ग्लोबल साउथ में चीन के काबोरार में उछाल, एक्सपोर्ट में लगाई लंबी छलांग, भारत के लीडर बनने की राह में रोड़ा?
China export increase in Global South: मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल में ग्लोबल साउथ का लीडर बनने पर जोर दिया था और सार्वजनिक मंचों से भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बार बार कहा, कि भारत का मकसद ग्लोबल साउथ का लीडर बनना है।
लेकिन, चीन की भी यही मंशा है और उसने ग्लोबल साउथ के देशों के साथ अपने एक्सपोर्ट को बेहिसाब अंदाज में बढ़ाना शुरू कर दिया है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, ग्लोबल साउथ के देशों के साथ चीन के कारोबार में भारी इजाफा दर्ज किया गया है, जो भारत के लिए एक चिंता की बात हो सकती है।

ग्लोबल साउथ में बढ़ा चीन का एक्सपोर्ट
ग्लोबल साउथ देशों में चीन का एक्सपोर्ट मई महीने में 11.2 प्रतिशत बढ़ा है, जो पिछले साल मई के 7.6 प्रतिशत के मुकाबले काफी ज्यादा है। चीन के एक्सपोर्ट में आए उछाल से संकेत मिलता है, कि साल 2024 में चीन की सरकार ने विकास का जो दर 5 प्रतिशत का रखा है, शायद उस लक्ष्य तक पहुंच सकता है। सबसे दिलचस्प बात ये है, कि चीन के एक्सपोर्ट में उस वक्त वृद्धि हुई है, जब दुनिया के विकसित बाजारों में चीन का एक्सपोर्ट काफी सुस्त हो चुका है।
रिपोर्ट्स में पता चलता है, कि ASEAN देशों के साथ चीन के कारोबार में भारी उछाल दर्ज किया गया है, वहीं ब्राजील ने भी काफी चीनी सामान खरीदा है।
पश्चिमी देशों ने चीनी सामानों को खरीदना काफी कम कर दिया है और पश्चिम को लग रहा था, कि ग्लोबल साउथ में भी चीन अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाएगा, लेकिन चीन ने चौंका दिया है। डेटा से पता चलता है, कि ग्लोबल साउथ के देशों ने चीन की कम कीमत वाली इलेक्टिक कारें, सोलर पैनल्स, स्टील का आयात किया है, जबकि चीन ने ग्लोबल साउथ में टेलीकॉम इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने पर अच्छा खासा जोर दिया है।
वहीं, अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ टकराव के बाद भी ब्राजील के बाजार में चीन ने काफी सामान बेचे हैं।
कोविड संकट के दौरान देखा गया था, कि पश्चिमी देशों में चीन के इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों की भारी वृद्धि हुई थी, लेकिन अब वो एक बार फिर से 2018-2019 के स्तर पर वापस आ गया है।
वहीं, ताजा आंकड़ों से ये भी पता चलता है, कि डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने चीनी सामानों के ऊपर जो 25 प्रतिशत का टैरिफ लगाया था, चीन ने उससे निपटने के लिए वियतनाम का रास्ता अपना लिया है। डेटा से पता चलता है, कि अमेरिका में सामान बेचने के लिए चीन, वियतनाम की सप्लाई चेन की मदद ले रहा है। यानि, वियतनाम, चीन से सामान खरीदकर उसे अमेरिका में बेचता है, जिससे 25 प्रतिशत का टैरिफ चीनी सामानों पर लागू नहीं हो पाता है।
इस बीच ऐसे संकेत भी मिल रहे हैं, कि चीन के प्रॉपर्टी सेक्टर में थोड़ा सुधार हुआ है और इलेक्ट्रिक कारों ने चीन के घरेलू बाजारों में अपनी पकड़ मजबूत की है। हालंकि, एक्सपर्ट्स का कहना है, कि प्रॉपर्टी सेक्टर में सुधार होने की संभावना नहीं के बराबर है, लेकिन चीन ने 5% विकास दर हासिल करने का जो लक्ष्य रखा है, शायद वो पूरा किया जा सकता है। वहीं, पिछले हफ्ते, IMF ने चीन के लिए 2024 के विकास पूर्वानुमान को 4.6% से बढ़ाकर 5% कर दिया है, जो चीन की उम्मीदों को बढ़ाता है।












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