खुला चैलेंज! ताइवान पर 'अटैक' किया तो जीत नहीं पाएगा चीन, 'दोषी' कहलाएंगे शी जिनपिंग
ताइवान की सरकार का कहना है कि केवल द्वीप के 23 मिलियन लोग ही अपना भविष्य तय कर सकते हैं, और चूंकि ताइवान पर कभी भी पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना का शासन नहीं रहा है, इसलिए चीन की संप्रभुता का दावा शून्य है।
चीन (China) की विस्तारवादी सोच दुनिया के लिए परेशानी का विषय बना हुआ है। नैन्सी पेलोसी के ताइवान दौरे के बाद से 'ड्रैगन' देश ताइवान को डराता रहता है। वह सैन्य अभ्यास के नाम पर ताइवान जलडमरूमध्य में तनाव पैदा करता जा रहा है। चीन ने पहले ही दुनिया को अगाह कर चुका है कि जरूरत पड़ने पर वह बल का प्रयोग करके ताइवान को बीजिंग का हिस्सा बना लेगा। चीन के खतरनाक इरादे से परेशान ताइवान ने अब बड़ा बयान दे दिया है। ताइपे ने कह दिया है कि, बीजिंग कभी भी ताइवान को बलपूर्वक जीत नहीं पाएगा।

शी जिनपिंग को ताइवान ने दी नसीहत
ताइवान (Taiwan) के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी ने गुरुवार को ताइवान पर अटैक को लेकर चीन को बड़ी बात कह दी है। सुरक्षा अधिकारी का कहना है कि, अगर चीन ताइवान पर हमला करता है और युद्ध नहीं जीतने की स्थिति में शी जिनपिंग (Xi Jinping) पूरे चीनी समुदाय की नजर में दोषी कहलाएंगे। ताइवान ने बताया कि शी जिनपिंग कैसे 'दोषी' बन जाएंगे। शीर्ष सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि ताइवान पर हमला करते ही चीन को सबसे पहले अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और राजनयिक अलगाव का सामना करना पड़ जाएगा। इसके बाद अगर वह युद्ध हार जाता है तो इससे और भी बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी। अगर ऐसा हुआ तो चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग चीन के नागरिकों की नजर में 'दोषी' बन जाएंगे।

चीन ताइवान को अपना हिस्सा समझता है
बता दें कि, चीन ने पिछले दो सालों में लोकतांत्रिक शासित ताइवान के खिलाफ सैन्य और राजनीतिक दबाव को और अधिक बढ़ा दिया है। जिससे क्षेत्र में तनाव उत्पन्न हो गए हैं। ताइवान हमेशा से चीन की विस्तारवादी सोच के खिलाफ रहा है। वह ताइवान को चीन का ही एक हिस्सा मानता आ रहा है। चीन की इस सोच को अमेरिका समेत कई पश्चिम देश नकार चुके हैं। वहीं, चीन की इस विस्तारवादी सोच ताइवान सरकार ने तो बड़ी दृढ़ता के साथ खारिज कर दिया है।

चीन के लोग करेंगे ताइवान मुद्दे का हल, शी ने कहा
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रविवार को चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी की दो दशक की कांग्रेस का उद्घाटन करते हुए कहा कि ताइवान मुद्दे को हल करना चीनी लोगों पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि ताइवान के खिलाफ जाने के लिए बीजिंग कभी भी बल प्रयोग के अधिकार को नहीं छोड़ेगा, इसके बावजूद चीन इस मसले का शांतिपूर्ण समाधान के लिए प्रयास करेगा।

चीन हमला करेगा तो परिणाम भुगतेगा
वहीं संसद की बैठक से इतर पत्रकारों से बात करते हुए ताइवान के राष्ट्रीय सुरक्षा ब्यूरो के प्रमुख चेन मिंग-टोंग ने कहा कि अगर शी जिनपिंग ताइवान पर हमला करने की अपनी धमकियों का पालन करते हैं तो उन्हें बड़ी आपदा का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि चीन का ताइवान को बल प्रयोग से जीतने की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसा करने के लिए चीन को अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और राजनयिक अलगाव का सामना करना पड़ेगा और शी जिनपिंग चीनी जनता की नजर में दोषी साबित हो जाएंगे।

हमारे नागरिक देश का भविष्य तय करेंगे
ताइवान की सरकार का कहना है कि केवल द्वीप के 23 मिलियन लोग ही अपना भविष्य तय कर सकते हैं, और चूंकि ताइवान पर कभी भी पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना का शासन नहीं रहा है, इसलिए चीन की संप्रभुता का दावा शून्य है। चेन ने बात को स्पष्ट करते हुए कहा कि दोनों पक्षों को एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए और अलग-अलग विकास करना चाहिए, जिससे लोगों को खुशी मिलेगी।

ताइवान बातचीत करना चाहता है और चीन जंग चाहता है!
वहीं, ताइवान की राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन (Tsai Ing-wen) ने बार-बार समानता और आपसी सम्मान के सिद्धांतों के आधार पर चीन के साथ बातचीत फिर से शुरू करने की पेशकश कर चुकी हैं। हालांकि, बीजिंग ने उनकी पेशकश को खारिज कर दिया है और जोर देकर कहा है कि उन्हें पहले यह स्वीकार करना चाहिए कि ताइवान चीन का हिस्सा है। राष्ट्रपति त्साई चीन के बढ़ते खतरे का जवाब देने के लिए एक सैन्य आधुनिकीकरण कार्यक्रम की देखरेख कर रही हैं। अगर आगे चीन ताइपे को कोई भी नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा तो उसका करारा जवाब दिया जा सकेगा।
(Photo Credit: Twitter & PTI)












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