आतंकवाद मिटाने के नाम पर बलूचों का कत्लेआम करेगा चीन, पाकिस्तान और ईरान के साथ दुर्लभ बैठक
बलूचिस्तान पर पाकिस्तान के कब्जा कर लिया था और फिर चीन अब बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रहा है, जिसको लेकर बलूच लगातार विद्रोह करते रहे हैं।

China Pakistan Iran: आतंकवादियों के खात्मे के नाम पर चीन, पाकिस्तान और ईरान मिलकर बलूचों के कत्लेआम की योजना बना रहे हैं। इस बाबत चीन, पाकिस्तान और ईरान के बीच एक बैठक की गई है।
चीन, ईरान और पाकिस्तान ने बुधवार को बीजिंग में अपना पहला त्रिपक्षीय आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा परामर्श आयोजित किया था और बैठक के बाद इस्लामाबाद में एक बयान में कहा गया, कि "प्रतिनिधियों ने क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति, विशेष रूप से क्षेत्र द्वारा सामना किए जा रहे आतंकवाद के खतरे पर विस्तृत चर्चा की।"
रिपोर्ट के मुताबिक, इस बैठक में खास तौर पर पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से बलूचिस्तान में ऑपरेशन चलाने पर बातचीत की गई है। यानि, बलूचिस्तान में ये तीनों देश मिलकर आतंकवाद विरोधी अभियान के नाम पर अपना हक मांगने वाले बलूचों का कत्लेआम करेंगे।
आपको बता दें, कि बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों को पाकिस्तान की मदद से चीन लूट रहा है और इसके खिलाफ बलूच सालों से आवाज उठा रहे हैं, लेकिन पाकिस्तानी सेना उन्हें आतंकवादी बताकर मार देती है। हजारों बलूचों को पाकिस्तान की सेना अभी तक मार चुकी है और अब उसमें चीन और ईरान भी शामिल होंगे, क्योंकि बलूचिस्तान का एक हिस्सा ईरान में भी जाता है।
बलूचों के खिलाफ चलेगा ऑपरेशन
बलूचिस्तान से होकर चीन का चायना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर गुजरता है, जिसपर चीन ने अरबों डॉलर का निवेश कर रखा है और चीन अपने इस प्रोजेक्ट को बचाने के लिए सैकड़ों लोगों की जान लेगा।
सीपीईसी प्रोजेक्ट के खिलाफ बलूचों का विद्रोह जारी है और कई विद्रोहियों ने हथियार भी उठा लिए हैं, जो ऑपरेशन को अंजाम देकर ईरान भाग जाते हैं, इसीलिए ईरान को भी चीन ने अपने इस प्रोजेक्ट में शामिल किया है, जबकि पाकिस्तान से दशकों से बलूचों को मारता आया है और चीनी मदद के लिए वो किसी भी स्तर तक गिर सकता है, ये देखा जा चुका है।

बलूचिस्तान के लोग लंबे अर्से से पाकिस्तान से आजाद होने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जिसपर पाकिस्तान ने कब्जा कर रखा है। ये प्रांत ईरान की सीमा से लगा हुआ है, जिसने लंबे समय से पाकिस्तान के खिलाफ आंदोलन चलाया है, जिसका नेतृत्व जातीय बलूच समूह कर रहे हैं।
इस्लामाबाद का आरोप है, कि विद्रोहियों ने चीन की वैश्विक बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के विस्तार सीपीईसी को खत्म करने के लिए सीमा पार हमलों को अंजाम देने के लिए ईरानी धरती का इस्तेमाल करते हैं। जबकि, ईरानी अधिकारी अपनी धरती पर बलूच विद्रोहियों की मौजूदगी से इनकार करते हैं।
बलूचिस्तान में क्यों होता है विद्रोह?
CPEC ने पूरे पाकिस्तान में और बलूचिस्तान में अरब सागर के गहरे पानी वाले ग्वादर बंदरगाह तक सड़क नेटवर्क और बिजली संयंत्रों का निर्माण किया है। इस क्षेत्र में एक तरह से चीन का कब्जा हो गया है और बलूचोँ का कहना है, कि उनके संसाधनों को लूटा जा रहा है।
बलूच विद्रोहियों ने CPEC का विरोध करते हुए आरोप लगाया, कि चीन, इस क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों से स्थानीय आबादी को वंचित करने के पाकिस्तान के प्रयासों में मदद कर रहा है। उन्होंने बलूचिस्तान में परियोजनाओं पर काम कर रहे चीनी नागरिकों के खिलाफ घातक हमले किए हैं।

हालांकि, चीन और पाकिस्तान आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज करते हैं और मेगा विकास परियोजना को बनाए रखते हुए बड़े पैमाने पर गरीबी से जूझ रहे प्रांत और पाकिस्तान में आर्थिक समृद्धि ला रहे हैं।
बलूचिस्तान ईरान के दक्षिण-पूर्वी सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत से सटा हुआ है, जहां ईरानी सुरक्षा बल घरेलू सुन्नी-आधारित उग्रवादियों से जूझ रहे हैं, जिन पर शिया मुस्लिम बहुल देश में जानलेवा हमले करने का आरोप है।
तेहरान का आरोप है कि इस्लामाबाद उग्रवादियों को ईरान में सीमा पार आतंकवाद का संचालन करने से रोकने के लिए पर्याप्त नहीं कर रहा है, ऐसे आरोप जिन्हें पाकिस्तानी अधिकारी खारिज करते हैं।












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