Video: चीन ने जारी किया गलवान घाटी हिंसा का वीडियो, विशेषज्ञ बोले-भारत के लिए बड़ा सुबूत

बीजिंग। भारत और चीन के बीच जारी तनाव चीनी अथॉरिटीज ने अपनी जनता को भ्रम में डालने के मकसद से एक वीडियो सोशल मीडिया पर जारी किया है। बताया जा रहा है कि वीडियो 15 जून को गलवान घाटी में इंडियन आर्मी और पीपुल्‍स लिब्रेश्‍शन आर्मी (पीएलए) के बीच हुई हिंसा का है। हांगकांग से निकलने वाले अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्‍ट की तरफ से बताया गया है कि यह उस हिंसा का अभी तक पहला वीडियो है और चीनी सोशल मीडिया साइट्स पर वायरल हो गया है। इस वीडियो पर अभी तक भारत की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।

शहीद हुए थे 20 भारतीय सैनिक

शहीद हुए थे 20 भारतीय सैनिक

जो वीडियो सामने आया है वह लद्दाख की गलवान घाटी का बताया जा रहा है। यहीं पर जून माह के दूसरे हफ्ते में भारत और चीन के जवानों के बीच हिंसा हुई थी। उस हिंसा में भारतीय सेना के 20 सैनिक शहीद हो गए थे जिसमें 16 बिहार रेजीमेंट के कमांडिंग ऑफिसर (सीओ) कर्नल संतोष बाबू भी थे। चीन के भी करीब 45 जवान मारे गए थे। लेकिन उसने अभी तक मारे गए जवानों की संख्‍या नहीं बताई है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्‍ट ने चीनी मिलिट्री के सूत्रों के हवाले से लिखा है कि वीडियो असली है और कुछ माह पहले ही रिकॉर्ड हुआ है। मंगलवार को पहली बार वीडियो सोशल मीडिया साइट पर आया है। अखबार के मुताबिक फुटेज में नजर आ रहा है कि चीनी सैनिकों के हाथ में डंडे और रॉड्स हैं। कुछ भारतीय सैनिकों के हाथ में भी राइफल हैं लेकिन उन्‍होंने फायरिंग नहीं की है।

विशेषज्ञ बोले मई का है वीडियो

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्‍ट के मुताबिक सैनिकों ने संयम बरता है और हथियार का प्रयोग न करके समझौते का पालन किया है। वीडियो पर जो वॉटरमार्क है, उससे पता लगता है कि इसे किसी चाइनीज फोन पर रिकॉर्ड किया है। वहीं एक मिलिट्री विशेषज्ञ ने कहा है कि फुटेज 15 जून को हुए गलवान घाटी संघर्ष का नहीं लगता है। इसे देखने से पता चलता है कि यह घटना मई की शुरुआत में हुई थी जब दोनों सेनाओं के बीच विवाद शुरू हुआ था। विशेषज्ञों के मुताबिक जिस तरह के हथियार सैनिकों के पास हैं, उससे साफ पता लगता है कि वीडियो मई माह का है। मई के बाद से ही दोनों देशों ने अपने सैनिकों को बेहतर हथियारों से लैस कर दिया है।

भारत के लिए होगा मददगार साबित

भारत के लिए होगा मददगार साबित

अखबार ने एक विशेषज्ञ के हवाले से लिखा है कि शायद चीन ने यह वीडियो इसलिए रिलीज किया है कि वह अपनी जनता को इस बात का सुबूत दे सके कि विवादित सीमा पर क्‍या चल रहा है। चीन की सरकार चाहती है कि चीन की जनता को बताया जा सके कि कैसे उनकी सेना सीमाओं की रक्षा कर रही है। वहीं भारत इस वीडियो से यह साबित कर सकता है कि उसने हथियारों का प्रयोग न करके समझौते का पालन किया। वह अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय को बता सकता है कि किसने पहले समझौते का उल्‍लंघन किया और पहले लड़ाई किसकी तरफ से शुरू की गई थी।

मई माह से आमने-सामने हैं सेनाएं

मई माह से आमने-सामने हैं सेनाएं

भारत और चीन के बीच इस वर्ष मई माह से ही तनाव जारी है। इसके बाद ही कई दौर मिलिट्री और राजनयिक वार्ता हो चुकी है। लेकिन पिछले करीब 15 दिनों से बॉर्डर पर तनाव बढ़ गया है। सात सितंबर को चीन ने भारतीय सेना पर फायरिंग का आरोप लगाया है। चीन की तरफ से कहा गया था कि भारतीय जवानों ने पैंगोंग त्‍सो के दक्षिणी हिस्‍से में उनके जवानों पर फायरिंग की। जबकि मंगलवार को भारतीय सेना ने इस बात से इनकार कर दिया है। भारत की तरफ से कहा गया है कि उसके जवानों ने लाइन ऑफ एक्‍चुअल कंट्रोल (एलएसी) को पार नहीं किया और न ही फायरिंग की थी।

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