भारत से रूस तक.. दुनिया का 'सुल्तान' बनने 6 युद्ध लड़ेगा चीन, शी जिनपिंग के प्लान 2060 का खुलासा
China News: चीन ने पिछले 2 दशकों में पड़ोसी देशों के कई हिस्सों पर आक्रामक तरीके से अपना दावा किया है, जिससे चीन के साथ कई देशों के युद्ध छिड़ने का खतरा काफी बढ़ गया है। भारत के साथ विवादित सीमाओं से लेकर दक्षिण चीन सागर के विवादित जल तक.. और संवेदनशील ताइवान जलडमरूमध्य से लेकर रूस के विशाल हिस्से तक.. चीन की आक्रामक सैन्य गतिविधियां काफी खतरनाक हो चुकी हैं।
माना जाता है, की चीन की आक्रामक सैन्य गतिविधियों के पीछे उसकी मजबूत आर्थिक स्थिति है और उसने अपने शस्त्रागार को बढ़ाने और विनाशक हथियारों को शामिल करने में बेतहाशा पैसे बहाए हैं।

चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता और पूर्व राष्ट्रपति हू जिंताओ के नेतृत्व में चीन एक वैश्विक आर्थिक महाशक्ति के रूप में आगे बढ़ा था और मौजूदा राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीन ने अपनी सीमा का विस्तार करने की नीति पर चलना शुरू कर दिया है।
शी जिनपिंग, जो हू जिंताओ के उत्तराधिकारी हैं, वो चीन उस ख्वाब को जिंदा कर रहे हैं, जिसका मकसद चीन के वर्चस्व को पूरी दुनिया में कायम करना है। चीनी ख्वाब में कहा जाता है, कि पूरी दुनिया चीन के वर्चस्व को कबूल कर चुका है और दुनिया में सिर्फ एक ही महाशक्ति है, और वो चीन है। शी जिनपिंग अपने देश के लोगों को सपना दिखा रहे हैं, कि उनके नेतृत्व में चीन अपना 'ऐतिहासिक गौरव' फिर बहाल करेगा।
चीन का 2060 मिशन क्या है?
हालांकि, अभी तक चीन की जो भी सैन्य कार्रवाइयां रही हैं, वो ताइवान के आसपास ही केन्द्रित रही हैं, लेकिन 2013 में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना में दूसरा सबसे बड़ा राज्य-संचालित मीडिया आउटलेट, चाइना न्यूज सर्विस ने एक खतरनाक खुलासा किया था।
चीनी अखबार के "अगले 50 वर्षों में चीन निश्चित रूप से छह युद्ध लड़ेगा" शीर्षक वाले लेख में 1840-1842 के अफीम युद्ध के दौरान खोए हुए क्षेत्रों को फिर से हासिल करने के चीन के दृढ़ संकल्प का संकेत दिया गया है, ताकि उन क्षेत्रों को फिर से हासिल कर चीन अपने पुराने गौरव को फिर से हासिल करे।
चीनी अखबार के प्लान को हल्के में नहीं लिया जा सकता है, क्योंकि इस रिपोर्ट के बाद से पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने अपनी शक्ति को खतरनाक स्तर पर बढ़ाना शुरू कर दिया। वहीं, चीन की महत्वाकांक्षा पर जो शक्तियां अंकुश लगा सकती थीं, चीन ने ऐसी शक्तियों को धमकाना शुरू किया।
इसके साथ ही 2013 में एक और चीनी फिल्म "साइलेंट कॉन्टेस्ट" के जरिए भी चीन ने पूरी दुनिया को एक संदेश देने की कोशिश की, जिसमें भी चीन के इस प्लान का खुलासा किया गया था। हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद बिना कोई स्पष्टीकरण दिए चीनी वेबसाइटों से इस फिल्म को हटा दिया गया।
"साइलेंट कॉन्टेस्ट" फिल्म में अमेरिका को एक षडयंत्रकारी प्रतिद्वंद्वी के रूप में दर्शाया गया है, जो चीन की स्थिरता और संप्रभुता को कमजोर करने के लिए राजनीतिक तोड़फोड़ से लेकर सांस्कृतिक घुसपैठ तक की रणनीति अपना रहा है।
आइये जानते हैं, कि चीन साल 2060 तक कौन कौन से युद्ध लड़ने की प्लान कर रहा है?
