भारत के मालाबार एक्सरसाइज से घबराया ड्रैगन, सैकड़ों लोअर ऑर्बिट सैटेलाइट से जासूसी कर रहा है चीन

Malabar Exercise 2023: भारत और क्वाड के पार्टनर्स, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के युद्धपोत ऑस्ट्रेलिया में हाई-एंड वारफेयर एक्सरसाइज कर रहे हैं, जिससे ड्रैगन बुरी तरह से घबरा गया है और सैकड़ों चीनी सैटेलाइट्स चल रहे सैन्य अभ्यास को लेकर मूल्यवान खुफिया जानकारी जुटा रहे हैं।

मालाबार अभ्यास साल 1992 में भारत और अमेरिका के बीच वार्षिक द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास के रूप में शुरू हुआ था। हालांकि, तब से यह चतुर्भुज सुरक्षा संवाद (QUAD) का गठन करने वाले सभी चार इंडो-पैसिफिक साझेदार देशों को शामिल करने के लिए विकसित हुआ है और इसमें भारत और अमेरिका के अलावा जापान और ऑस्ट्रेलिया भी शामिल हैं।

Malabar Exercise 2023

मालाबार एक्सरसाइज से घबराया चीन

चीन की ओर से लगातार आलोचना के बाद, चीन के बढ़ते प्रभाव पर बढ़ती चिंताओं को देखते हुए, मालाबार एक्सरसाइज को अक्सर इंडो-पैसिफिक में स्थिरता और सुरक्षा की रक्षा के लिए, क्वाड देशों द्वारा एक सामूहिक प्रतिक्रिया के रूप में देखा जाता है।

इस बार मालाबार मल्टी-नेशनल एक्सरसाइज का 31वां एडिशन चल रहा है और ऑस्ट्रेलियाई ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है, कि चीन ने मालाबार अभ्यास पर निगरानी रखने और डेटा इकट्ठा करने के लिए लोअर ऑर्बिट सैटेलाइटों से निगरानी कर रहा है।

रिपोर्ट में दावा किया गया है, कि चीन के कई लोअर ऑर्बिट सैटेलाइट (एलईओ) रणनीतिक रूप से ऑस्ट्रेलिया के ऊपर मौजूद हैं, जो व्यवस्थित रूप से सैन्य प्रशिक्षण अभियानों के बारे में जानकारी प्राप्त कर रहे हैं।

एबीसी न्यूज ने, कॉमर्शियल स्पेस डेटा का हवाला देते हुए कहा है, कि हाल ही में "एक्सरसाइज टैलिसमैन सेबर" के पूरा होने और चल रहे "एक्सरसाइज मालाबार" के दौरान बीजिंग की काफी तेज निगरानी कर रहा है।

जुलाई में, रिपोर्ट में कहा गया था, कि कैनबरा स्थित एक रक्षा कंपनी ईओएस स्पेस सिस्टम्स ने तीन चीनी भूस्थैतिक कक्षा उपग्रहों की गतिविधियों की निगरानी की है। इन चीनी उपग्रहों ने उत्तरी ऑस्ट्रेलिया में तावीज़ सेबर युद्ध स्पोर्ट्स की बारीकी से निगरानी करने के लिए रणनीतिक रूप से खुद को भूमध्य रेखा के नीचे स्थित कर लिया था।

इन उपग्रहों में चीन के शियान 12-01 उपग्रह की पहचान की गई, जो धीरे-धीरे उत्तरी ऑस्ट्रेलियाई क्षेत्र में पश्चिम की ओर बढ़ रहा था।

इसके अलावा, शिजियन-17 और शिजियन-23 सैटेलाइट्स को पूर्व की ओर बढ़ते हुए ट्रैक किया गया है, जिससे ये दोनों सैटेलाइट युद्धाभ्यास को लेकर प्रमुख जानकारियां जुटाने में कायमबा रहे हैं।

ईओएस स्पेस सिस्टम्स ने यह भी खुलासा किया है, कि 300 से ज्यादा सैटेलाइट्स सैन्य अभ्यास के दौरान जमीन-आधारित गतिविधियों की सावधानीपूर्वक जांच करते हैं। विशेष रूप से, सिडनी हार्बर के आसपास केंद्रित मालाबार अभ्यास की शुरुआत के बाद से 3,000 से ज्यादा बार इन सैटेलाइट्स ने उड़ानें भरी हैं।

Malabar Exercise 2023

चीन की निगरानी क्षमता क्या है?

चीन ने पिछले कुछ सालों में पृथ्वी के लोअर ऑर्बिट से जमीन पर संचालित होने वाले किसी भी घटना को देखने की क्षमता में जबरदस्त इजाफा किया है, खासकर इस साल की शुरुआत में जब एक चीनी उच्च ऊंचाई वाला जासूसी गुब्बारा अमेरिकी क्षेत्र से गुजरा था।

इसके बाद, रिपोर्टें सामने आईं हैं, कि जनवरी 2022 में भारत के अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के ऊपर आसमान में उसी तरह का गुब्बारा देखा गया था, जिस तरह का गुब्बारा अमेरिका में देखा गया था।

इस घटनाक्रम से यह संभावना बढ़ गई है कि बीजिंग ऑस्ट्रेलिया में आयोजित होने वाले मालाबार सैन्य अभ्यास की निगरानी कर सकता है।

लेटेस्ट रिपोर्ट से पता चलता है, कि ऑस्ट्रेलिया के ऊपर चीनी सैटेलाइट्स काफी करीब से सर्विलांस करने में सक्षम हैं और वो लगातार बीजिंग को युद्धाभ्यास से संबंधित बारीक से बारीक जानकारियां भेजने में सक्षम हैं।

यूरेशियन टाइम्स की एक रिपोर्ट में इसरो के पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक देबदत्त मिश्रा ने बताया, कि चीन अपने लोअर ऑर्बिट सैटेलाइट से, सैन्य गतिविधियों की सहजता से निगरानी करने में सक्षम है।

हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया, कि यह क्षमता कोई नया डेवलपमेंट नहीं है और अतीत में, संयुक्त राज्य अमेरिका और रूस ने भी अन्य देशों के सैन्य युद्धाभ्यास पर नजर रखने के लिए अपने उपग्रहों का इस्तेमाल किया है।

मिश्रा, जो वर्तमान में एरिशा स्पेस प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर और सीओओ के रूप में कार्यरत हैं, उन्होंने आगे कहा, कि यद्यपि उपग्रह मौसम की भविष्यवाणी और प्रसारण सहित विविध प्रकार के कार्य करते हैं, लेकिन यह निर्विवाद है कि उनकी स्थापना मुख्य रूप से रक्षा और रणनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित है।

उन्होंने एक और मामले के बारे में बात करते हुए कहा, कि जब भारत पोकरण में परमाणु परीक्षण करने वाला था, उस वक्त अमेरिका लगातार भारत की निगरानी कर रहा था। उन्होंने कहा, कि शक्तिशाली देशों के पास ऐसे सैटेलाइट्स मौजूद हैं, जो काफी आसानी से सर्विलांस कर सकते हैं।

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