इस 'अचूक हथियार' से चीन ने रोके कोरोना के मामले, जानिए बाकी देशों के लिए क्यों है ये मुश्किल

वुहान। दुनिया के लिए इस वक्त कोरोना वायरस (COVID-19) सबसे बड़ी मुसीबत बना हुआ है। 100 से भी ज्यादा देश इसकी चपेट में आ गए हैं। दुनियाभर में वायरस के कारण 4000 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। वहीं संक्रमित लोगों की संख्या एक लाख 16 हजार का आंकड़ा पार कर चुकी है। भारत की बात करें तो यहां भी संक्रमित मामलों की संख्या 60 हो गई है। चीन के बाद वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित ईरान, इटली, जापान और दक्षिण कोरिया हैं।

'सोशल न्यूक्लियर वीपन' की सहायता

'सोशल न्यूक्लियर वीपन' की सहायता

हालांकि चीन में वायरस के मामले लगातार कम हो रहे हैं। लेकिन बाकी देशों में इसके मामले कई गुना तेजी से बढ़ रहे हैं। डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने 'सोशल न्यूक्लियर वीपन' की सहायता से वायरस के बढ़ते मामलों पर लगाम लगाई है। जो पश्चिमी देशों के लिए कर पाना मुश्किल है। ये बात एक विशेषज्ञ ने कही है। येल यूनिवर्सिटी में सोशल एंड नेचुरल साइंस के प्रोफेसर निकोलस ए. क्रिसटाकिस ने ट्विटर पर इस बारे में बताया।

लोकतांत्रित देशों के लिए मुश्किल

लोकतांत्रित देशों के लिए मुश्किल

उन्होंने ट्वीट कर ये बताया कि कैसे चीन ने कोरोना वायरस के खतरे को अपनी सीमा में कम कर लिया है और क्यों लोकतांत्रित देशों के लिए ऐसा कर पाना मुश्किल हो सकता है। बता दें चीन के वुहान शहर से शुरू हुआ ये वायरस तेजी से यूरोपीय और पश्चिमी देशों में फैलता जा रहा है। इटली तो पूरी तरह से लॉकडाउन है। इस बीच चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वुहान का दौरा किया। जो वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित रहा है।

930 मिलियन लोग घरों में ठहरे

930 मिलियन लोग घरों में ठहरे

निकोलस ए. क्रिसटाकिस ने कहा कि चीन की सत्तावादी सरकार के कारण ही यहां कोरोना वायरस के मामलों में कमी आई है। चीन ने 90 लाख से भी ज्यादा लोगों के घरों से निकलने पर रोक लगा दी है। ताकि वायरस तेजी से ना फैले। ये चीजें अमेरिका और अन्य देशों में हो पाना मुश्किल हैं। उन्होंने लिखा, 23 जनवरी की शुरुआत से ही उन्होंने काफी बड़ी जनसंख्या पर प्रतिबंध लगाए। चीन के एक प्रांत में तो 930 मिलियन लोग घरों में ठहरे और हफ्ते में एक दिन ही बाहर निकलते थे। इस तरह से सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों को लागू करना पहले कभी नहीं देखा गया है।

'क्लोज्ड-ऑफ मैनेजमेंट' किया गया

'क्लोज्ड-ऑफ मैनेजमेंट' किया गया

उन्होंने कहा कि कई चीनी शहरों में तो अभी भी ऐसा हो रहा है, जबकि छह हफ्ते से अधिक का समय हो गया है। ऐसा शहरों की स्थिति के अनुसार हो रहा है। यहां सरकार और मीडिया ने मिलकर 'क्लोज्ड-ऑफ मैनेजमेंट' किया है। क्रिसटाकिस के मुताबिक, 'क्लोज्ड-ऑफ मैनेजमेंट' के तहत लोगों और वाहनों की अच्छे से जांच की जाती है। लोगों के शरीर के तापमान की जगह-जगह जांच की जाती है। वाहनों, फूड डिलिवरी तक की जांच होती है। एक घर से निकलने के लिए एक व्यक्ति को ही मंजूरी मिलती है।

घरों में फंसे लोगों की मदद

घरों में फंसे लोगों की मदद

चीन में रेलवे, हाईवे और सार्वजनिक वाहनों पर तुरंत रोक लगाई गई। फरवरी की शुरुआत में ऐसा 48 शहरों और चार प्रांतों में किया गया। इसके साथ ही 'क्लोज्ड-ऑफ मैनेजमेंट' के तहत घरों में फंसे लोगों की सेवा भी शामिल होती है। कई क्षेत्रों में तो श्रमिकों को लोगों तक भोजन पहुंचाने के लिए भेजा जा रहा है। कई शहरों में दुकानों पर उन्हीं लोगों को सामान बेचा जा रहा है, जिनके पास परमिट हैं।

स्काइप पर ही बच्चों की पढ़ाई

स्काइप पर ही बच्चों की पढ़ाई

प्रोफेसर ने आगे कहा कि चीन में स्काइप पर ही बच्चों को घरों पर पढ़ाया जा रहा है। चीन धीरे-धीरे प्रतिबंध हटा रहा है लेकिन अधिकारी भविष्य के लिए योजना को लागू करने में लगे हैं। यहां लोग एक दूसरे से दूरी बनाकर रखें, इसके लिए लिफ्ट को चार भागों में विभाजित किया गया है। चार लोगों से ज्यादा लिफ्ट में नहीं जा सकते। लोग इंतजार करने में सहयोग दे रहे हैं। चीन के अनोखे राजनीतिक और सामाजिक वातावरण ने वायरस से इतनी कुशलता से मुकाबला करने में मदद की है।

जगह-जगह जांच की जा रही है

जगह-जगह जांच की जा रही है

हैरानी की बात तो ये है कि चीन में जो लोग अपने वाहनों से भी सफर कर रहे हैं, उन्हें तक हर रास्ते में रोका जा रहा है। लोगों की जगह-जगह जांच की जा रही है। जिसमें भी कोरोना वायरस के संक्रमण मिल रहे हैं, उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया जा रहा है। इसके साथ ही वाहनों में कीटाणुनाशक का छिड़काव हो रहा है। लोगों के लिए जगह-जगह क्वारंटाइन की सुविधा है। गलत जानकारी रोकने के लिए सोशल मीडिया पर नजर रखी गई है।

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