IADWS: भारत के नए एयर डिफेंस सिस्टम की सफल टेस्टिंग के बाद लेजर हथियार क्लब में शामिल हुआ भारत, बौखलाया चीन
IADWS: भारत ने 24 अगस्त, 2025 को एक नए इंटिग्रेटेड एयर डिफेंस वेपन सिस्टम का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। इस प्रणाली में तमाम तरह के हथियार शामिल हैं, जिन्होंने ओडिशा के पूर्वी तट पर अलग-अलग ऊंचाई और रेंज पर तीन लक्ष्यों को मार गिराया। भारतीय रक्षा मंत्रालय ने इसकी पुष्टि की है। लेकिन चीन का इस टेस्टिंग पर बुरा हाल है।
चीनी मीडिया, चाइना सेंट्रल टेलीविज़न के मिलिट्री चैनल द्वारा जारी एक स्क्रीनशॉट में इस परीक्षण को दिखाया गया है। भारतीय मीडिया ने भी सोमवार को रक्षा मंत्रालय के हवाले से इस परीक्षण की जानकारी दी।
चीन ने किए ऊट-पटांग सवाल
एक चीनी एक्सपर्ट ने सोमवार को टिप्पणी की कि इस शॉर्ट-रेंज प्रणाली में लेजर हथियार को शामिल करना शानदार है, लेकिन यह कितना ऑपरेशनल और इफेक्टिव है इसका साबित होना अभी बाकी है। उनका कहना है कि परीक्षण को पहले से तय करने के बाद किया गया जिसमें वास्तविक युद्ध की परिस्थितियां शामिल नहीं थीं। इसलिए इस प्रदर्शन को पूरी तरह से सटीक नहीं माना जा सकता।

चीन के कहने का मतलब
जब मिसाइल का परीक्षण होता है तभी उसकी काबिलियत का पता चलता है। पूरी दुनिया में टेस्टिंग ऐसे ही होती है, यहां तक कि खुद चीन भी ऐसा ही करता है। लेकिन भारत के शक्ति से तिलमिलाए चीन का ये कहना तो बनता है। अब सिर्फ एक मिसाइल की सफल टेस्टिंग के लिए अब युद्ध तो नहीं कर सकते।
10 साल का टारगेट
DRDO के मुताबिक, इंटिग्रेटेड एयर डिफेंस वेपन सिस्टम (IADWS) का यह पहला परीक्षण भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा शनिवार को किया गया था। यह प्रणाली एक बड़े राष्ट्रीय सुरक्षा कवच का हिस्सा बनने की उम्मीद है।यह विकास भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भारत की सैन्य और नागरिक प्रतिष्ठानों को हवाई हमलों से बचाने के लिए एक शक्तिशाली सैन्य क्षमता बनाने की घोषणा के कुछ दिनों बाद आया है, जिसमें उन्होंने आक्रामक हथियारों के साथ इंटिग्रेशन एक स्वदेशी वायु रक्षा कवच विकसित करने के लिए 10 साल की समय सीमा तय की है।
क्या-क्या है इसमें?
IADWS एक मल्टी लेवल एयर डिफेंस सिस्टम है, जिसमें त्वरित प्रतिक्रिया सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें (QRSAM), बहुत छोटी रेंज की वायु रक्षा प्रणाली (VSHORADS) और एक लेजर-आधारित निर्देशित ऊर्जा हथियार शामिल हैं।
भारतीय रक्षा मंत्रालय के हवाले से आई खबर के मुताबिक फ्लाइट टेसटिंग के दौरान, दो हाई स्पीड फिक्स्ड-विंग मानवरहित हवाई वाहन लक्ष्यों और एक मल्टी-कॉप्टर ड्रोन सहित तीन अलग-अलग लक्ष्यों को QRSAM, VSHORADS और उच्च-ऊर्जा लेजर हथियार प्रणाली द्वारा विभिन्न रेंज और ऊंचाई पर एक साथ संलग्न और पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया।
बिना एक गलती के पूरी की टेस्टिंग
भारतीय रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि मिसाइल प्रणालियों, ड्रोन का पता लगाने और नष्ट करने वाली प्रणाली, और कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम के साथ कम्युनिकेशन और रडार सहित हथियार प्रणाली के सभी घटकों बिना किसी एक गलती के शानदार प्रदर्शन किया। एकीकृत परीक्षण रेंज, चांदीपुर द्वारा तैनात रेंज उपकरणों ने उड़ान डेटा को सफलतापूर्वक कैप्चर किया।
क्या बोला बीजिंग?
बीजिंग स्थित एयरोस्पेस नॉलेज पत्रिका के मुख्य संपादक वांग यानान ने सोमवार को ग्लोबल टाइम्स को बताया कि भारतीय मीडिया के विवरण के आधार पर, भारतीय IADWS एक एयर डिफेंस सिस्टम है जिसे ड्रोन, क्रूज मिसाइलों, हेलीकॉप्टरों और विमानों के लक्ष्यों का मुकाबला करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
वांग ने आगे कहा कि इस बात को ध्यान में रखते हुए, एक पूर्वनिर्धारित प्रशिक्षण परिदृश्य के तहत किया गया परीक्षण प्रणाली की प्रभावशीलता को सही मायने में सत्यापित नहीं कर सकता, क्योंकि वास्तविक युद्ध में, लक्ष्य तत्व अधिक जटिल और अप्रत्याशित हो सकते हैं। वांग का चिंता बताती है कि भारत के इस एयर डिफेंस सिस्टम को लेकर वे कितने चिंतित हैं।
Weapon Club में शामिल हुआ भारत
मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो भारत ऐसे देशों के एक विशेष लीग में शामिल हो गया है जिनके पास यह तकनीक है, जिसमें अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन, जर्मनी और इज़राइल शामिल हैं। इसी बात से चीन ज्यादा परेशान है।
चीन ने माना कुछ बड़ा कर गया है भारत
वांग ने बताया कि IADWS की तीन परतों में से, वाहन-आधारित वायु रक्षा मिसाइल QRSAM और मैन-पोर्टेबल वायु रक्षा प्रणाली VSHORADS तकनीकी रूप से नवीन नहीं हैं, लेकिन लेजर प्रणाली को वास्तव में एक महत्वपूर्ण प्रगति माना जाना चाहिए। दुनिया में केवल कुछ ही देश हैं जिन्होंने युद्ध-तैयार लेजर प्रणालियां तैनात की हैं।
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