भारत के सबसे बड़े 'दुश्मन' ने लैब में बनाए वैंपायर चूहे, कर रहा इंसानों को अमर बनाने की कोशिश
नई दिल्ली: दिसंबर 2019 में चीन के वुहान शहर में कोरोना वायरस मिला, जो देखते ही देखते पूरी दुनिया में फैल गया। इस वायरस ने अब तक लाखों लोगों की जान ली और कई देशों की अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया। शक है कि चीन ने कोरोना को वुहान की एक लैब में तैयार किया। इसके बावजूद वो सुधरने का नाम नहीं ले रहे। अब उन्होंने लैब में वैंपायर चूहे को तैयार किया है।

उम्र बढ़ने से रोकेगा?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन के वैज्ञानिक बढ़ती उम्र को रोकने या कम करने का उपाय खोज रहे हैं। इसके लिए उन्होंने लैब में वैंपायर चूहे तैयार किए। जिस पर ये प्रयोग किया जा रहा है। अगर ये प्रयोग सफल रहा तो इंसानों पर भी इसका ट्रायल किया जाएगा। इस प्रयोग को लेकर सेल स्टेम सेल पत्रिका में एक रिपोर्ट भी प्रकाशित हुई थी। इस तकनीकी को हेट्रोक्रोनिक पैराबायोसिस (एचपी) कहा जा रहा।

चूहों के शरीर में पहुंचाया गया नया खून
रिपोर्ट में बताया गया कि खून जब पुराना हो जाता है, तो अंगों, टिश्यू और सेल्स को पुराना करता है। इस वजह से इंसानों की शक्ति कम होती जाती है और वो बूढ़े हो जाते हैं। अगर इस प्रक्रिया को रोक दिया जाए, तो इंसान जवान ही बना रहे। इस वजह से चीनी वैज्ञानिकों ने बूढ़े चूहे के शरीर में इंजेक्शन के जरिए खून पहुंचाया। इसके लिए दोनों चूहों के सर्कुलेटरी सिस्टम को सर्जिकली जोड़ दिया गया था।

1.64 लाख सिंगल सेल की तुलना
नए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने सिंगल-सेल स्तर पर चूहों में तकनीक के प्रभावों की जांच की, जिससे एचपी और उम्र बढ़ने का एक प्रणालीगत एटलस तैयार हुआ। इस शोध में वैज्ञानिकों ने पिछले 5 साल में सात अंगों में 164,000 से ज्यादा सिंगल सेल को अलग किया और फिर उसकी तुलना की।

क्या-क्या अध्ययन में पता चला?
वैज्ञानिकों ने अध्ययन में पाया कि हेमटोपोइएटिक स्टेम और प्रोजेनिटर सेल (एचएसपीसी), जो स्टेम सेल हैं, वो अन्य रक्त और प्रतिरक्षा कोशिकाओं को जन्म देते हैं। ये युवा रक्त के प्रति सबसे संवेदनशील हैं। ये शोध उम्र बढ़ने से संबंधित बीमारियों आदि के लिए जरूरी डेटा देगा। बूढ़े चूहे में नया खून पहुंचने पर उसकी उम्र पर प्रभाव पड़ा, लेकिन इंसानों को लेकर कुछ नहीं कहा जा सकता है।

क्यों उठ रहा सवाल?
आरोप है कि चीन ने वुहान की लैब में कोरोना वायरस को तैयार किया था, जो गलती से पूरी दुनिया में फैल गया। हालांकि चीन लगातार इस बात से इनकार करता रहता है। WHO की टीम भी जांच करने वुहान गई थी, लेकिन चीन ने सबूत उठा लिए। ऐसे में अब दूसरे देश चीन के इस प्रोजेक्ट पर सवाल उठा रहे हैं।












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