'हिंद महासागर में आने वाले चीनी रिसर्च जहाज भारत के लिए खतरा', नेवी चीफ ने बताया, क्या कर रहा है चीन?
पिछले साल अगस्त में चीन ने अपने रिसर्च जहाज को हिंद महासागर में उस वक्त भेजा था, जब भारत मिसाइल टेस्ट करने वाला था, जिसकी वजह से भारत को मिसाइल लॉन्चिंग टालनी पड़ी थी।

China in Indian Ocean: भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार ने शनिवार को चीनी अनुसंधान जहाजों को लेकर कहा है, कि हिन्द महासागर में आने वाली चीनी रिसर्च जहाजें, भारत की सुरक्षा के लिहाज से खतरा हैं।
हालांकि, भारतीय नौसेना प्रमुख ने इस बात को माना, कि चीन की जहाजें अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में संचालित होने के लिए स्वतंत्र हैं। आर हरि कुमार ने कहा, कि इन जहाजों में इलेक्ट्रॉनिक संकेतों को ट्रैक करने और जानकारियां जुटाने की क्षमता होती है। इसलिए, जब वे 'हमारे राष्ट्रीय हित के क्षेत्रों' के करीब काम करते हैं, तो यह एक चुनौती बन जाती है।
चाणक्य डायलॉग्स और पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा आयोजित एक कॉन्क्लेव में बातचीत करते हुए उन्होंने कहा, कि भारतीय नौसेना हिन्द महासागर में हमेशा करीबी नजर रखती है, और हमारे पास ऐसी जहाजें हैं, जो बहुत बारीकी से ऐसी घटनाओं पर नजर रखती हैं।
हिंद महासागर में चीन बना खतरा
नौसेना प्रमुख ने चाणक्य फोरम के एडिटर इन चीफ से बात करते हुए शनिवार को कहा, कि "हम हिंद महासागर क्षेत्र में कड़ी नजर रख रहे हैं..और दुश्मनों की मौजूदगी का पता लगाने के लिए, और वे क्या कर रहे हैं, इसकी चौबीसों घंटे निगरानी करने की कोशिश की जा रही है।"
आपको बता दें, कि यह अगस्त 2022 की बात है, जब चीनी जासूसी जहाज 'युआन वांग-5' ने श्रीलंका के हंबनटोटा में डॉक किया था, जो भारत और श्रीलंका के बीच एक राजनयिक विवाद में बदल गया था। वहीं, एक अन्य पोत 'युआन वांग-6' आईओआर में प्रवेश कर गया था, जिसके कारण भारतीय लंबी दूरी की मिसाइल लॉन्च को टालना पड़ा था। चीनी रिसर्च जहाज ने दिसंबर में इस क्षेत्र में फिर से प्रवेश किया था, जब भारत ने मिसाइल परीक्षण की तारीख को पुनर्निर्धारित किया गया था।
चीनी जहाजों की मौजूदगी के बारे में भारतीय नौसेना के प्रमुख ने कहा, कि "चीनी जहाजों की समुद्र में बड़ी मौजूदगी है। हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) में किसी भी समय चीन के 3 से 6 युद्धपोत मौजूद होते हैं"।
उन्होंने कहा, कि "चीनी अनुसंधान जहाज हमेशा मौजूद रहते हैं, 2-4 की संख्या में चीन के मछली पकड़ने के जहाज भी हमेशा मौजूद होते हैं। इसलिए, आईओआर में चीनी जहाजों की बड़ी उपस्थिति है, और भारतीय नौसेना इस पर नज़र रखती है।"
नौसेना प्रमुख ने कहा, "इसलिए, हम अपनी योजनाओं पर काम करते हैं, जिन्हें करने की आवश्यकता होती है, और यह हमारी क्षमता के विकास में भी मदद करता है।"
बढ़ रही है चीन की नेवी की क्षमता
वहीं, उन्होंने माना, कि पिछले कुछ सालों में चीन की नेवी की क्षमता काफी तेजी से बढ़ी है। उन्होंने कहा, कि पिछले 10 वर्षों में, 148 जहाजों और पनडुब्बियों को चीन ने अपनी नेवी में कमीशन किया गया है, चीन का तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर निर्माणाधीन है, और वो डिस्ट्रॉयर क्षमता विकसित करने के लिए काम कर रहे हैं"।
बहुत बड़े विध्वंसक पर वे काम कर रहे हैं, उन्होंने कहा, "हम इसे महसूस करते हैं, कि इसमें फिलहाल कोई परिवर्तन नहीं होगा।"
वहीं, भारत को क्या तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर को लेकर काम करना चाहिए या नहीं, इस सवाल को भारतीय नौसेना प्रमुख ने सिरे से खारिज नहीं किया।
भारत ने इसी साल अपना दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर, आईएनएस विक्राम को इंडियन नेवी में कमीशन किया है और कई एक्सपर्ट्स इस बात पर जोर दे रहे हैं, कि भारत को तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर का निर्माण भी शुरू कर देना चाहिए। हालांकि, सरकार ने फिलहाल इसको लेकर कोई मंजूरी नहीं दी है।
एक रिपोर्ट में कहा गया था, कि भारत के पूर्व सीडीएस दिवंगत विपिन रावत तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर के निर्माण को लेकर सहमत नहीं थे। उनका मानना था, कि आधुनिक टेक्नोलॉजी में जिस तरह से विस्तार हो रहा है, उसमें किसी एयरक्राफ्ट कैरियर को निशाना बनाना काफी आसान हो जाता है, लिहाजा उन्होंने पनडुब्बियों के निर्माण पर ज्यादा जोर दिया था।
वहीं, जब मौजूदा नेवी चीफ से एयरक्राफ्ट और पनुडुब्बियों के बीच सवाल पूछा गया, तो उन्होंने दोनों की अपनी अपनी खास क्वालिटी बताई। उनके जवाबों से ऐसा महसूस हो रहा था, जैसे वो तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर के पक्ष में हों, हालांकि उन्होंने ये बात कही नहीं।
उन्होंने कहा, कि "इंडियन नेवी का काम समुद्री क्षेत्र में भारत के हितों की रक्षा करना है, उसे विस्तार देता है और उसका संरक्षण करना है और नौसेना को संतुलित होना चाहिए"। उन्होंने कहा, कि एयरक्राफ्ट कैरियर की अपनी क्षमताएं होती हैं, वो समुद्र के अंदर एक बेस की तरह काम करता है, जहां से फाइटर जेट्स भी उड़ाए जा सकते हैं, बीच समुद्र से कई तरह के और ऑपरेशन भी किए जा सकते हैं।
वहीं, पनडुब्बियों की अपनी एक अलग खासियत होती है, लिहाजा दोनों के बीच में संतुलन होनी चाहिए।
आपको बता दें, कि फिलहाल भारत के पास 2 एयरक्राफ्ट कैरियर हैं, जबकि चीन के पास तीन एयरक्राफ्ट कैरियर हैं। 2030 तक चीन के पास कुल 7 एयरक्राफ्ट कैरियर हो जाएंगे। वहीं, अमेरिका के पास 12 एयरक्राफ्ट कैरियर मौजूद हैं। चीन काफी तेजी से अपनी नौसेना की क्षमता में विस्तार कर रहा है और कई रिपोर्ट्स में आशंका जताई गई है, कि ताइवान को काबू में करने के बाद चीन पूरी ताकत के साथ हिन्द महासागर में दाखिल होगा, लिहाजा भारत को अभी से हिन्द महासागर को सुरक्षित करने के लिए काम शुरू कर देनी चाहिए।
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