भारत के साथ ब्रह्मपुत्र नदी के हाइड्रोलॉजिक आंकड़े शेयर करने के लिए चीन फिर से तैयार
बीजिंग। पिछले साल चीन ने भारत को ब्रह्मपुत्र नदी के हाइड्रोलॉजिकल आंकड़े भारत को उपलब्ध नहीं कराए थे, लेकिन इस बार बीजिंग ने कहा कि वे नई दिल्ली के साथ आंकड़े शेयर करेंगे। ब्रह्मपुत्र नदी के हाइड्रोलॉजिकल आंकड़े शेयर करने के लिए दो दिनों तक दोनों देशों के बीच वार्ता चली, जिसके बाद डाटा शेयरिंग को लेकर सहमति बन गई है। मीडिया से बात करते हुए चीन विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि मानवीय सदभावना के आधार पर और द्विपक्षीय रिश्तों के विकास को देखते हुए हम हाइड्रोलॉजिकल डाटा का सूचना सहयोग को आगे जारी रखेंगे।

पिछले साल डोकलाम विवाद के बाद भारत और चीन के बीच दो नदियों को लेकर टकराव तेज हो गया था। बीजिंग ने पिछले साल दोनों देशों के बीच ब्रह्मपुत्र और सतलुज नदियों के पानी का डाटा भारत को उपलब्ध नहीं करवाया था। डाटा साझा करने को लेकर दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय समझौता है, लेकिन इस साल चीन ने हाइड्रोलॉजिकल डेटा नहीं दिया, जिसको लेकर भारत ने आपत्ति भी जताई थी। भारत और चीन दोनों देशों को 15 मई से 15 अक्टूबर के बीच ब्रह्मपुत्र-सतलुज नदी के डेटा एक दूसरे को उपलब्ध कराती है।
भारत की तरफ से मिनिस्टरी ऑफ रिसोर्सेस कमिश्नर तीरथ सिंह मेहरा और चीन की तरफ से डिपार्टमेंट ऑफ इंटरनेशनल कॉओपरेशन साइंस एंड टेक्नोलॉजी, मिनिस्टरी ऑफ वॉटर रिसोर्सेस के काउंसिल यू झिंग्जून ने बैठक का प्रतिनिधित्व किया। दोनों देशों के बीच ब्रह्मपुत्र नदी हाइड्रोलॉजिकल डाटा शेयर करनी के आपसी सहयोग की सहमति बनी।
बता दें कि नदियों के डेटा उपलब्ध करवाने से भारत को बाढ़ का पूर्वानुमान लगाने और मॉनसून में जल का स्तर बढ़ने से जरूरी व्यवस्था करने में मदद मिलती है।
पिछले साल ब्रह्मपुत्र नदी ने असम राज्य में जमकर कहर बरपा था, जिससे 160 लोगों की मौत हुई थी। इस बाढ़ ने राज्य के 29 जिलों के हजारों लोगों को विस्थापित होने के लिए मजबूर कर दिया था। वहीं, सतलुज नदी से पजांब में किसानों की 1,000 एकड़ को नुकसान पहुंचाया था।
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