भारत से हथियार खरीदने की सजा इस छोटे देश को देगा चीन, क्या ड्रैगन के ऊपर ब्रह्मोस से होगा हमला?
China-Philippine News: अमेरिकी ट्रेजरी सचिव जेनेट येलेन ने बीजिंग में अपने हालिया हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम के समापन पर घोषणा करते हुए कहा, कि "हम मानते हैं कि दुनिया हमारे दोनों देशों के विकास के लिए काफी बड़ी है।" हालांकि येलेन की यात्रा ने दोनों पक्षों की आर्थिक कूटनीति में सामान्य संबंधों का संचार किया है, लेकिन गर्मागर्म प्रतिस्पर्धा वाले दक्षिण चीन सागर में भू-राजनीतिक तनाव अभी भी बरकरार है।
फिलीपींस दोनों महाशक्तियों की प्रतियोगिता के केंद्र में तेजी से बढ़ रहा है और चीन, फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर प्रशासन के तहत अमेरिका-फिलीपीन रक्षा संबंधों को बढ़ने को लेकर आक्रामक प्रतिक्रिया दे रहा है।

अमेरिका को सैन्य अड्डा देगा फिलीपींस
फिलीपींस ने पिछले दिनों अमेरिका को अपने देश में सैन्य ठिकाना देने का करार किया है, जाहिर है, बदले में फिलीपींस को बोरियों में भरकर अमेरिकी डॉलर मिलेंगे और अमेरिका को फिलीपींस में वो ठिकाना मिल जाएगा, जहां से वो सीधे तौर पर ताइवान की रक्षा के लिए चीन पर सख्त नजर रख सकता है।
लेकिन, चीन को ये रिश्ता मंजूर नहीं है और चीन ने फिलीपींस को धमकाने की कोशिशें शुरू कर दी हैं।
पिछले हफ्ते फिलीपीन तट रक्षक (पीसीजी) अधिकारियों ने बताया, कि करीब 50 "चीनी समुद्री मिलिशिया" जहाज इरोक्वाइस रीफ पर "झुंड" बनाकर आगे बढ़ रहे हैं। ये क्षेत्र फिलीपींस का है, लेकिन चीन ने अपना दादागीरी दिखाना शुरू कर दिया है।
2021 में, यहां तक कि बीजिंग के अनुकूल फिलीपींस की सरकार रहने के बाद भी "इरोक्वाइस रीफ के आसपास चीनी मछली पकड़ने वाले जहाजों की लगातार मौजूदगी" के कारण फिलीपींस ने एक के बाद एक कई राजनयिक विरोध दर्ज कराए, लेकिन चीन पर कोई असर नहीं पड़ा।
उस समय, सैकड़ों चीनी मिलिशिया जहाजों ने फिलीपींस द्वारा दावा किए गए अन्य भूमि क्षेत्रों, विशेष रूप से व्हिटसन रीफ पर भी कब्जा कर लिया था।
फिलीपींस के सशस्त्र बल (एएफपी), जो कहते हैं कि उसने पहली बार हवाई गश्त के दौरान इरोक्वाइस रीफ के आसपास चीनी मिलिशिया बिल्डअप का पता लगाया है, उसने तीन चीनी तट रक्षक (सीसीजी) जहाजों और दो पीपुल्स लिबरेशन आर्मी-नेवी की उपस्थिति की भी खबर दी है।

चीनी जहाज, अंतर्राष्ट्रीय कानूनों की धज्जियां उड़ात हुए दक्षिण चीन सागर में फिलीपींस के विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) के भीतर भी धमक पड़ती हैं।
और अब एक बार फिर से, फिलीपींस अब स्प्रैटली द्वीप समूह में अपने दावे वाले क्षेत्रों के नजकीद या उसके आसपास चीनी पारंपरिक और अर्धसैनिक बलों के जमावड़े का सामना कर रहा है।
एएफपी के प्रवक्ता एडगार्ड अबोगाडो ने एक बयान में कहा, कि वहां चीनी मछली पकड़ने वाले जहाजों का झुंड काफी दिखाई दे रहा है। उसने कहा, कि "पिछले सप्ताह इरोक्वाइस रीफ पर कई उड़ानों के दौरान, पायलटों ने चीनी मछली पकड़ने वाले जहाजों की खतरनाक उपस्थिति देखी गई है।"

इंडिया के दखल से बौखला रहा ड्रैगन
फिलीपींस ने भारत से एक और प्रमुख समर्थन हासिल किया, जो अपनी "गुटनिरपेक्ष" विदेश नीति परंपरा के तहत दक्षिण चीन सागर विवादों जैसे संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी स्थिति में आम तौर पर "तटस्थ" रहा है।
हालांकि, अपनी हालिया द्विपक्षीय रणनीतिक वार्ता के बाद, दोनों देशों ने रक्षा सहयोग को दोगुना करने की अपनी प्रतिबद्धता को रेखांकित किया है।
पिछले हफ्ते नई दिल्ली में फिलीपींस के विदेश सचिव एनरिक मनलो और भारतीय विदेश मंत्री सुब्रमण्यम जयशंकर के बीच एक बैठक के बाद जारी एक संयुक्त बयान में, दोनों उभरते साझेदारों ने विवादों के शांतिपूर्ण समाधान और विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन की आवश्यकता को रेखांकित किया है।
वहीं, फिलीपींस भारत की सबसे खतरना ब्रह्मोस मिसाइल पहले ही खरीद चुका है, जिसे डिटेक्ट करने की क्षमता चीन में फिलहाल नहीं है। फिलीपींस ने भारतीय ब्रह्मोस मिसाइलों की तैनाती चीन को ध्यान में रखते हुए ही की है।
फिलीपींस की मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह पहली बार है कि भारत ने मध्यस्थता मामले के फैसले का सीधे समर्थन किया है। मनीला के लिए बढ़ते अंतरराष्ट्रीय समर्थन से नाराज चीन के विदेश मंत्रालय ने किसी भी "तीसरे पक्ष" के हस्तक्षेप के खिलाफ चेतावनी दी है।
चीन इस बात से भी नाराज है, कि भारत अब सीधे तौर पर दक्षिण चीन सागर में घुस रहा है, लिहाजा जो चीन भारत को हिमालय में उलझाकर रखना चाहता था, भारत वे दक्षिण चीन सागर में उसके खिलाफ नया फ्रंट खोल दिया है। लिहाजा, माना जा रहा है, कि दक्षिण चीन सागर में अब भारत और अमेरिका से दोस्ती को फिलीपींस चीन के खिलाफ खुलकर इस्तेमाल करने वाला है, जिससे चीन की परेशानी बढ़ने वाला है।












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