चीन ने मंगल ग्रह पर गाड़ा कामयाबी का झंडा, अमेरिका के वर्चस्व को टक्कर

शुक्रवार सुबह सुबह चीन के सरकारी मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने मंगल ग्रह की कुछ तस्वीरें जारी की हैं और कहा है कि चीन ने मंगल ग्रह पर कामयाबी का झंडा गाड़ दिया है।

बीजिंग, जून 11: अंतरिक्ष में चीन लगातार कामयाबी के झंडे गाड़ रहा है और अब एक बार फिर चीन को मंगलग्रह पर बड़ी कामयाबी मिली है। पिछले महीने चीन ने मंगल ग्रह पर तियनवान -1 स्पेसक्राफ्ट को कामयाबी के साथ उतारा था और फिर जुरोंग रोवर भी मंगल ग्रह की सतह पर उतरने में कामयाब रहा है। अब चीन ने दावा किया है कि जुरोंग रोवर मंगल ग्रह से तस्वीरें भेज रहा है। दरअसल, चीन का ये मिशन इसलिए भी कामयाब माना जा रहा है क्योंकि मंगल ग्रह पर इंसानों को बसाने की जो कवायद की जा रही है, उसमें चीन दुनिया के बाकी देशों से आगे निकलता जा रहा है।

चीन को बड़ी कामयाबी

चीन को बड़ी कामयाबी

शुक्रवार सुबह सुबह चीन के सरकारी मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने मंगल ग्रह की कुछ तस्वीरें जारी की हैं और कहा है कि चीन ने मंगल ग्रह पर कामयाबी का झंडा गाड़ दिया है। ग्लोबल टाइम्स ने दावा किया है कि तियनवान-1 स्पेसक्राफ्ट ने मंगल ग्रह से तस्वीरें भेजनी शुरू कर दी है। ये तस्वीरें तियनवान-1 स्पेसक्राफ्ट के जरिए मंगल पर भेजे गये रोबोट जुरोंग ने पृथ्वी पर भेजी है, जिसमें मंगलग्रह की सतह को देखा जा सकता है। ग्लोबल टाइम्स ने दावा किया है कि जुरोंग रोवर से भेजी गई इन तस्वीरों ने साबित कर दिया है कि चीन का मंगल मिशन पूरी तरह से कामयाब रहा है। इन तस्वीरों में आप मंगल ग्रह के सतह को देख सकते हैं। ये तस्वीरें अपने आप में ऐतिहासिक हैं और मंगल को लेकर कई और जानकारियां आने की उम्मीद है। चीन अपने इस जुरोंग रोवर के जरिए मंगल ग्रह पर पानी और बर्फ खोज रहा है ताकि मंगल ग्रह पर इंसानी जीवन संभव है या नहीं, इसका पता लगाया जा सके।

मई में मंगल पर उतारा था रोवर

मई में मंगल पर उतारा था रोवर

मई महीने में चीन का जुरोंग रोवर मंगल ग्रह पर उतरने में कामयाब रहा था। इस रोवर में 6 चक्के लगे हुए हैं और इसका वजन 529 पाउंड यानि 240 किलो है। इस रोवर में 6 अलग अलग वैज्ञानिक उपकरण लगे हुए हैं, जिनकी मदद से ये रोवर मंगल ग्रह से जुड़ी जानकारियां चीन की स्पेस एजेंसी तक भेज रहा है। शिन्हुआ न्यूज के मुताबिक इस रोवर को कुछ समय बाद लैंडर से जोड़ा गया है जो मंगल ग्रह की सतह पर जीवन की तलाश कर रहा है। चीन के इस रोवर में एक प्रोटेक्टिव कैप्सुल, एक पैराशुट और रॉकेट प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया गया है और चीन के लिए अपना रोवर मंगल ग्रह पर उतारना एक बहुत बड़ी कामयाबी है।

चीन का मंगल मिशन

चीन का मंगल मिशन

चीन के चुरोंग रोवर के साथ एक ऑर्बिटर तिअन्वेन भी है, जो मंगल ग्रह पर की कक्षा में फरवरी में पहुंचा था। मंगल ग्रह पर सुरक्षित लैंडिंग के बाद चुरोंग रोवर अब मंगल ग्रह के यूटोपिया से तस्वीरें पृथ्वी पर भेजेगा। मंगल ग्रह से पृथ्वी की दूरी 32 करोड़ किलोमीटर है, जिसका मतलब ये हुआ कि चीन से कोई रेडियो संदेश पृथ्वी तक पहुंचने में 18 मिनट का वक्त लेगा। आपको बता दें कि फरवरी में ही नासा का प्रीजर्वेंस रोवर भी मंगल ग्रह पर लैंड हुआ था जो अलग अलग जानकारियां नासा को भेज रहा है। वहीं, नासा का इंजीन्यूटी हेलीकॉप्टर भी मंगल ग्रह पर है, जिसने अभी तक पांच सुरक्षित उड़ाने अभी तक मंगलग्रह पर पूरी तक ली हैं। चीन और अमेरिका के अलावा संयुक्त अरब अमीरात का होप स्पेसक्राफ्ट भी मंगल ग्रह की कक्षा में पहुंचकर ऑर्बिट में चक्कर काट रहा है।

बेहद मुश्किल था मिशन

बेहद मुश्किल था मिशन

चीन के चुरोंग रोवर को मार्स यानि मंगल तक पहुंचने में 7 महीने की अंतरिक्ष यात्रा करनी पड़ी और फिर तीन महीने तक मंगल ग्रह के ऑर्बिट की परिक्रमा करनी पड़ी। अंत में आखिरी 9 मिनट सबसे ज्यादा अहम थे। आखिरी 9 मिनट कितना महत्वपूर्ण होता है, ये आप इस बात से समझ सकते हैं कि भारत का चंद्रयान आखिरी मिनटों में ही चंद्रमा पर उतरने में नाकामयाब रहा था। किसी भी ग्रह के लिए भेजा गया कोई भी मिशन कामयाब होगा या नहीं, ये उसके लैंडिंग पर ही निर्भर करता है। चीनी रोवर के लिए भी आखिरी के 9 मिनट सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण थे, लेकिन अंत में चीन का ये रोवर कामयाबी के साथ मंगल ग्रह पर उतर ही गया था। आपको बता दें कि रोवर एक छोटा रोबोट होता है, जिसमें पहिए लगे होते हैं।

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