ताइवान युद्ध (2020-2025)
चीनी मीडिया के मुताबिक, अगर ताइवान प्रशासन से एकीकरण को लेकर समझौता नहीं होता है, तो साल 2020 से 2025 तक चीन, ताइवान को जबरदस्ती अपने देश में मिलाने की कोशिश करेगा। चीनी राष्ट्रपति ने भी कहा है, कि ताइवान के एकीकरण में बल प्रयोग से वो इनकार नहीं कर सकते हैं।
चाइना न्यूज लेख के लेखक ने शांतिपूर्ण एकीकरण या बलपूर्वक एकीकरण पर वोट करने के लिए 2020 तक ताइवान में जनमत संग्रह कराने का प्रस्ताव रखा, लेकिन उन्होंने अनुमान लगाया है, कि युद्ध से ही ताइवान का एकीकरण हो सकता है।
दक्षिण चीन सागर पर पूर्ण कब्जा (2025-2030)
दक्षिण चीन सागर पर भी चीन अपना दावा करता है और चीन का दावा है, कि दक्षिण चीन सागर के हर एक द्वीप पर उसका हक है। लिहाजा, दक्षिण चीन सागर के तमाम तटीय देश फिलीपींस, इंडोनेशिया, ब्रूनाई, वियतनाम को चीनी आक्रामकता का डर है। चीनी मीडिया की धमकी है, ताइवान के एकीकरण के बाद चीन पूरे दक्षिण चीन सागर का विवाद हमेशा के लिए खत्म कर देगा और इसके लिए लेख में आक्रामकता से इनकार नहीं किया गया है।
दक्षिणी तिब्बत की लड़ाई (2035-2040)
साल 1914 में शिमला समझौते के हिस्से के रूप में ब्रिटिश और चीनियों के बीच मैकमोहन रेखा पर बातचीत हुई थी, जिससे चीन और भारत के बीच एक कानूनी सीमा स्थापित हुई। इस संधि ने तिब्बत को "आंतरिक" और "बाहरी" तिब्बत में विभाजित कर दिया।
मैकमोहन रेखा पर चीनी आपत्तियों के बावजूद, जिसका मतलब तिब्बत की स्वतंत्रता की मान्यता देना होता है, साल 1962 के भारत-चीन युद्ध तक यह दोनों देशों के बीच वास्तविक सीमा बनी रही। 1962 के युद्ध के बाद, पहले नॉर्थ-ईस्ट फ्रंटियर एजेंसी के नाम से जाना जाने वाला क्षेत्र का नाम बदलकर अरुणाचल प्रदेश कर दिया गया। चीन अरूणाचल प्रदेश पर अपना दावा करता है और चीनी मीडिया की धमकी है, कि वो 2035 से 2040 के बीच अरूणाचल प्रदेश पर कब्जा करेगा।
डियाओयू और रयूक्यू द्वीपों पर कब्जा (2040-2045)
चीनी मीडिया ने दावा किया है, कि दो जापानी द्वीप श्रृंखलाओं, सेनकाकू द्वीप समूह, जिसे चीन में डियाओयू द्वीप समूह के रूप में भी जाना जाता है, और रयूकू, जिसे नानसेई द्वीप समूह के नाम से भी जाना जाता है, उसपर अपना दावा जताएगा।
चीनी लेखक ने जापान पर रयूकू द्वीप को प्राचीन जापानी क्षेत्र के हिस्से के रूप में चित्रित करके गलत सूचना को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। चीन का तर्क है, कि इन द्वीप श्रृंखलाओं का चीन के साथ जागीरदार राज्यों के रूप में प्राचीन संबंध है, लेकिन वर्तमान में जापानी (और अमेरिकी, ओकिनावा में आधार की उपस्थिति को देखते हुए) कब्जे में हैं।
मंगोलिया पर आक्रमण (2045-2050)
चीन की विस्तारवादी महत्वाकांक्षाओं के संभावित लक्ष्यों की सूची में मंगोलिया अगला है। चीनी लेखक ने दावा किया है, कि मंगोलिया, जिसे "बाहरी मंगोलिया" कहा जाता है, उनके क्षेत्र का एक अभिन्न अंग है, जो "आंतरिक मंगोलिया" के स्वायत्त क्षेत्र के रूप में जाने जाने वाले चीनी प्रांत से अलग है।
