिशन पर उसका सबकुछ दांव पर लगा था। चीन ने अपना अंतरिक्ष का मिशन बहुत देर में शुरू किया था।
क्या है चांद की डार्क साइड
हमें पृथ्वी से सिर्फ चांद का सामने का हिस्सा नजर आता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि चांद को अपनी धुरी पर पूरा घूमने में बहुत समय लगता है। चांद के दूसरे हिस्से को अक्सर 'डार्क साइड' कहा जाता है। हालांकि ऐसा नहीं है कि वहां पर पूरी तरह से अंधेरा हो। चांद के इस हिस्से को इसलिए डार्क साइड कहते हैं क्योंकि इसे अभी तक किसी ने नहीं देखा है। असल में दिन और रात में चांद के दोनो हिस्से देखे जा सकते हैं। साल 2003 में चीन ने अपने अपने अंतरिक्ष वैज्ञानिक को कक्षा में भेजा था और इसके साथ ही चीन ऐसा करके दुनिया का तीसरा देश बन गया था। चीन से पहले सोवियत संघ और अमेरिका यह कारनामा कर चुके थे।












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