चीन ने दिखाई आंख, 73 दिनों तक चले डोकलाम विवाद से सबक ले भारत
भारत और चीन के सैनिक पिछले साल 16 जून से 73 दिन तक आमने-सामने थे। इस क्षेत्र में चीनी सेना की ओर से किए जा रहे सड़क निर्माण के काम को भारतीय पक्ष ने रोक दिया था
नई दिल्ली। चीन ने एक बार फिर से अपनी नापाक मंशा को जाहिर किया है। डोकलाम को विवादित क्षेत्र बताने वाले सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत के बयान की आलोचना करते हुए चीन की सेना ने कहा कि ये चीन का हिस्सा है। जनरल बिपिन रावत की टिप्पणी पर चीनी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल वू कियान ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। इस पर प्रवक्ता कर्नल वू कियान ने कहा, 'भारत की ओर दिए गए बयान से दिखता है कि भारतीय सैनिकों की ओर से अवैध ढंग से सीमा पार करने की बात सच है।' उन्होंने जनरल रावत के हालिया बयान का जवाब देते हुए कहा, 'डोकलाम चीन का हिस्सा है।'

'डोकलाम विवाद से भारत को सबक लेना चाहिए'
कर्नल वू कियान ने कहा कि डोकलाम उनका हिस्सा है और गतिरोध जैसी घटनाओं से बचने के लिए 73 दिनों तक चले डोकलाम विवाद से भारत को सबक लेना चाहिए। जनरल रावत ने इस महीने के शुरू में कहा था कि भारत को पाकिस्तान की सीमा से अपना ध्यान हटाकर चीन की तरफ ले जाने की जरूरत है और उन्होंने वास्तविक नियंत्रण रेखा पर बीजिंग की ओर दबाव बनाए जाने के बारे में बात की थी।

पिछले साल 16 जून से 73 दिन तक आमने-सामने थे
भारत और चीन के सैनिक पिछले साल 16 जून से 73 दिन तक आमने-सामने थे। इस क्षेत्र में चीनी सेना की ओर से किए जा रहे सड़क निर्माण के काम को भारतीय पक्ष ने रोक दिया था जिसके बाद ये गतिरोध शुरू हुआ। ये गतिरोध पिछले साल 28 अगस्त को खत्म हुआ था। जनरल रावत के बयान का हवाला देते हुए वू ने कहा, 'मैं इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि किसी देश का कोई भी आकार हो, उसके साथ समान व्यवहार होना चाहिए।'

जनरल रावत ने 12 जनवरी को डोकलाम पर बयान दिया था
जनरल रावत ने 12 जनवरी को डोकलाम पर बयान दिया था। उन्होंने कहा था, ‘चीन की पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) ने तोरसा नुल्ला के पश्चिम (उत्तरी डोकलाम) में कब्जा कर लिया है। वास्तविक जगह से दोनों पक्ष हट चुके हैं, लेकिन तंबू और निरीक्षण केंद्र अब भी मौजूद हैं। यह क्षेत्र चीन और भूटान के बीच विवादित है।' जनरल रावत ने आर्मी डे की पूर्व संध्या पर यह बयान दिया था। बता दें कि सैटेलाइट इमेज में डोकलाम के विवादित क्षेत्र में चीनी सेना के तंबू, निगरानी केंद्र, टैंक, मिसाइलें और बख्तरबंद वाहनों की मौजूदगी का पता चला था। जनरल रावत ने आशंका जताई थी कि सर्दी के मौसम के बाद चीनी सेना फिर से इस क्षेत्र में अपनी गतिविधि बढ़ा सकती है।












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