ऐतिहासिक बारीकियों के बावजूद, जिसमें 1600 के दशक में चीनी शासन की अवधि और प्राचीन काल में चीन पर मंगोल प्रभुत्व शामिल है, चीन मंगोलिया पर अपना क्षेत्रीय दावा बरकरार रखे हुआ है।
यह ऐतिहासिक पृष्ठभूमि मंगोलिया के संबंध में चीन की प्रत्याशित कार्रवाइयों के लिए मंच तैयार करती है। ऐसी आशंका है, कि जिस तरह से चीन ताइवान पर कब्जा करेगा, उसी तरह से मंगोलिया के ऊपर भी हमला करेगा।
रूस के साथ युद्ध (2055-2060)
शीत युद्ध के बाद सोवियत संघ का विभाजन हो गया और उसके बाद चीन और रूस के संबंध काफी खराब हो गये। हालांकि, यूक्रेन युद्ध ने फिर से रूस को चीन के पाले में कर दिया है, लेकिन चीन को दोस्त की पीठ पर हमला करने वाले देश के तौर पर भी जाना जाता है।
चीन और रूस के बीच अभी भी गहरा अविश्वास कायम है। चीन का कहना है, कि रूस ने उसके 160 मिलियन वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर कब्जा कर रखा है, जो ऐतिहासिक रूप से किंग राजवंश के बाद से चीन की है।
चीनी लेखक ने रूसी सरकार की ताकत और प्रभाव में और गिरावट की भविष्यवाणी की है। वे इस अवसर का लाभ उठाने की आशा करते हैं, विशेष रूप से पांच युद्धों के बाद चीन के सैन्य बलों के अनुभवी अनुभव का लाभ उठाते हुए। रूस के साथ युद्ध की स्थिति में चीनी लेखक ने परमाणु युद्ध की संभावना से भी इनकार नहीं किया है।
-
Mamta Kulkarni: क्या साध्वी बनने का नाटक कर रही थीं ममता कुलकर्णी? अब गोवा में कर रहीं ऐसा काम, लोग हुए हैरान -
प्यार में ये कैसा पागलपन? महेश भट्ट के लिए सड़क पर बिना कपड़ों के दौड़ीं ये फेमस एक्ट्रेस, फिर हुआ दर्दनाक अंत -
Sone ka Bhav: जंग के बीच सोने में बड़ी गिरावट! 7000 रुपये सस्ता, क्यों गिर रहा है भाव? आज का लेटेस्ट Gold Rate -
Weather Delhi NCR: दिल्ली में कब साफ होगा मौसम? दो दिन बाद फिर लौटेगी बारिश, IMD के अलर्ट ने बढ़ाई टेंशन -
Hyderabad Gold Silver Rate Today: ईद के मौके पर सोना-चांदी ने किया हैरान, जानें कहां पहुंचा भाव? -
Gold Rate Today: सोना सस्ता या अभी और गिरेगा? Tanishq से लेकर Kalyan, Malabar तक क्या है गहनों का भाव? -
Iran Espionage Israel: दूसरों की जासूसी करने वाले इजरायल के लीक हुए सीक्रेट, Iron Dome का सैनिक निकला जासूस -
Petrol Price Hike: ईरान जंग का पहला झटका! पावर पेट्रोल हुआ महंगा, इतना बढ़ा दाम, चेक करें लेटेस्ट रेट -
Weather UP: लखनऊ में 60KM की स्पीड से चलेंगी हवाएं! इन 26 जिलों में बारिश के साथ ओले गिरने का अलर्ट -
धामी मंत्रिमंडल में शामिल हुए ये 5 विधायक, दिल्ली से नाम हुए फाइनल, कुछ नामों ने चौंकाया, जानिए पूरी लिस्ट -
Surya Midha Net Worth: कौन हैं 22 साल के सूर्या मिधा? जकरबर्ग को पछाड़ बने सबसे युवा अरबपति? अथाह है संपत्ति -
Petrol Price: पेट्रोल के बाद Industrial Diesel भी महंगा, आपके शहर में कहां पहुंचा रेट?












Click it and Unblock the Notifications